कानून के फेर में फंस गई पांच माह की गर्भवती

2019-04-18T06:00:46+05:30

दून महिला हॉस्पिटल में बच्चा बदले जाने का मामला

देहरादून।

कानून के फेर में फंसी पांच माह की गर्भवती एक सप्ताह से दून महिला अस्पताल में है। वह बार-बार घर जाने की गुहार लगा रही है लेकिन पुलिस प्रशासन की अनदेखी से अपने घरवालों से नहीं मिल पा रही है। मामले की जानकारी मिलने पर बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी और सदस्य शारदा त्रिपाठी दून महिला अस्पताल पहुंचे और महिला को जल्द से जल्द घर भिजवाने के लिए जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

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हरकी पैड़ी में है घर

महिला अपना घर हरिद्वार के हरकी पैड़ी में बता रही है। वह बता रही कि उसके दो बच्चे हैं। वह पति और बच्चों के पास जाना चाहती है। वहीं अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि पुलिस की ओर से बार-बार कहने के बावजूद भी कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है। ऐसे में वह मजबूर हैं और महिला को नारी निकेतन भेजे जाने की तैयारी की जा रही है।

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बच्चा बदलने के मामले में नहीं आई डीएनए रिपोर्ट

पिछले दिनों बच्चा बदलने के एक मामले में दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की ओर से खबरें प्रकाशित करने बाद डीएनए रिपोर्ट को लेकर बाल आयोग ने भी पूछताछ की। कुछ समय पहले दून महिला अस्पताल में दो महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया था। इनमें से एक लड़का था और एक लड़की। लड़का लेने को लेकर दोनों परिवारों के बीच झगड़ा हो गया था। इस पर कौन सा बच्चा किसका है ये जानने के लिए आयोग के निर्देशों के अनुसार डीएनए सैंपल कराया गया था। हालांकि रिपोर्ट में देर होने पर आयोग ने प्रबंधन को तलब किया।

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अव्यवस्थाओं पर बिफरी अध्यक्ष

बाल आयोग की अध्यक्ष दून महिला अस्पताल के निक्कू वार्ड में अव्यवस्थाएं देखकर बिफर गई। उन्होंने प्लास्टिक के गंदे बाउल में बच्चों को दूध दिए जाने पर आपत्ति जताई और कहा कि स्टील के साफ बाउल में बच्चों को दूध दिया जाए। साथ ही साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए।

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बच्चों के डीएनए सैंपल को लेकर रिपोर्ट अब तक हमें प्राप्त नहीं हुई है। जहां तक गंदे बाउल में दूध देने की बात है तो महिला अस्पताल से कभी नए बाउल्स और बोटल्स के लिए डिमांड नहीं आती है। जबकि हमारे पास सामान रखा हुआ है।

डा। केके टम्टा, एमएस दून हॉस्पिटल

inextlive from Dehradun News Desk


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