डॉक्टर्स नहीं दे रहे डाटा

2019-04-29T06:00:22+05:30

नोटिफिकेशन के एक साल बाद भी विभाग नहीं कर पा रहा कार्रवाई

2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाना चाहती है सरकार

2500 प्राइवेट डॉक्टर्स को रडार पर लिया था विभाग ने

- 400 डॉक्टर्स को प्राथमिकता पर रिकार्ड देने के लिए कहा था

MEERUT । टीबी के मरीजों का ट्रीटमेंट करने वाले 160 प्राइवेट क्लीनिक्स पर शासन के आदेशों का दम निकल रहा है। टीबी के इलाज में मोटी कमाई कर रहे ये डॉक्टर्स शासन से जानकारी छुपा रहे हैं। यही नहीं इनसे रिकार्ड निकलवाना जिला टीबी विभाग के लिए भी चुनौती बन गया है। मरीजों की जेब काट रहे इन डॉक्टर्स की वजह से मरीजों को सरकारी सुविधाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। नोटिफिकेशन के एक साल बाद भी जिला टीबी विभाग इन पर कोई कार्रवाई नहीं कर पाया है।

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यह है मामला

2025 तक सरकार को देश टीबी मुक्त बनाना है। इस योजना के तहत विभाग ने टीबी का इलाज कर रहे करीब 2500 प्राइवेट डॉक्टर्स को रडार पर लिया था। इनमें से टीबी मरीजों की अत्यधिक भीड़ वाले 400 डॉक्टर्स को विभाग ने प्राथमिकता पर रिकार्ड देने के लिए फिल्टर किया था। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार एक साल में सिर्फ 240 डॉक्टर्स ने ही रिकार्ड भेजा हैं। 160 डॉक्टर्स को शासन के निर्देशों का कोई असर नहीं पड़ा हैं। एक साल पहले टीबी के छुपे हुए मरीजों को ढूंढने के लिए सरकार ने रिकार्ड देने का नोटिफिकेशन जारी किया था। इसके अंर्तगत सभी प्राइवेट डॉक्टर्स व मेडिकल स्टोर्स को टीबी के एक-एक मरीज का डाटा स्वास्थ्य विभाग को देना था।

18 मेडिकल स्टोर्स का रिकार्ड

जानकारी छुपाने में शहर के मेडिकल स्टोर्स भी पीछे नहीं हैं। प्राइवेट डॉक्टर्स की तरह मेडिकल स्टोर्स भी रिकार्ड देने में कतरा रहे हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार मेरठ में करीब 3500 रिटेल व 1750 होलसेल मेडिकल स्टोर्स हैं। इनमें से मात्र 18 ने ही रिकार्ड देने की जहमत उठाई है।

कमाइर् का खेल

मोटी कमाई की वजह से प्राइवेट डॉक्टर्स और मेडिकल स्टोर्स मरीज व शासन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। फीस, जांच व दवाइयों में प्राइवेट डॉक्टर्स मरीजों की जेब काट रहे हैं। सीबीनेट जांच की बात करें तो सरकारी में फ्री इस जांच के बाहर 2 से ढ़ाई हजार रुपये हैं। वहीं एक मरीज की डेली डोज का खर्च भी करीब 50 रूपये हैं। मोटा-मोटा आंकड़ा देखें तो मेरठ में टीबी का बाजार कम से कम 6 करोड़ रूपये सालाना का है। होलसेल मार्केट की ही बात करें तो करीब-करीब 25 से 30 लाख रूपये की दवाइयां हर महीने खरीदी व बेची जाती है।

हो सकती है दो साल की सजा

जानकारी छुपाने वाले डॉक्टर्स के खिलाफ आईपीसी की धारा 269-270 के तहत एफआईआर दर्ज करवाने के निर्देश हैं। इसके तहत 6 महीने से लेकर दो साल तक की सजा का प्रावधान है।

प्राइवेट मरीजों की स्थिति

1 जनवरी 2018 से 31 मार्च- 1051

1 अप्रैल 2018 से 30 जून - 1246

1 जुलाई 2018 से 30 सितंबर तक- 888

1 अक्टूबर 2018 से 20 नवंबर तक - 342

21 नवंबर 2018 से 31 दिसंबर 2018- 895

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इनका है कहना

डाटा न देने वाले प्राइवेट डॉक्टर्स व मेडिकल स्टोर्स टीबी के मरीज न होने की बात कह देते हैं। हालांकि हम लगातार इनको डाटा देने के लिए कह रहे हैं। मीटिंग और बैठक के जरिए भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

डॉ। एमएस फौजदार, जिला टीबी अधिकारी, मेरठ।

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होलसेल बाजार में लगभग टीबी की दवाइयों का कारोबार खत्म हो गया है। रिटेल व प्राइवेट डॉक्टर्स खुद ही दवाइयां बेच रहे हैं।

रजनीश कौशल, महामंत्री, केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन

inextlive from Meerut News Desk


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