मंगल तालाब के पानी में बह गए 5 करोड़ रुपए

2018-08-06T06:00:08+05:30

PATNA : सरकार का पांच करोड़ रुपए मंगल तालाब के पानी में बह गया। चौंकिए मत लेकिन यह सच है। पटना सिटी के मंगल तालाब को पर्यटन स्थल के रूप में तैयार करने के लिए 5 करोड़ रुपए खर्च किया गया था लेकिन आज उसकी हालत बदतर हो गई है। तालाब के पास मवेशी घूमते रहते है। तालाब के सौंदर्यीकरण करने के दौरान नाला और रोड इतना ऊपर कर दिया गया कि बारिश के दिनों में तालाब ओवर फ्लो हो जाता है और उसके पानी को निकलने की जगह नहीं मिल पाती। जिससे पर्यटकों के लिए बनी सीढि़यां डूबने लगती है। इतना ही मंगल तालाब एरिया में पर्यटकों को ढ़ूढ़ने से भी पीने का पानी नहीं मिलता है। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की स्पेशल स्टोरी में पढि़ए लाइव रिपोर्ट।

श्रद्धालु रह जाते हैं वंचित

मंगल तालाब पर आने वाले सिख श्रद्धालु गेट के पास से ही लौट जाते हैं। परिसर में न तो पीने के लिए पानी का प्रबंध किया गया है और न ही साफ-सफाई पर कोई ध्यान दिया जा रहा है। स्थानीय लोगों की माने तो गुरु गोविंद सिंह की जयंती के समय ही सरकार इस तालाब पर ध्यान देती है फिर बाद में भूल जाती है।

कैंटीन भी हो गया बंद

पर्यटकों को लुभाने के लिए मंगल तालाब परिसर में बनाया गया कैफे प्लाजा भी पिछले 7 माह से बंद हैं। स्थानीय निवासी मोहित अग्रवाल ने बताया कि कैफे प्लाजा शुरुआत में सिर्फ एक दो माह ही चला था। पर्यटन विभाग की ओर से उचित व्यवस्था नहीं होने की वजह कैफे प्लाजा चलाने वाली एजेंसी कैफे प्लाजा को बंद कर चली गई। जिस वजह से यहां आने वाले पर्यटकों को खाने पीने के सामान को लेकर काफी मशक्कत करनी पड़ती है।

गंदगी से पटा है पूरा इलाका

मंगल तालाब में एरिया में बने सड़क में समतली करन नहीं होने के चलते बारिश के दिनों में पानी जम जाता है। इतना ही नहीं इलाके में मवेशी और आवारा पशु चारो ओर घुमते रहते हैं। तालाब किनारे बने सीढि़यो के पास गंदगी का अंबार है। वहां बैठना दूर की बात है वहां से गुजरने पर पर्यटकों दुर्गध से परेशान होते रहते हैं।

पानी की कोई व्यवस्था नहीं

अगर आप मंगल तालाब देखने के लिए सिटी एरिया जा रहे हैं तो बेशक जाइए मगर साथ में पीने के लिए पानी की बोतल लेकर जाइएगा क्योंकि पर्यटन विभाग की ओर से पर्यटकों को पीने के लिए पानी की कोई व्यवस्था नहीं की गई। एक चापाकल लगवाया गया था जो पिछले आठ माह से खराब है। इसे ठीक करने वाला कोई नहीं है।

मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसकी मॉनीटरिंग करने वाले अफसरों का तबादला हो गया है। मैं जांच करवाता हूं।

पंकज कुमार, सचिव, पर्यटन विभाग

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