एसएसपी ऑफिस में घूस लेते बड़े बाबू अरेस्ट

2019-06-19T11:14:53+05:30

पुलिस ऑफिस में तैनात बड़े बाबू ज्ञानेंद्र सिंह को लखनऊ से आई एंटी करप्शन की टॉस्क फोर्स ने पांच हजार रुपए घूस लेते हुए अरेस्ट किया बड़े बाबू की जेब में मिली नकदी पर लगे केमिकल से लाल रंग निकलने पर टीम ने उनके खिलाफ कैंट थाना में एफआईआर दर्ज कराई

- एंटी करप्शन की टॉस्क फोर्स की टीम ने रंगे हाथ दबोचा

-मेडिकल क्लेम का भुगतान करने के बदले एसआई से मांगा था पांच हजार

gorakhpur@inext.co.in
GORAKHPUR:
पुलिस ऑफिस में तैनात बड़े बाबू ज्ञानेंद्र सिंह को लखनऊ से आई एंटी करप्शन की टॉस्क फोर्स ने पांच हजार रुपए घूस लेते हुए अरेस्ट किया। बड़े बाबू की जेब में मिली नकदी पर लगे केमिकल से लाल रंग निकलने पर टीम ने उनके खिलाफ कैंट थाना में एफआईआर दर्ज कराई। मंगलवार दोपहर दो बजे एसएसपी ऑफिस में हुई कार्रवाई से हड़कंप मच गया। बड़े बाबू के खिलाफ कैंपियरगंज में तैनात एसआई पंकज यादव ने शिकायत दर्ज कराई थी। पंकज का आरोप है कि मेडिकल क्लेम का भुगतान करने के बदले में बड़े बाबू 10 परसेंट घूस मांग रहे थे।

जेब में रुपए रखते ही टीम ने किया गिरफ्तार

मंगलवार दोपहर करीब एक बजे लखनऊ एंटी करप्शन की टॉस्क फोर्स पुलिस ऑफिस पहुंची। टीम के इंस्पेक्टर हरि सिंह, एसएन सिंह, अनुराधा सिंह, जगरनाथ सिंह और अशोक सिंह ने दफ्तर में जाल बिछा दिया। उसी समय कैंपियरगंज में तैनात दरोगा पंकज यादव पहुंचे। बड़े बाबू ज्ञानेंद्र सिंह के पास बैठकर काफी देर तक बात की। फिर उनको पांच हजार रुपए नकद दिया। रुपए गिने बिना ही बड़े बाबू ने जेब में रख लिया। रुपए रखने के बाद एंटी करप्शन की टीम उनको दबोच लिया। जांच में केमिकल लगे नोट मिलने की पुष्टि हुई। बड़े बाबू को लेकर टीम कैंट थाना चली गई।

भुगतान के बदले मांगी 18 हजार रुपए की रिश्वत

कैंपियरगंज थाना में तैनात दरोगा पंकज यादव ने एंटी करप्शन के एसपी राजीव मल्होत्रा को पत्र देकर शिकायत दर्ज कराई थी। 13 जून को दिए गए पत्र में आरोप लगाया था कि उन्होंने अपनी बेटी का इलाज लखनऊ के अस्पताल में कराया। इस दौरान करीब एक लाख 80 हजार रुपए खर्च हो गए। मेडिकल रिंबर्समेंट के लिए उन्होंने मार्च में आवेदन किया। सरकारी खजाने से रकम देने के बदले उनको दौड़ाया जा रहा था। बड़े बाबू ज्ञानेंद्र सिंह ने भुगतान की रकम का 10 प्रतिशत एडवांस देने का दबाव बनाया। तब फाइल एसएसपी के पास पेश करने की बात कही। इस दौरान तय हुआ कि वह चार-पांच हजार रुपए पहले दे देंगे। बाकी रकम बाद में भी दी जा सकती है। एंटी करप्शन की टीम गठित होने के बाद एक प्लान के तहत दरोगा को ज्ञानेंद्र बाबू के पास पहुंचे। पांच हजार रुपए देकर बाकी पैसा बाद में देने को कहा। वहां पहले से मुस्तैद टीम ने रुपए रखते ही बड़े बाबू को दबोच लिया। टीम में सीएमओ आफिस के ओपी जी राव और प्रदीप श्रीवास्तव भी मौजूद रहे। टीम का कहना है कि इसके पूर्व महराजगंज जिले में तैनाती के दौरान भी बड़े बाबू पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे।

पुलिस ऑफिस में तैनात बड़े बाबू के खिलाफ दरोगा पंकज यादव ने शिकायत दर्ज कराई थी। मंगलवार को दफ्तर में बड़े बाबू ने पंकज से पांच हजार रुपए की रिश्वत ली। वैधानिक तरीके से कार्रवाई करते हुए रंगेहाथ बाबू को अरेस्ट किया गया। उनके खिलाफ कैंट थाना में एफआईआर दर्ज कराकर कार्रवाई की जा रही है।

हरी सिंह, इंस्पेक्टर, प्रभारी, एंटी करप्शन टॉस्क फोर्स


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