बच्‍चों को इस लत का शिकार बनने से बचाओ फेसबुक!

2018-07-09T03:49:14+05:30

दुनिया भर में बच्‍चों से लेकर युवा तक सभी भले ही सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म्‍स पर चिपके रहने की लत के शिकार बन रहे हों लेकिन कोई भी इन ऑनलाइन कंपनियों से कुछ नहीं कहता। दुनिया में शायद पहली बार लंदन में एक बड़े प्रशासनिक अधिकारी ने कहा है कि बच्‍चों को लत का शिकार बनने से बचाने के लिए फेसबुक जैसी कंपनियों को जरूर कुछ उपाय करने चाहिए।

इंग्‍लैंड ने एक शीर्ष अधिकारी ने फेसबुक से कहा, ऑनलाइन नशे की लत छुड़ाने को कुछ करो

लंदन (आईएएनएस)सोशल मीडिया की लत का शिकार बनकर उसके जाल में फंसे और जकड़े नजर आने वाले बच्‍चों और युवाओं को लेकर चिंतित इंग्लैंड के एक शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारी ने सोशल मीडिया कंपनियों खासतौर पर फेसबुक से कहा है कि ऑनलाइन नशे की इस लत और खतरनाक कंटेट से बच्‍चों को बचाने के लिए उन्‍हें जरूर कुछ उपाय करने चाहिए। टेलीग्राफ के मुताबिक इंग्लैंड के राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) के सीईओ साइमन स्टीवंस ने कहा है कि हमारे किशोरों और युवाओं में ऑनलाइन गतिविधियों के चलते इस नशे की लत और मेंटल हेल्‍थ के बीच सीधा संबंध देखने को मिल रहा है। ऐसे में इन कंपनियों को ही कुछ उपाय करने की जरूरत है।

पेरेंट्स को बच्‍चों की हालत के बारे में है जानकारी, लेकिन कुछ करने में लाचार

साइमन स्टीवंस ने कहा है इंग्‍लैंड समेत दुनिया भर में पेरेंट्स को अपने बच्‍चों के इस सोशल मीडिया एडिक्‍शन के बारे में सबकुछ मालूम है, लेकिन इस प्रॉब्‍लम से निपटने में वो बच्‍चों की कोई मदद नहीं कर पा रहे हैं। सोशल मीडिया एडिक्‍शन सिर्फ बच्‍चों को ही नहीं बल्कि युवाओं को भी अपनी गिरफ्त में ले रहा है। सोशल मीडिया प्रोडक्‍ट्स और उनके बढ़ते खतरनाक प्रभावों को देखते हुए एनएचएस ने फैसला किया है कि पूरे देश में स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं को चलाने के साथ साथ अब हम मेंटल हेल्‍थ सर्विस भी शुरु करेंगे।

फेसबुक कर्मचारी ने बताया कि एफबी पर मौजूद हैं कई लत लगाने वाले फीचर

इंग्‍लैंड हेल्‍थ सर्विसेज के हेड साइमन स्टीवंस ने कहा कि सोशल मीडिया एडिक्‍शन के मामले में ईलाज करने से ही काम नहीं चलेगा। जरूरत इस बात ही है कि इस ऑनलाइन लत को शुरुआती दौर में रोका जाए। बता दें कि बीबीसी के एक इंटरनेशनल प्रोग्राम के दौरान फेसबुक के एक कर्मचारी ने स्‍वीकार किया था कि उनके प्‍लेटफॉर्म पर कुछ ऐसे फीचर्स मौजूद हैं जो खासतौर इसलिए बनाए गए कि यूजर्स फेसबुक पर हमेशा चिपके रहें। यह फीचर बच्‍चों और युवाओं के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इसी बात की पुष्टि फेसबुक के फाउंडिंग प्रेसीडेंट सीन पार्कर ने भी की थी। उन्‍होंने कहा था कि फेसबुक आम लोगों की साइकोलॉजी का इस तरह से यूज कर रहा है कि लोग ज्‍यादा से ज्‍यादा वक्‍त फेसबुक पर बिताएं।

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