बीआरडी में फिर संग्राम बवाल में पांच घंटे ठप रहा इलाज

2018-09-11T06:00:40+05:30

- तीमारदारों ने जूनियर डॉक्टर्स को पीटा, दो का हाथ फ्रैक्चर, छह घायल

- करीब एक घंटे तक चला बवाल, ट्रॉमा सेंटर में भी भिड़े जूनियर डॉक्टर्स और तीमारदार

- पांच घंटे बंद रही ट्रॉमा सेंटर में मरीजों की भर्ती, प्रिंसिपल के तहरीर देने पर माने डॉक्टर

GORAKHPUR: बीआरडी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर्स और पब्लिक के बीच बवाल की घटनाएं लाख कवायदों के बावजूद नहीं थम रही हैं। सोमवार को एक बार फिर बीआरडी का फीमेल सर्जरी वार्ड अखाड़ा बन गया। बच्ची की ड्रेसिंग के दौरान बहस होने पर तीमारदार और जूनियर रेजिडेंट भिड़ गए। करीब पांच घंटे तक चले बवाल के चलते फीमेल सर्जरी वार्ड से लेकर ट्रॉमा सेंटर तक मरीजों का इलाज बुरी तरह प्रभावित रहा। हॉकी- डंडे से लैस हो पहुंचे तीमारदारों के दो दर्जन से अधिक साथियों ने जूनियर डॉक्टर्स को जमकर पीटा। जिसमें दो डॉक्टर्स का हाथ फ्रैक्चर हो गया तो वहीं चार अन्य घायल हो गए। वहीं, बवाल पर इकट्ठा हुए जूनियर डॉक्टर्स ने भी तीन तीमारदारों की पिटाई कर दी जिनमें से एक का सिर फट गया। हिंसक संघर्ष के बाद डॉक्टर्स ने ट्रॉमा सेंटर में इलाज ठप कर दिया। पांच घंटे तक मरीजों की भर्ती बंद रही। उधर घटना की सूचना पर आनन- फानन में बीआरडी के जिम्मेदार और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। बीआरडी प्रिंसिपल की तहरीर पर पुलिस ने 10 से 15 अज्ञात हमलावरों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी।

मामूली बात पर हो गया बवाल

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के फीमेल सर्जिकल वार्ड नंबर चार में सोमवार सुबह जनरल सर्जरी के जूनियर डॉक्टर भर्ती डेढ़ साल की बच्ची की ड्रेसिंग कर रहे थे। इस दौरान डॉक्टर्स ने पर्दे से बेड को ढंक दिया। बगल के बेड पर शाहपुर के इंद्रप्रस्थपुरम निवासी चंद्रावती देवी भर्ती थीं। उनके साथ आया एक युवक बार- बार पर्दा हटाकर मासूम की ड्रेसिंग देखने की कोशिश कर रहा था। ड्रेसिंग कर रहे जूनियर डॉक्टर्स ने उसे मना किया फिर भी युवक नहीं माना। चौथी बार जब युवक ने ताकझांक करने की कोशिश की तो एक जूनियर डॉक्टर ने उसे थप्पड़ जड़ दिया।

साथियों को बुला की डॉक्टर्स की पिटाई

युवक को डॉक्टर्स का रवैया नागवार लगा। उसने फोन कर इसकी सूचना साथियों को दी। करीब आधे घंटे बाद मौके पर पहुंचे करीब एक दर्जन युवक वार्ड में आ धमके और डॉक्टर्स पर हमला कर दिया। हाकी- डंडे से लैस मनबढ़ों ने तीन डॉक्टर्स को पीट दिया। इस दौरान बीच बचाव करने पहुंचे कर्मचारियों व दूसरे मरीजों के तीमारदारों को भी युवकों ने पीटा। बवाल से वार्ड में अफरा- तफरी मच गई। डॉक्टर्स को पीटने के बाद तीमारदार मरीज को वहां से लेकर चले गए। इस संघर्ष में डॉ। मनोज कुमार और डॉ। राहुल सरीन का हाथ टूट गया।

