कुंभ नजदीक, दावे 'फेल'

आई एक्सक्लूसिव

-सीसामऊ नाले को छोड़कर कई नाले गिर रहे गंगा में, दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की पड़ताल में सच्चाई आई सामने

-गंगा में बैराज के पास गंगा के पानी में आ रहा झाग युक्त प्रदूषित पानी, कुंभ को लेकर किए गए दावों की खुली पोल

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KANPUR : कुंभ से पहले गंगा को अविरल और निर्मल बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन से लेकर प्रदेश और केंद्र सरकार की ओर से भी तमाम वायदे किए। इसके लिए पानी की तरह करोड़ों रुपए बहाए गए। लेकिन क्या कुंभ के दौरान लाखों श्रद्धालु क्या निर्मल गंगा में डुबकी लगाने का सौभाग्य मिलेगा? इसे लेकर अभी भी सवाल बने हुए हैं। क्योंकि सीसामऊ नाला टैपिंग को छोड़कर बाकी दावे फेल होते नजर आ रहे हैं। जलकल और जल निगम का दावा है कि परमट नाला, म्योर मिल नाला, नवाबगंज नाला, गुप्तारघाट नाला, रानीघाट नाला भी बंद कर दिया गया है। लेकिन दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने जब इन दावों का रियलिटी चेक किया तो ये नाले बदस्तूर गंगा में गिरते हुए मिले।

नमामि गंगे के तहत 63 करोड़ रुपए से इन नालों को टैप करने का दावा अधिकारी कर रहे हैं। बता दें कि कानपुर के 16 बड़े नाले गंगा में गिरते हैं। वहीं गंगा बैराज से बदबू और झाग वाला काला पानी गंगा की लहरों के साथ हिलोरे मार रहा है। इस पर विभागीय अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है और सब ठीक होने का दावा कर रहे हैं।

2 करोड़ लीटर सीवेज गिर रहा

पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मुताबिक परमट नाला से रोजाना 3.5 करोड़ लीटर सीवेज टैप होने से पहले गिरता था। जल निगम के मुताबिक इस नाले को पूरी तरह से टैप कर दिया गया है, लेकिन ट्यूजडे को रियलिटी चेक में इस नाले से सीवेज गंगा में गिरता हुआ मिला। हालांकि पहले के मुकाबले नाले का फ्लो कम जरूर था। यही हाल म्योर मिल, नवाबगंज, डबका नाले का मिला। इन नालों के मुंह गंगा में सीवेज गिराने के लिए पहले की तरह खुले हुए ही थे। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मुताबिक अब भी रोजाना गंगा में 2 करोड़ लीटर सीवेज गिर रहा है।

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2 नाले अब भी अधूरे

गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर के दावों के मुताबिक परमिया और गुप्तारघाट नाला को टैप करने के लिए निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। बता दें कि परमिया नाले से रोजाना गंगा में 3.5 करोड़ और गुप्तारघाट नाला से 3.5 करोड़ लीटर सीवेज गिर रहा है।

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पंपिंग स्टेशन हो रहे फेल

परमट पंपिंग स्टेशन का संचालन जलकल द्वारा किया जाता है। इससे परमट, म्योर मिल और नवाबगंज नाला का सीवेज पंप कर जाजमऊ एसटीपी तक भेजा जाता है। मामले में जलकल जीएम संजय कुमार सिन्हा ने बताया कि जल निगम के डायरेक्शन पर ही पंपों को चलाया जा रहा है। बाकी वह कुछ नहीं जानते हैं। वहीं जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर घनश्याम द्विवेदी के मुताबिक नाले कभी ओवरफ्लो होकर गंगा में गिरने लगते हैं।

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बैराज से भी गंदा पानी

पिछले एक हफ्ते से गंगा बैराज से भारी मात्रा में झाग और बदबूदार पानी छोड़ा जा रहा है। गंगा में दूर से भी इसे देखा जा सकता है। वहीं गंगा के पानी का रंग भी काला होने लगा है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा पानी गंगा में कैसे आ रहा है। उ। प्र। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के कानपुर रीजन के सीईओ कुलदीप मिश्रा ने बताया कि पीछे के जिलों से गंदा पानी आ रही है। इसको पता लगाया जा रहा है कि आखिर गंगा में गंदा और झाग वाला पानी कहां से आ रहा है?

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63 करोड़ से इन नालों की टैपिंग

-सीसामऊ नाला

-म्योर मिल नाला

-नवाबगंज नाला

-परमिया नाला

-गुप्तारघाट नाला

-डबका नाला

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इन स्टेशनों से पंपिंग

-गुप्तारघाट पंपिंग स्टेशन

-नवाबगंज पंपिंग स्टेशन

-भैरवघाट पंपिंग स्टेशन

-परमट पंपिंग स्टेशन

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टेनरी वेस्ट के ये बड़े नाले

नाला संचालित बंद टेनरी

डबका नाला 38 24

शीतला बाजार नाला 114 65

वाजिदपुर नाला 94 40

बुढि़याघाट नाला 18 07

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अधिकारियों के बोल

परमट पंपिंग स्टेशन का संचालन जल निगम के निर्देश पर ही किया जाता है। कब चलाना है और कब बंद करना है, यह वही तय करते हैं। नाला गिरने के संबंध में जल निगम से ही पूछिए।

-संजय कुमार सिन्हा, जीएम, जलकल।

परमट, म्योर मिल और नवाबगंज नाले को पूरी तरह से टैप किया जा चुका है। इसका संचालन परमट पंपिंग स्टेशन से होता है और यह जलकल ऑपरेट करता है। पंपिंग स्टेशन बंद होने से नाला गंगा में गिरने लगते हैं।

-घनश्याम द्विवेदी, प्रोजेक्ट मैनेजर, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई, जल निगम।

गंगा बैराज से प्रदूषित पानी कहां से आ रहा है। इसकी जांच की जा रही है। लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। कारणों का पता लगाया जा रहा है।

-कुलदीप मिश्रा, सीईओ कानपुर रीजन, उ.प्र। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।

Posted By: Inextlive