- गन्ना संस्थान में वीआईटी प्रेजेंट्स दैनिक जागरण आई नेक्स्ट इंजीनियरिंग गेटवेज-2018 में स्टूडेंट्स को मिले इंजीनियरिंग में करियर बनाने के टिप्स

LUCKNOW: कम्प्यूटर ही नहीं अब मेडसिन के क्षेत्र में भी इंजीनियरिंग की आ गई है। सभी क्षेत्रों में इंजीनियरिंग का दखल बढ़ता जा रहा है। इंजीनियरिंग के क्षेत्र में जॉब के अवसर बढ़ रहे हैं जबकि इंजीनियरों की कमी है। इंजीनियरिंग के क्षेत्र में ड्रीम जॉब तो है, लेकिन उसके लिए खुद को इस लायक बनाना होगा कि वह जॉब आपको मिल सके। गुरुवार को कुछ ऐसे ही सक्सेस मंत्र इंजीनियरिंग एक्सप‌र्ट्स ने स्टूडेंट्स को दिये। गन्ना संस्थान में आयोजित वीआईटी प्रेजेंट्स दैनिक जागरण आई नेक्स्ट इंजीनियरिंग गेटवेज-2018 में हिस्सा लेने के लिए सुबह से ही स्टूडेंट्स की भीड़ जमा होने लगी। इंजीनियरिंग फील्ड में अपना करियर देख रहे स्टूडेंट्स को फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ और बॉयोलॉजी के महारथियों ने महत्वपूर्ण टिप्स दिये।

विधिवत किया गया शुभारंभ

हमारे यहां फुली फ्लेक्सेबल क्रेडिट सिस्टम की व्यवस्था है। ऐसे में छात्र मेनस्ट्रीम के साथ अपने फेवरेट सब्जेक्ट्स का चुनाव भी कर सकते हैं। हमारे यहां स्पो‌र्ट्स एक्टीविटी और कल्चरल के कार्यक्रम भी होते हैं। प्लेसमेंट हमारे यहां 100 परसेंट है। प्लेसमेंट के मामले में वीआईटी का नाम लिम्का बुक ऑफ व‌र्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है। इंटरनेशनल लेवल पर 130 एमओयू वीआईटी ने साइन किए हैं। ऐसे में दो साल आप वीआईटी में स्टडी कर सकते हैं जबकि अन्य दो साल उस विदेशी संस्थान में पढ़ाई कर सकते हैं जहां से हमारा एमओयू साइन है। 62 से अधिक देशों के छात्र-छात्राएं हमारे यहां स्टडी करते हैं। हमारे यहां एडमिशन लेने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन किए जा सकते हैं। 28 फरवरी तक आवेदन लिए जाएंगे। 10 से 21 अप्रैल के बीच ऑनलाइन एग्जाम होंगे। इसके लिए विभिन्न शहरों को सेंटर बनाया गया है। लखनऊ भी इसमें शामिल हैं। सेलेक्ट होने के बाद स्टूडेंट की वीआईटी के किसी भी सेंटर पर काउंसिलिंग की जाती है। हमारे यहां एडमिशन वीआईटी इंट्रेंस एग्जाम से ही लिए जाते हैं। खास बात यह कि वीआईटी में वे ही छात्र-छात्राएं आवेदन कर सकते हैं जिनके 12वीं में 60 प्रतिशत मा‌र्क्स हैं।

