बिजनौर में ट्रिपल तलाक पर पहली एफआईआर

2018-09-27T01:52:11+05:30

मुस्लिम महिला अध्यादेश2018 के तहत दर्ज हुआ पहला मुकदमा। तलाकशुदा नवविवाहिता की मां की तहरीर पर दर्ज की रिपोर्ट।

lucknow@inext.co.in
LUCKNOW : बिजनौर के कोतवाली देहात इलाके में नवविवाहिता पत्नी को फोन पर तलाक और प्रेमिका से निकाह के आरोप में पुलिस ने दूल्हे समेत छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। नए कानून मुस्लिम महिला (अधिकार एवं विवाह संरक्षण) अध्यादेश 2018 के तहत यह प्रदेश का पहला मुकदमा दर्ज किया गया है।
थाने में कराया तीन तलाक और निकाह
गौरतलब है कि बिजनौर के गांव बरूकी निवासी गुलफाम का निकाह बीती 15 जुलाई को हल्दौर क्षेत्र के गांव पावटी निवासी नौशाद की बेटी सल्तनत से हुआ था। गुलफाम का गांव की ही युवती से प्रेम प्रसंग चल रहा था। शनिवार को सल्तनत गुलफाम के घर पहुंच गई। जानकारी मिलने पर सल्तनत के परिजन भी कोतवाली देहात थाने पहुंचे। पहली पत्नी के होते गुलफाम पर दूसरा निकाह करने की तहरीर देकर निकाह रुकवाने की अपील की। पुलिस गुलफाम को थाने ले आई तो प्रेमिका भी थाने पहुंच गई और निकाह नहीं करने पर जान देने की धमकी दी। सल्तनत के परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने पति-पत्नी का तीन तलाक कराकर थाने में ही मौलवी को बुलाकर प्रेमिका से निकाह करा दिया।
डीजीपी मुख्यालय ने दिया दखल
मामला मीडिया की सुर्खियां बना तो डीजीपी मुख्यालय ने इसका संज्ञान लिया। एसपी उमेश कुमार ङ्क्षसह ने इसकी जांच सीओ नगीना को सौंपी थी। चौतरफा घिरी पुलिस ने खुद की गर्दन बचाने के लिए शुरुआत में थाने में निकाह से इन्कार कर दिया। आखिर में खुद को बचाने के लिए बुधवार को पुलिस ने सल्तनत की मां शहनाज की तहरीर पर दूल्हे गुलफाम पुत्र इकरार, ताऊ अनीस अहमद, प्रेमिका के पिता नजाकत व उसके फूफा चांद शाह के अलावा ग्रामीण हाजी इकबाल व शराफत के विरुद्ध मुस्लिम महिला (अधिकार एवं संरक्षण) अध्यादेश 2018 की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। उल्लेखनीय है कि इस धारा के तहत तीन साल की सजा का प्रावधान है।
मौलवी व ग्राम प्रधान को क्लीनचिट
पुलिस ने मामले में मौलवी और ग्राम प्रधान को क्लीनचिट दे दी है। थाने में निकाह पढ़ाने वाले मौलवी को नामजद नहीं किया गया। मामले में ग्राम प्रधान की भी पूरी भूमिका रही। वीडियो फुटेज में दोनों साफ नजर आ रहे हैं। मामले में मुख्य भूमिका अदा करने वाले एक दारोगा पर कार्रवाई के नाम पर भी अफसर खामोश हैं।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला, जानें अब कहां करना है आधार लिंक आैर कहां नहीं

आधार का सफर : आधार से जुड़ी ये खास बातें हर नागरिक को जानना बहुत जरूरी

 


This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy  and  Cookie Policy.