नौ महीने से Salary नहीं मिली दे दी जान

2013-05-13T12:13:15+05:30

Allahabad हमआप नौकरी इसलिए करते हैं कि जिंदगी पटरी पर चलती रहे लेकिन सुनील श्रीवास्तव के साथ उल्टा हो गया उसकी नौकरी ने न सिर्फ जिंदगी की गाड़ी को पटरी से उतार दिया बल्कि जिंदगी पर ही फुलस्टॉप लगा दिया स्वरूपरानी हॉस्पिटल के ट्रामा सेंटर में कांटैक्चुअल इम्प्लाई सुनील श्रीवास्तव ने संडे को जहर खाकर जिंदगी खत्म कर ली उनकी मौत के बाद ट्रामा सेंटर के नाराज इंप्लाई ने प्रदर्शन और हंगामा किया उसे 9 महीने से वेतन नहीं मिला था जिससे उसकी जिंदगी बेपटरी हो गई थी रोजरोज की चिकचिक से तंग आकर पत्नी छोड़कर मायके चली गई थी

वार्ड ब्वाय था सुनील  सुनील श्रीवास्तव 35 साल ट्रामा सेंटर में वार्ड ब्वाय की नौकरी करता था। प्रजेंट में सुनील बड़े भाई संजय के साथ दारागंज एरिया में रहता था। सैटरडे की रात ड्यूटी करके संडे मार्निंग घर पहुंचा था। थोड़ी देर पर घर में रुकने के बाद भाई से कहा कि मोबाइल हॉस्पिटल में रह गया है, उसको लेकर आ रहा हूं। दोपहर में भाई को सूचना मिली कि सुनील घर के नजदीक ही जमीन पर बेहोश पड़ा हुआ है। फैमिली मेंबर्स दौड़कर वहां पहुंचे और सुनील को लेकर एसआरएन हॉस्पिटल पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने बताया कि सुनील ने जहर खाया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह क्लीयर हो जाएगी. 
चार साल पहले हुई थी शादी  संजय ने बताया कि सुनील की शादी झूंसी की वंदिता से चार साल पहले हुई थी। सुनील उस समय कस्तूरबा गांधी विद्यालय में संविदा पर नौकरी करता था। शादी के बाद झूंसी में ही रेंट पर रूम लेकर रहने लगा था। फिर ट्रामा सेंटर में संविदा में उसकी जॉब लग गई। शुरू में तो ठीक था, लेकिन पिछले नौ महीने से सैलरी नहीं मिली थी। फाइनेंशियल तंगहाली के चलते सुनील व वंदिता को कमरा छोडऩा पड़ गया और सुनील झूंसी में ही ससुराल में शिफ्ट हो गया। लेकिन खाली जेब के चलते यहां भी उसका गुजर नहीं हो पाया और बीवी से रोज-रोज चिकचिक होने लग गई। तंग आकर सुनील ने ससुराल छोड़ दिया। बीवी से मनमुटाव बढ़ा और मामला तलाक तक पहुंचने लगा था। भाई संजय ने बताया कि इन उलझनों में वह टूट गय था। तीन महीने पहले वह भाई के साथ आकर दारागंज में रहने लगा था. 
जिंदगी से ऊब कर छोड़ा जिंदगी का साथ भाई के मुताबिक सुनील जिंदगी से तंग आ चुका था। भाई के यहां वह रह तो रहा था लेकिन खाली जेब उसको बार-बार कचोटती थी। इधर ट्रामा सेंटर के एडमिनिस्ट्रेशन ने भी किसी बात को लेकर उसको नौकरी से निकालने की चेतावनी दे डाली थी। यह बात उसने भाई को भी बताई थी। रोज-रोज की झंझट से ऊब कर उसने अपनी जिंदगी का ही साथ छोडऩे का डिसीजन लिया और संडे को जहर खाकर जिंदगी खत्म कर ली। उसकी मौत से नाराज ट्रामा सेंटर के संविदा स्टॉफ ने जमकर हंगामा किया और सुनील की फैमिली को मुआवजा दिए जाने की डिमांड की. 
पूरे प्रदेश के ट्रामा सेंटर में संविदा कर्मियों को वेतन नहीं मिल पा रहा है। इस संबध में सीनियर ऑफिसर्स से बात की जा रही है। कुछ विभागीय पेंच फंसे हुए हैं। उम्मीद है कि जल्द ही संविदा कर्मियों को वेतन मिल जाएगा.  -एसपी सिंह, प्रिसिंपल, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज  वार्ड ब्वाय था सुनील 

