आर्थिक तंगी ने दिखाई सफलता की राह कांता बनी ईरिक्शा वाली आंटी

2019-04-04T06:00:53+05:30

- एक मां की कहानी, जो ई-रिक्शा चलाकर संवार रही है अपने बच्चों का भविष्य

- स्कूल टाइम में बच्चे स्कूल, मां निकल जाती है ई-रिक्शा से इनकम जुटाने

- बच्चों के लिए बनीं ई-रिक्शा वाली आंटी और समाज के लिए आत्मनिर्भरता की बानगी

देहरादून। समाज में फैली बेबुनियाद धारणाओं से इतर कुछ सोचने-समझने की क्षमता हो, कुछ कर गुजरने का इरादा हो तो सफलता फिर दूर नहीं। कुछ इसी राह पर चलते हुए दून की एक महिला आत्म निर्भरता की बानगी बनी है। आर्थिक तंगी से गुजरते हुए दो-दो बच्चों का फ्यूचर जब एक मां की आंखों के आगे घूम रहा था तो उसने बच्चों के भविष्य के लिए ई-रिक्शा चलाने का पुरुषवादी वर्चस्व तोड़ा और अपनी सफलता की कहानी खुद लिखी। हम बात कर रहे हैं कांता की जिसे आज बच्चे ई-रिक्शा वाली आंटी कहकर बुलाते हैं।

तंगी ने दिखाई राह

देहरादून के मियांवाला इलाके में रहने वाली कांता व्यास के पति लुधियाना में होटल की नौकरी करते हैं और वो अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए पिछले 5 साल से देहरादून में किराए पर रह रही है। पति की कमाई से घर चलाने में दिक्कत होने लगी, तो कांता ने प्राइवेट नौकरी की तलाश के लिए कई फैक्ट्रीज के चक्कर काटे। एक फैक्ट्री में 5000 रुपए मंथली सैलरी पर बात पक्की हो गई। लेकिन, फिर उसके मन में विचार आया कि अगर वह नौकरी करने लगी तो बच्चों की परवरिश कैसे होगी, ऐसे में उसने नौकरी करने का प्लान छोड़ दिया।

दीदीई-रिक्शा चलाना सिखा दोगी

कांता एक दिन अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने गई, इसी दौरान उसने एक महिला को ई-रिक्शा चलाते देखा। उसने भी यह काम करने की ठानी और ई-रिक्शा चलाने वाली महिला के पास गई और रिक्वेस्ट की किदीदी क्या मुझे भी ई-रिक्शा चलाना सिखा दोगी। उसका प्रपोजल महिला ने एक्सेप्ट कर लिया और 10 दिन के भीतर कांता ने ई-रिक्शा चलाना सीख लिया।

पति ने सोशल मीडिया पर देखा ई-रिक्शा चलाते

ई-रिक्शा सीखने के बाद कांता ने अपने पति को बिना बताए बैंक से 25 हजार रुपए लोन एप्लाई किया। उसे लोन भी मिल गया। घर में ई-रिक्शा आ गया और कांता ने उस पर सफलता की रफ्तार भरना शुरू कर दिया। एक दिन किसी ने उसका वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया, लुधियाना में उसके पति ने भी यह वीडियो देखा। पति और ससुराल वालों को उसका ई-रिक्शा चलाना नहीं जमा। लेकिन, कांता चुपचाप रफ्तार भरती गई।

बच्चों की ई-रिक्शा वाली आंटी

कांता ने बताया कि उसके इस फैसले से घर के लोगों को भले ही खुशी नहीं हुई, लेकिन लोगों ने उसे बहुत सपोर्ट किया। पहले वह सिर्फ अपने बच्चों को ही ई-रिक्शा से स्कूल छोड़ती थी लेकिन बाद में आस-पास के लोगों ने भी अपने बच्चों को उसके साथ भेजना शुरू कर दिया और इस तरह कांता की इनकम भी होने लगी। बच्चे भी ई-रिक्शा वाली आंटी के साथ खुशी-खुशी स्कूल जाने लगे। कांता के दोनों बच्चों प्रियांसु और प्रेरणा ने बताया कि स्कूल के बच्चे उनकी मम्मी को रिक्शे वाली आंटी कहकर पुकारते हैं।

स्कूल टाइम में रिक्शे पर रफ्तार

ई-रिक्शा चलाकर इनकम जुटाने के साथ-साथ कांता अपने बच्चों को पूरा वक्त देती हैं। बच्चों को स्कूल छोड़कर छुट्टी होने तक वह मियांवाला से बालावाला तक ई-रिक्शा चलाती है, इससे अच्छी खासी इनकम हो जाती है। स्कूल की छुट्टी के बाद बच्चों को लेकर घर निकल जाती है और फिर पूरा वक्त बच्चों की परवरिश के लिए देती हैं।

डेली 500 रु। एवरेज इनकम

कांता ने बताया कि वह एक दिन में औसतन 500 रुपए कमा लेती है। उसे सुकून है कि अब वह बच्चों की परवरिश के लिए भी पूरा वक्त निकाल रही है और सेल्फ इंडिपेंडेंट भी बन रही है।

अब पति भी लेते हैं ई-रिक्शा राइड का मजा

कांता के ई-रिक्शा चलाने से पहले पति खुश नहीं थे, लेकिन अब पति जब भी छुट्टी घर आते हैं, दो कांता पूरे परिवार के साथ ई-रिक्शे पर ही घूमने निकलती है। कांता रिक्शा चलाती है और पति पीछे दोनों बच्चों के साथ ई-रिक्शा राइड का मजा लेते हैं।

खुद दे रही बैंक इंस्टॉलमेंट

कांता ने बताया कि वो अपनी इनकम से खुद बैंक लोन की इंस्टॉलमेंट चुका रही हैं। इंस्टॉलमेंट चुकाने के बाद जो पैसे बचते हैं वह बच्चों की बेहतरी के लिए खर्च होते हैं और पति से छोटी-मोटी जरूरतों के लिए पैसे नहीं मांगने पड़ते।

inextlive from Dehradun News Desk


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