संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सीरिया को रासायनिक हथियारों से मुक्त करने के प्रस्ताव के मसौदे पर चर्चा शुरू हो गई है.


प्रस्ताव के बुनियादी मसौदे पर अमरीका और रूस की सहमति के बाद यह प्रक्रिया शुरू हुई है.न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के राजनयिकों के अनुसार इस मसौदे पर 15 सदस्यों वाली सुरक्षा परिषद में शुक्रवार को मतदान हो सकता है.इस समझौते से साथ ही सीरिया मसले पर  सुरक्षा परिषद में ढाई सालों से चल रहा गतिरोध समाप्त हो जाएगा.रूस और  अमरीका ने संबंध में एक योजना तैयार की थी जिसके तहत सीरिया साल 2014 के मध्य तक अपने रासायनिक हथियारों को सार्वजनिक करके नष्ट करने के लिए सहमत हो गया था.सुरक्षा परिषद में सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद के ख़िलाफ़ पश्चिमी देशों के समर्थन से तीन बार प्रस्ताव लाया गया था लेकिन रूस और चीन ने तीनों बार इसे पारित नहीं होने दिया था.सुरक्षा परिषद की बैठक से पहले रूस और अमरीका के बीच इसकी शब्दावली को लेकर मतभेद हो गया था.मतभेद
21 अगस्त को दमिश्क के घौटा इलाक़े में हुए रासायनिक हमले के बाद अमरीका ने सीरिया पर सैन्य कार्रवाई करने की धमकी दी थी.


संयुक्त राष्ट्र के जाँच दल ने अपनी रिपोर्ट में घौटा में हुए हमले में घातक रासायनिक गैस सारिन के प्रयोग की पुष्टि की थी. हालाँकि जाँच दल ने इस हमले के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया था.अमरीका, ब्रिटेन और फ्रांस ने कहा था कि यह रिपोर्ट उनके आरोपों की पुष्टि करती है क्योंकि रासायनकि हमला करने की क्षमता केवल सरकार के पास ही हो सकती है.रूस ने इन देशों के इस तर्क को ख़ारिज कर दिया था. इस मसले पर लावरोव ने कहा था, "रूस के पास यह मानने के 'गंभीर आधार' हैं कि यह हमले सीरिया सरकार के विरोधियों की कार्रवाई थी." सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद ने भी इन हमलों के लिए विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया था.राष्ट्रपति असद के ख़िलाफ़ 2011 से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों में अब तक एक लाख से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.सीरिया के लाखों लोग देश छोड़कर पड़ोसी देशों में चले गए हैं जबकि लाखों नागरिक आंतरिक विस्थापन का शिकार हुए हैं.

Posted By: Satyendra Kumar Singh