ट्रॉमा सेंटर में फिर भिड़े दोनों पक्ष

उधर, साथियों की पिटाई की खबर सुनते ही जूनियर डॉक्टर भड़क गए। वह ट्रॉमा सेंटर में जुटने लगे। इसी बीच डॉक्टर्स को वहां एक हमलावर तीमारदार दिखा। डॉक्टर्स ने उसे बंधक बनाकर आरोपियों को बुलाने को कहा। इसी बीच वहां पुलिस भी पहुंच गई। पकड़े गए तीमारदार के फोन करने पर एक बार फिर दो दर्जन की संख्या में मनबढ़ पहुंच गए। पुलिसकर्मियों के सामने ही मनबढ़ों और जूनियर डॉक्टर्स के बीच एक बार फिर ट्रॉमा सेंटर में मारपीट हुई। इस दौरान वहां मौजूद गुलरिहा इंस्पेक्टर का बैच भी टूट गया। मरीज के परिजन शिवकुमार का सिर फट गया। तीन तीमारदार और चार डॉक्टर घायल हो गए। डॉक्टर्स को पीटने वाले युवक पुलिस के सामने ही फरार हो गए।

प्रिंसिपल के तहरीर देने पर माने डॉक्टर

मारपीट की घटना के बाद डॉक्टर्स ने ट्रॉमा सेंटर में इलाज ठप कर दिया। इसकी सूचना मिलते ही पुलिस व प्रशासन के कान खड़े हो गए। एसपी नॉर्थ रोहित सिंह सजवाण की अगुवाई में भारी संख्या में पुलिस बल कैंपस में पहुंच गया। सिटी मजिस्ट्रेट अजीत कुमार सिंह भी मौके पर पहुंचे। सर्जरी विभाग में एचओडी डॉ। योगेश पाल, एसोसिएट प्रो। डॉ। अशोक यादव, डॉ। दुर्गेश त्रिपाठी, डॉ। संतोष कुशवाहा और मेडिसिन एचओडी डॉ। महीम मित्तल के साथ बैठक हुई। कॉलेज के शिक्षकों के साथ प्रशासनिक अधिकारी भी डॉक्टर्स के मान- मनौव्वल में जुट गए। डॉक्टर्स ने प्रिंसिपल से केस दर्ज कराने की मांग की। पहले तो प्रिंसिपल ने इनकार किया मगर मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मान गए। तब कहीं जाकर डॉक्टर्स ने काम शुरू किया।

गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ केस

इस घटना में प्रिंसिपल डॉ। गणेश कुमार ने गुलरिहा थाने में तहरीर दी है। उन्होंने मरीज चंद्रावती के 10 से 15 अज्ञात तीमारदारों पर कॉलेज में मारपीट करने, जूनियर डॉक्टर्स पर हमला करने, कॉलेज की संपत्ति की क्षति पहुंचाने और मरीजों के इलाज में व्यवधान उत्पन्न करने का आरोप लगाया। इस मामले में पुलिस ने आईपीसी की धारा 142, 148, 149, 323, 332, 353 सेवन क्रिमिनल लॉ एक्ट, मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 की धारा तीन के तहत केस दर्ज किया है।

वर्जन

यह एक गंभीर मामला है। आए दिन डॉक्टर्स पर हमले हो रहे हैं। इससे डॉक्टर्स के अंदर असुरक्षा की भावना घर कर गई है। ऐसे माहौल में मरीजों का इलाज करना मुश्किल हो रहा है। पुलिस को बीआरडी की सुरक्षा बढ़ानी चाहिए।

- डॉ। यूसी सिंह, प्रवक्ता, बीआरडी मेडिकल कॉलेज

यह घटना दुखद है। ऐसा नहीं होना चाहिए। सभी को समझना चाहिए कि दिन रात मेहनत कर डॉक्टर मरीजों का इलाज करते हैं और कईयों की जान बचानते हैं। इस मामले में पुलिस ने मनबढ़ों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। आगे घटना की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए प्रशासन से सुरक्षा गार्ड की डिमांड की जाएगी। साथ ही कैंपस के हर प्वॉइंट पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे।

- डॉ। गणेश कुमार, प्रिंसिपल, बीआरडी मेडिकल कॉलेज

inextlive from Gorakhpur News Desk


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