3 माह पर आता है बिल उसमें भी कई गड़बडि़यां

2019-02-01T06:00:53+05:30

RANCHI: बिजली की दर वृद्धि को लेकर आयोजित चर्चा में स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज के अंजय पचरीवाल ने कहा कि उपभोक्ताओं को तीन- तीन महीने पर बिल आ रहा है, उसमें भी कई गड़बडि़यां होती हैं। ऐसे में बिल सुधरवाने के लिए उपभोक्ताओं को ऑफिस के चक्कर काटकर परेशान हैं। उन्होंने कहा कि बिल कलेक्शन की जिम्मेवारी निगम की है और उपभोक्ताओं को परेशान किया जा रहा है। इसमें सुधार की जरूरत है.

नेट मीटरिंग पर हो काम

बैठक में रूफ टॉप सोलर टैरिफ पर भी चर्चा हुई। इसमें नेट मीटरिंग पर तैयार प्रस्ताव 3.80 रुपए पर सभी की राय मांगी गई। इसमें बढ़ाए जाने या घटाए जाने के किसी भी बिंदु पर कोई राय नहीं आई। इसलिए अब यह तय माना जा रहा है कि रूफ टॉप सोलर बिजली नेट मीटरिंग द्वारा बेचे जाने पर 3.80 रुपए उपभोक्ताओं को मिलेगी। इस पर भी आयोग बहुत जल्द ही निर्णय ले सकता है।

रूरल एरिया से भेदभाव

बैठक में रूरल एरिया से आई एक महिला हेमलता उरांव ने बिजली व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में 2017 से ही लगातार बिजली दर में बढ़ोतरी हो रही है। जबकि गांवों में दिन में बिजली एक- दो घंटे ही रहती है। वहीं, रात में सोने के बाद बिजली आती है। क्या गांव के लोग इंसान नहीं हैं। क्या गांव के लोग व्यापार नहीं करते हैं। क्या गांव के बच्चे पढ़ाई नहीं करते हैं। जब उन्हें बिजली ही नहीं मिलेगी तो वह भारी भरकम बिल एवं फि क्सड चार्ज क्यों दें। ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली दर क्यों बढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि बिजली के खंभे लगा दिए गए, ट्रांसफ ार्मर लगा दिए गए, घर में मीटर भी लगा दिए गए, मगर बिजली ही नहीं आई। उन्होंने रूरल एरिया की बिजली दर नहीं बढ़ाने की अपील आयोग से की.

चल रहा सुधार का काम

बिजली वितरण निगम के एमडी राहुल पुरवार ने कहा कि अगर किसी भी विषय पर सिंगल- सिंगल गलती निकालेंगे तो यह उचित नहीं है। विषय को समग्रता से समझने की जरूरत है। बिहार से अलग होने के बाद झारखंड में सबसे पहले इंफ्रास्ट्रक्चर और नेटवर्किंग सिस्टम दुरुस्त करना बड़ी चुनौती थी, जिस पर चार- पांच वषरें में काम शुरू हुआ है। संथाल परगना एवं पलामू क्षेत्र में पूरी निर्भरता बिहार एवं यूपी पर थी, एक लाइन ब्रेकडाउन होने के बाद कई दिनों तक बिजली कट हो जाती थी। मगर अब व्यवस्था सुधर रही है। पूरे राज्य में 375 सबस्टेशन थे। 300 नए सबस्टेशन बन रहे हैं। ग्रिड सबस्टेशन की संख्या काफ कम थी, जिसे बढ़ाकर 140 तक किया जा रहा है। बिजली आपूर्ति के लिए रांची सहित पूरे झारखंड में कई स्कीम चल रही हैं। बिजली बिल वितरण सुधार के लिए कई आईटी सेक्टर में काम शुरू हो चुके हैं, बिजली एकांउटिंग के लिए कई चीजों पर काम चल रहा है। स्कार्डा सिस्टम अप्रैल तक रांची, जमशेदपुर एवं धनबाद में शुरू हो जाएगा।

inextlive from Ranchi News Desk


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