चुनाव में उड़ाई फेक न्यूज तो जेल जाना तय

2019-01-19T11:31:24+05:30

नक्सल प्रभावित राज्य होने से बिहार में एक चरण में चुनाव संभव नहीं है चुनाव से संबंधित फेक न्यूज प्रचारित करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी

-मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा बोले, ईवीएम को कोई फुटबॉल न बनाएं

patna@inext.co.in
PATNA: नक्सल प्रभावित राज्य होने से बिहार में एक चरण में चुनाव संभव नहीं है. चुनाव से संबंधित फेक न्यूज प्रचारित करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. मुख्य चुनाव आयुक्तसुनील अरोड़ा बिहार में लोकसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा लेने के बाद शुक्रवार की शाम पत्रकारों से बात करने के दौरान यह बातें कही. उन्होंने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने वाले राजनीतिक दलों को साफ-साफ कहा कि ईवीएम को कोई फुटबॉल न बनाएं. सुप्रीम कोर्ट ने भी ईवीएम की विश्वसनीयता पर भरोसा जताया है. साथ ही अरोड़ा ने बिहार की कानून-व्यवस्था पर संतोष जताया.

कोई सवाल नहीं कर सकता
मुख्य चुनाव आयुक्त ने मुख्य सचिव, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, गृह सचिव और डीजीपी को चुनाव तैयारियों को लेकर मुकम्मल इंतजाम करने को कहा. चुनाव के दौरान हर बूथ पर वीवीपैट का यूज सुनिश्चित किया जाएगा. ईवीएम पर कोई सवाल नहीं खड़ा कर सकता. उन्होंने कहा अधिकतर दलों ने मतदाता पर्ची सुधारने की मांग है.

हेल्पलाइन नंबर 1950 जारी
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि वोटर्स की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर 1950 सक्रिय किया गया है. आयोग माइक्रो ऑब्जर्वर लगाएगा. आचार संहिता तोड़ने वाले पर सख्ती की जाएगी. उन्होंने बताया कि मुख्य सचिव को निर्देश दिया गया है कि जो फील्ड अफसर तीन वर्ष से एक ही स्थान पर तैनात हैं उनका तबादला किया जाए. आयोग ने इससे पूर्व सभी जिलों के डीईओ, एसएसपी-एसपी और शासन के आला अधिकारियों के साथ एक-एक लोकसभा सीट पर विस्तार से विमर्श किया. निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा, वरिष्ठ उप-निर्वाचन आयुक्त उमेश सिन्हा, उप चुनाव आयुक्त चंद्र भूषण कुमार, संदीप जैन, महानिदेशक धीरेंद्र ओझा, दिलीप शर्मा और आइटी निदेशक वीएन शुक्ला के अलावा एडीजी शेफाली शरण मौजूद थीं.

सी-विजिल एप से करें कंप्लेन
अरोड़ा ने लोकसभा चुनाव में सी-विजिल एप यूज करने की घोषणा की. उन्होंने बताया कि सी-विजिल चुनाव वाले राज्यों में किसी भी व्यक्ति को आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की रिपोर्ट करने की अनुमति देता है. यह अनुमति निर्वाचन घोषणा की तिथि से प्रभावी होती है और मतदान के एक दिन बाद तक रहती है. लोग ऐप का यूज कर कदाचार की घटना देखने के मिनट भर में रिपोर्ट कर सकते हैं. कैमरा, इंटरनेट कनेक्शन व जीपीएस लैस एन्ड्रायड स्मार्ट फोन जरूरी है.


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