बिहार में हर साल आती है 17 से अधिक एके47

2018-09-13T01:06:33+05:30

प्रतिबंधित असलहे की तस्करी को लेकर डीजे आई नेक्स्ट का खुलासा। भारतीय सेना में भी की जाएगी एके47 को लेकर जांच।

patna@inext.co.in
PATNA : सेना के गायब असलहों का पटना सहित प्रदेश के अन्य जिलों से बड़ा तार जुड़ रहा है। एके-47 की सप्लाई को लेकर सामने आया आंकड़ा चौंकाने वाला है। 6 साल में 100 से अधिक एके-47 की सप्लाई ने पुलिस की नींद उड़ा दी है। अब मध्य प्रदेश पुलिस के साथ सामंजस्य बनाकर बिहार पुलिस इंवेस्टीगेशन कर बड़ा खुलासा करने में जुटी है। इसके लिए पुलिस आर्मी को पत्र भेजकर जानकारी कलेक्ट करने की तैयारी में है। पटना के साथ प्रदेश के कई जिलों में एके-47 की गूंज एक दो बार नहीं बल्कि दर्जनों बार सुनाई दी है और पुलिस ने नक्सलियों से भी इसे बरामद किया है।
सेना के हथियारों का सौदा
सेना के गायब हथियारों का बिहार में काफी दिनों से सौदा हो रहा था। मुंगेर एवं जबलपुर पुलिस को अबतक की पूछताछ और जांच में कई ऐसे सुराग मिले हैं। एके-47 की चोरी व तस्करी के आरोपित आर्मरर पुरुषोत्तम रजक, उसके बेटे शीलेन्द्र, पत्नी चंद्रवती रजक, सीओडी के सीनियर स्टोर इंचार्ज सुरेश ठाकुर, खरीदार इमरान और शमशेर से कई चौंकाने वाली जानकारी मिली है। पूछताछ में उन्होंने खुलासा किया है कि 2012 से अब तक सौ से ज्यादा केवल एके-47 सप्लाई की गई है। जांच पड़ताल में इसकी पुष्टि भी हुई है। इसी को आधार बना पुलिस आर्मी को पत्र लिख रही है।
रडार पर सेना के हथियार सप्लायर
बहार और मध्य प्रदेश पुलिस आपस में समन्वय स्थापित कर सेना के एके-47 समेत अन्य हथियारों के सप्लायरों को रडार पर लेकर जांच कर रही है। सप्लायर से लेकर खरीददारो की पूरी कुंडली खंगाली जा रही है। बिहार पुलिस आर्मी से एके-47 के अलावा गायब अन्य हथियारों की पूरी डिटेल मांगने में लगी है। बिहार सरकार इस गंभीर मामले में नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआइए) को भी जांच देने के लिए विचार कर रही है।
खुफिया तंत्र के लिए चुनौती
एंटी नक्सल विंग्स में बड़े मोर्च पर काम करने वाले पुलिस के आला अधिकारियों की मानें तो नक्सलियों ने एके-47 के अलावा आधुनिक हथियार जुटा कर अपनी ताकत बढ़ा ली है। पुलिस इनपुट के आधार पर एसटीएफ शीघ्र ही विशेष अभियान चलाने की तैयारी कर रही है। इसमें एसटीएफ को मुंगेर जिले के बरदह समेत कई जिलों के ग्रामीण जांच में आगे आकर सहयोग कर रहे हैं। इससे पुलिस को मामले की गुत्थी सुलझाने में काफी मदद मिल रही है।
सफेदपोश पर शक की सुइ
* सेना के गायब हथियार और इसकी सप्लाई को लेकर नक्सली रडार पर हैं।
* इस पूरे मामले में शक की सुई कुछ सफेदपोश लोगों पर भी है।
* बिहार पुलिस ने नक्सलियों और सफेदपोशों को दबोचने को लेकर मंथन शुरू कर दिया है।
* बहुत जल्द इस दिशा में कई बड़े खुलासे हो सकते हंै।
* सेना के हथियार का खरीदार कौन-कौन हैं इसका पता लगाने के लिए कई टीम वर्क कर रही है।
* नक्सलियों के हाथ फोर्स के आधुनिक हथियार लगने से खुफिया तंत्र की नींद उड़ गई है।
टाइमलाइन

1990 में पहली बार बिहार में गरजी थी एके-47
25 प्रतिशत घटनाओं में 1990-2000 के बीच एके-47 इस्तेमाल हुई।
1990 में बेगूसराय से हुई थी इंट्री।
1994 में पहली बार बिहार में एनकाउंटर के बाद बरामद की गई थी।
2006 में कॉलेज ऑफ कॉमर्स के पास एक इंजीनियर को भून दिया गया।
2015 दरभंगा में डबल इंजीनियर मर्डर में संतोष-मुकेश गैंग ने गोलियां बरसाई थी।
2018 में दीना गोप की हत्या।

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