- डॉ। माधवेश पाठक, प्रोफेसर, वीआईटी

स्टूडेंट्स के लिए उपलब्ध डॉक्टरेट फैकल्टी

वीआईटी में छात्रों को पढ़ने के लिए घर जैसा माहौल मिलता है। आप अपने टाइम के अनुसार पढ़ाई के घंटे तय कर सकते हैं। आप अपनी पढ़ाई के लिए फैकल्टी का चुनाव भी कर सकते हैं। इसके अलावा हमारे यहां छात्रों की सुरक्षा की खासी व्यवस्था है। वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी में 100 प्रतिशत डॉक्टरेट फैकल्टी स्टूडेंट्स के लिए उपलब्ध है। 'कोलाबरेटिव एंड एक्टीव लर्निग थ्रू' टेक्नोलॉजी की व्यवस्था है। प्रोजेक्ट बेस्ट लर्निग पर आधारित ग्रुप डिस्कशन के जरिए स्टूडेंट्स को प्रत्येक विषय को समझाने की व्यवस्था की गई है। साफ्ट स्किल करिकुलम को अनिवार्य रूप से लागू किया गया है। स्वच्छ भारत और मेक इन इंडिया को करिकुलम में शामिल किया गया है, जिससे स्टूडेंट्स में जन भागीदारी को बढ़ाया जा सके। वेब टु वाई फाई टेक्नोलॉजी का यूज प्रत्येक क्लास में किया जाता है। स्टूडेंट्स की प्रगति पर विशेष ध्यान रखने के लिए फैकल्टी की व्यवस्था की जाती है। जिससे कि बीटेक कंप्लीट करने के दौरान स्टूडेंट्स की सभी प्रकार की समस्याओं को दूर किया जा सके। स्पेशलाइजेशन बीटेक के साथ ही माइनर की डिग्री देने की व्यवस्था भी है। जिससे चार सालों में स्टूडेंट्स थोड़े से एफर्ट से दो डिग्री हासिल कर सकते हैं। इसमें एडिशनल क्रेडिट के साथ दूसरी ब्रांच में माइनर डिग्री दी जाती है। वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय में बीटेक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विद स्पेशलाइजेशन इन गेमिंग टेक्नोलॉजी, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विद स्पेशलाइजेशन इन साइबर सिक्योरिटी एंड डिजिटल फॉरेंसिक, बीटेक इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग, बीटेक इन इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, बीटेक इन इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, बीटेक इन बॉयोइंजीनियरिंग, बीबीए, एमसीए, एमटेक इन साइबर सिक्योरिटी कोर्स चल रहे हैं। इस वर्ष दो नए कोर्स बीटेक इन एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और बीटेक इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शुरू हो रहे हैं।

- डॉ। शरद चंद्र त्रिपाठी, असिस्टेंट प्रोफेसर, वीआईटी भोपाल

वीआईटी प्रेजेंट्स दैनिक जागरण आई नेक्स्ट इंजीनियरिंग गेटवेज-2018 का उद्घाटन एसएसपी एसटीएफ अभिषेक सिंह ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इस मौके पर मॉर्डरेटर अरुणेंद्र सोनी, असिस्टेंट प्रोफेसर, वीआईटी भोपाल डॉ। शरद चंद्र त्रिपाठी, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ। माधवेश पाठक, लखनऊ दैनिक जागरण आई नेक्स्ट के संपादकीय प्रभारी धर्मेद्र सिंह और दैनिक जागरण के जनरल मैनेजर जेके द्विवेदी मौजूद रहे।

टफ सब्जेक्ट को अलग से दें समय

सेमिनार के पहले सत्र में मुख्य अतिथि एसएसपी एसटीएफ अभिषेक सिंह ने कहा कि इंजीनियरिंग इंट्रेंस बहुत आसानी से क्रेक किया जा सकता है, बस इसके लिए फोकस करने की जरूरत है। अपने कोर्स को शेड्यूल में डिवाइड कर लीजिए। साथ ही रोज पढ़ाई के घंटे निर्धारित करने होंगे। ऐसा नहीं कि एक दिन आठ घंटे पढ़ लिए तो दूसरे दिन एक घंटा, जिस सिलेबस को आपने जितने दिन में खत्म करने का टारगेट लिया है, उतने दिन में ही खत्म करें। यह नहीं कि मैंने तो सात दिन का समय तय किया था और दो दिन में ही खत्म कर दिया। इसी सब कंफ्यूजन के चलते जब पेपर सामने आता है तो स्टूडेंट्स यह देखता है कि 70 प्रतिशत कोर्स पढ़ा हुआ आया है, लेकिन 40 प्रतिशत उसमें अटैम्प्ट कर पाता है। एक और खास बात यह है कि यदि कोई सब्जेक्ट आपको टफ लगता है तो उसके लिए अलग से समय देना होगा।