सुनील श्रीवास्तव 35 साल ट्रामा सेंटर में वार्ड ब्वाय की नौकरी करता था। प्रजेंट में सुनील बड़े भाई संजय के साथ दारागंज एरिया में रहता था। सैटरडे की रात ड्यूटी करके संडे मार्निंग घर पहुंचा था। थोड़ी देर पर घर में रुकने के बाद भाई से कहा कि मोबाइल हॉस्पिटल में रह गया है, उसको लेकर आ रहा हूं। दोपहर में भाई को सूचना मिली कि सुनील घर के नजदीक ही जमीन पर बेहोश पड़ा हुआ है। फैमिली मेंबर्स दौड़कर वहां पहुंचे और सुनील को लेकर एसआरएन हॉस्पिटल पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने बताया कि सुनील ने जहर खाया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह क्लीयर हो जाएगी. 

चार साल पहले हुई थी शादी 

संजय ने बताया कि सुनील की शादी झूंसी की वंदिता से चार साल पहले हुई थी। सुनील उस समय कस्तूरबा गांधी विद्यालय में संविदा पर नौकरी करता था। शादी के बाद झूंसी में ही रेंट पर रूम लेकर रहने लगा था। फिर ट्रामा सेंटर में संविदा में उसकी जॉब लग गई। शुरू में तो ठीक था, लेकिन पिछले नौ महीने से सैलरी नहीं मिली थी। फाइनेंशियल तंगहाली के चलते सुनील व वंदिता को कमरा छोडऩा पड़ गया और सुनील झूंसी में ही ससुराल में शिफ्ट हो गया। लेकिन खाली जेब के चलते यहां भी उसका गुजर नहीं हो पाया और बीवी से रोज-रोज चिकचिक होने लग गई। तंग आकर सुनील ने ससुराल छोड़ दिया। बीवी से मनमुटाव बढ़ा और मामला तलाक तक पहुंचने लगा था। भाई संजय ने बताया कि इन उलझनों में वह टूट गय था। तीन महीने पहले वह भाई के साथ आकर दारागंज में रहने लगा था. 

जिंदगी से ऊब कर छोड़ा जिंदगी का साथ

भाई के मुताबिक सुनील जिंदगी से तंग आ चुका था। भाई के यहां वह रह तो रहा था लेकिन खाली जेब उसको बार-बार कचोटती थी। इधर ट्रामा सेंटर के एडमिनिस्ट्रेशन ने भी किसी बात को लेकर उसको नौकरी से निकालने की चेतावनी दे डाली थी। यह बात उसने भाई को भी बताई थी। रोज-रोज की झंझट से ऊब कर उसने अपनी जिंदगी का ही साथ छोडऩे का डिसीजन लिया और संडे को जहर खाकर जिंदगी खत्म कर ली। उसकी मौत से नाराज ट्रामा सेंटर के संविदा स्टॉफ ने जमकर हंगामा किया और सुनील की फैमिली को मुआवजा दिए जाने की डिमांड की. 

पूरे प्रदेश के ट्रामा सेंटर में संविदा कर्मियों को वेतन नहीं मिल पा रहा है। इस संबध में सीनियर ऑफिसर्स से बात की जा रही है। कुछ विभागीय पेंच फंसे हुए हैं। उम्मीद है कि जल्द ही संविदा कर्मियों को वेतन मिल जाएगा. 

-एसपी सिंह, प्रिसिंपल, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज 



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