गद्दाफ़ी का दुश्मनों से लड़ते रहने का ऐलान

2011-09-02T01:00:00+05:30

कर्नल गद्दाफ़ी ने एक संदेश में कहा कि वे अपने दुश्मनों से लडाई जारी रखेंगे

लीबिया के नेता कर्नल गद्दाफ़ी ने कहा है कि वे अपने दुश्मनों से लोहा लेते रहेंगे जबकि गद्दाफ़ी विरोधी राष्ट्रीय अंतरिम परिषद ने सियर्ट में मौजूद गद्दाफ़ी समर्थकों को आत्मसमर्पण करने के लिए एक और सप्ताह का समय दिया है।

इस बीच पेरिस में लीबिया की राष्ट्रीय अंतरिम परिषद (एनसीटी) और साठ देशों के प्रतिनिधियों ने लीबिया के भविष्य पर विचार विमर्श किया है। इस अहम सम्मलेन के बाद फ्रांस और ब्रिटेन के नेताओं का कहना था कि लीबिया में जारी नेटो कार्रवाई को लेकर सभी देशों में सहमति बनी हुई है।

'लड़ता रहूँगा'

इससे पहले लीबिया के 'फ़रार' नेता कर्नल गद्दाफ़ी ने एक संदेश में कहा कि वे अपने दुश्मनों से लडाई जारी रखेंगे। अपने प्रति वफ़ादार कहे जाने वाले टीवी चैनेल अल-राय पर सुनाए गए एक संदेश में गद्दाफ़ी ने कहा, "लीबिया के नागरिक झुक नहीं सकते, आत्मसमर्पण नहीं कर सकते क्योंकि वे महिलाएँ नहीं हैं."

लगभग दस मिनट तक प्रसारित किए गए इस ऑडियो संदेश में कर्नल गद्दाफ़ी ने कहा कि, "आज़ादी के लिए बड़ी कुर्बानियां देनी होंगी और नेटो का अंत निकट है."

गद्दाफ़ी ने अपने संदेश में इस बात को स्वीकार किया की त्रिपोली में उनका विरोध बढ़ रहा है है, लेकिन साथ ही इस बात पर भी जो़र दिया कि सियर्ट अब नई राजधानी है।

'दुश्मनों से मेल मिलाप'

इसी बीच फ्रांस की राजधानी पेरिस में लीबिया में जारी हालातों पर हुए एक सम्मलेन में भाग ले रहे पश्चिमी देशों ने लीबिया के अंतरिम अधिकारीयों से आग्रह किया है कि वे दुश्मनों से मेल मिलाप करने पर गौर करें।

फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सार्कोज़ी और ब्रिटेन के प्रधान मंत्री डेविड कैमरन ने करीब 63 देशों के प्रतिनिधियों को इस सम्मलेन में आमंत्रित किया था।

फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा कि लगभग सभी में इस बात पर सहमति बन गई है कि गद्दाफ़ी के शासन के दौरान रोकी गई लीबिया की संपत्ति पर से रोक हटा ली जाए। निकोलस सार्कोज़ी ने कहा, "बातचीत के बाद तत्काल प्रभाव से लीबिया की करीब पंद्रह अरब डॉलर की संपदा को रिहा किया जाता है."

इसी बीच लीबिया की राष्ट्रीय अंतरिम परिषद (एनसीटी) के एक वरिष्ठ सदस्य ने बीबीसी से बात करते हुए इस बात की जानकारी दी है कि उनकी परिषद ने गद्दाफ़ी समर्थकों को सिरते शहर सौंप देने की मियाद बढ़ा कर 10 सितंबर तक कर दी है.परिषद ने इस बात पर भी ज़ोर दिया है कि गद्दाफ़ी सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी आत्मसमर्पण के मुद्दे पर लगातार बातचीत कर रहे हैं।


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