दोस्त की मदद भी ले सकते हैं

अभिषेक ने कहा कि फॉर्मूले भी छात्रों को याद रखने होंगे। इसका सबसे अच्छा तरीका प्रैक्टिस है। जितनी प्रैक्टिस होगी, पेपर उतना आसान लगेगा। तैयारी के दौरान यदि कोई क्वेश्चन समझ में नहीं आ रहा है तो उसे टीचर से बार-बार पूछिए। दोस्तों से भी मदद ले सकते हैं। यह मत सोचिए कि यदि आप पूछेंगे तो लोग क्या कहेंगे। एक क्वेश्चन यदि समझ में नहीं आ रहा तो किसी और से पूछिए। फिर सोचिए कि इस तकनीक पर मेरा ध्यान क्यों नहीं गया। अंत में एक और बात यह कि 12वीं के दौरान ही अधिकांश स्टूडेंट्स इंजीनियरिंग की कोचिंग शुरू कर देते हैं। इसके चलते क्लास की पढ़ाई पर ध्यान नहीं रहता। यह गलत है। पर्सनालिटी डेवलपमेंट के साथ ही अंग्रेजी और अन्य सब्जेक्ट हमें क्लास में ही सीखने को मिलते हैं। इसका ध्यान रखना होगा।

काबिल इंजीनियर्स का आज भी अभाव

इंजीनियरिंग से केवल आपको जॉब ही नहीं मिलती बल्कि वह आपको लाइफ जीने का तरीका भी सीखने को मिलता है। कई बॉलीवुड एक्टर, क्रिकेटर और पॉलिटिशयन ने इंजीनियरिंग की है। यह जानकारी सेमिनार में मॉर्डरेटर अरुणेन्द्र सोनी ने दी। उन्होंने बताया कि इंजीनियरिंग के क्षेत्र में रोजगार के अपार अवसर हैं और इन पर लोगों को लाखों के ऑफर्स दिए जा रहे हैं, लेकिन पद के अनुरूप इंजीनियर नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाला भविष्य इंजीनियरिंग का है। मैनपावर कम होती जा रही है। चंद रोज पहले बिना ड्राइवर वाली टैक्सी लांच हो गई है। ऐसे में इंजीनियरिंग की राह भी आसान नहीं है। आपको मशीनों से भी आगे सोचना होगा। कितने भारतीय हैं जो मल्टीनेशनल कंपनीज के महत्वपूर्ण पदों पर बैठे हैं। आपको भी ड्रीम जॉब पानी है तो उसके लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।

पुराना रिवीजन भी जरूरी है

इंजीनियरिंग इंट्रेंस क्रेक करना बहुत कठिन नहीं है। इसकी तैयारी करते समय आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। जो भी सब्जेक्ट आप पढ़ें, उसकी समझ होनी चाहिए। बेसिक जानकारी बहुत जरूरी है। सभी फॉर्मूले अच्छी तरह से मालूम होने चाहिए। कौन सा फॉर्मूला किस क्वेश्चन पर अप्लाई करना है यह सब समझना होगा। जो भी सब्जेक्ट लीजिए उसे पूरा करिए। समझ में नहीं आता तो उसे बार-बार स्टडी करिए जब तक कि समझ में ना आ जाए। वहीं सिलेबस खत्म करने के साथ ही पुराना रिवीजन भी करते जाएं। कहीं ऐसा ना हो कि आगे का पढ़ते जाएं और पीछे का रिवीजन ना होने से सारी तैयारी पर पानी फिर जाए।

- आदित्य कुमार, रोबिक्स रोस्ट्रम

कोट

प्लेसमेंट के मामले में लिम्का बुक ऑफ व‌र्ल्ड में रिकार्ड दर्ज

Posted By: Inextlive