कभी पढ़ाई के लिए दिव्‍या सूर्यदेवरा की जेब में नहीं थे पैसे अब बनीं जनरल मोटर्स की पहली महिला सीएफओ

2018-06-15T08:31:39+05:30

भारतीय मूल की दिव्या सूर्यदेवरा अमरीका की बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी जनरल मोटर्स की पहली महिला मुख्य वित्तीय अधिकारी CFO बनी हैं। वे 1 सितंबर से अपना कार्यकाल संभालेंगी।

2005 में जनरल मोटर्स के साथ जुड़ी थीं दिव्या
कानपुर।
भारतीय मूल की दिव्या सूर्यदेवरा को अमरीका की बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी जनरल मोटर्स में पहली महिला मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) के पद पर नियुक्त किया गया है। वे 1 सितंबर से अपना पद संभालेंगी और जनरल मोटर्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मैरी बर्रा को रिपोर्ट करेंगी। 39 वर्षीय, दिव्या 2005 में जनरल मोटर्स के साथ जुड़ी थीं। दिव्या ने अब तक कंपनी में ऑटोमैटिक ड्राइविंग वेहिकल स्टार्टअप क्रूज के अधिग्रहण समेत कई महत्वपूर्ण सौदों में अहम भूमिका निभाई है। बता दें कि दिव्या सूर्यदेवरा का जीवन काफी संघर्षों से भरा है। आइये उसके बारे में जानें।

चेन्‍नई में बीता बचपन

जनरल मोटर्स की पहली महिला सीएफओ दिव्‍या सूर्यदेवरा का बचपन भारतीय शहर चेन्‍नई में बीता। उन्‍होंने रियल सिंपल डॉट कॉम को दिए एक इंटरव्‍यू में बताया था कि बेहद कम उम्र में ही उनके पिता गुजर गए। उनकी मां ने कठिनाइयों के बीच अपने तीनों बच्‍चों को पाला लेकिन उनकी पढ़ाई-लिखाई में कोई कोताही नहीं की। उनकी उम्‍मीदों ने जहां उन्‍हें लगातार प्रेरित किया वहीं यह सीख भी दी कि कुछ भी आसानी से नहीं मिलता। उसे पाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होती है।
कॉलेज के दिन
उनकी कॉलेज की पढ़ाई भारत में ही हुई। जहां उन्‍होंने कॉमर्स से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद 22 वर्ष की उम्र में वह एमबीए करने के लिए हार्वर्ड पहुंची।
अमरीका पहुंचकर लगा कल्‍चर शॉक
उन्‍होंने इंटरव्‍यू में बताया था कि पहली बार अमरीका पहुंचने पर उन्‍हें कल्‍चर शॉक का सामना करना पड़ा। उस समय हार्वर्ड बिजनेस स्‍कूल ऐसे लोगों को प्रवेश देता था जिनके पास वर्क एस्‍पीरियंस हो। उन्‍होंने कॉलेज के दिनों के दौरान काम किया था लेकिन वह कॉलेज से सीधे निकलकर यहां आ पहुंची थीं।
जेब में नहीं थे पैसे
पढ़ाई के दिनों की याद करते हुए उन्‍होंने इंटरव्‍यू में बताया था कि उनके दोस्‍त स्‍कूल ट्रिप पर जाया करते थे लेकिन उनके लिए यह संभव नहीं था। उनके पास ज्‍यादा पैसे नहीं हुआ करते थे। पढ़ाई के लिए कर्ज लिया हुआ था जिसे उन्‍हें चुकाना था। ऐसे में उस वक्‍त पढ़ाई के बाद नौकरी ढ़ूढ़ना जरूरी लगता था।
बाक्‍सिंग से रहती हैं फि‍ट
अपने दिल व दिमाग को शांत रखने के लिए वह एक्‍सरसाइज करती हैं। उसमें भी उन्‍हें बॉक्‍सिंग भाती है। वह अपनी बेटी के साथ समय बिताती हैं व उसे स्‍कूल ले जाना उन्‍हें अच्‍छा लगता है।

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