अवैध कॉलोनियों की धरपकड़ को गूगल मैपिंग

2018-12-22T06:01:04+05:30

हैदराबाद की कंपनी करेगी सर्वे, हवाई और जमीनी दोनों तरह से होगा सर्वे

एमडीए ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 10 वर्ग किमी पर शुरू कराया कार्य

MEERUT : शहर में अवैध कॉलोनियों पर शिकंजा कसने के लिए प्राधिकरण ने परिक्षेत्र का सर्वे आरंभ कर दिया है। गूगल मैपिंग के माध्यम से शहर की हर एक लोकेशन का परीक्षण प्राधिकरण करा रहा है। फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 10 वर्ग किमी क्षेत्रफल के सर्वे का कांट्रेक्ट प्राधिकरण ने हैदराबाद की एक कंपनी से किया है। कंपनी हवाई और जमीनी सर्वे करके प्राधिकरण को रिपोर्ट सौंपेगी.

खंगाला जाएगा कोना- कोना

शासन के निर्देश पर प्राधिकरण शहर में स्थापित अवैध कॉलोनियों और निर्माणों के खिलाफ सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर रहा है तो वहीं अवैध निर्माणों के नियमितीकरण पर भी प्राधिकरण का जोर है। इसी दिशा में एमडीए, परिक्षेत्र की गूगल मैपिंग करा रहा है। प्रक्रिया के बाद गूगल मैपिंग के माध्यम से प्राधिकरण अवैध कॉलोनियों, अवैध निर्माणों को चिह्नित करेगा और उनके नियमितीकरण, सीलिंग या ध्वस्तीकरण पर फैसला लेगा।

पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत

एमडीए उपाध्यक्ष साहब सिंह ने बताया कि मेरठ में पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत जनवरी माह से होगी। हैदराबाद की नेशनल रिमोट सेंसिंग एजेंसी (एनआरएसए) को एमडीए ने यह कार्य सौंपा है। मेरठ में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 10 वर्ग किमी क्षेत्रफल में सर्वे का कार्य आरंभ किया जाएगा। प्राधिकरण ने इस कार्य के लिए 1.5 लाख रुपये प्रति वर्ग किमी के हिसाब से 15 लाख रुपये का भुगतान कंपनी को कर दिया है। कंपनी इस क्षेत्रफल का हवाई और जमीनी दोनों तरह से सर्वे करेगी।

अवैध निर्माणों पर शिकंजा

प्राधिकरण के निर्देश पर कंपनी इस क्षेत्रफल में कोने- कोने का सर्वे करेगी। गूगल मैपिंग के माध्यम से निर्माणों की स्थिति स्पष्ट होगी तो वहीं अवैध निर्माणों को चिह्नित किया जाएगा। एमडीए उपाध्यक्ष ने बताया कि अवैध कॉलोनियों, औद्योगिक क्षेत्रों, कमर्शियल निर्माणों को चिह्नित किया जाएगा। इसके अलावा संबंधित क्षेत्र में सड़क, नाला- नाली, सीवर- ड्रेनेज लाइन, वाटर लाइन आदि यूटीलिटी की स्थिति भी कंपनी खंगालेगी। सर्वे रिपोर्ट में वैध- अवैध निर्माण को प्राधिकरण की टीम सेग्रीगेट करेगी और मौके की स्थिति के आधार पर अवैध निर्माण और अवैध कॉलोनी के विनियमितीकरण की संभावनाएं खंगालेगी।

क्या होगा फायदा

अवैध निर्माणों के विनियमितीकरण की संभावनाओं पर प्राधिकरण विचार करेगा।

सर्वे रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि कहां कंपाउंडिंग के नियमों में शिथिलता बरती जा सकती है।

रिपोर्ट के आधार पर प्राधिकरण नियम और शर्ते तय करेगा।

शिथिलता के चलते राजस्व के नुकसान और बड़े पैमाने पर कंपाउंडिंग से प्राधिकरण के खजाने में आने वाली आय की तुलना भी प्राधिकरण करेगा।

नियमितीकरण के लिए वाह्य विकास में प्राधिकरण को कितना खर्च करना होगा आदि.

एक नजर में पायलट प्रोजेक्ट

10 वर्ग किमी क्षेत्रफल का होगा सर्वे

15 लाख रुपये किए जारी

जनवरी से आरंभ होगा सर्वे

हवाई और जमीनी दोनों प्रकार से होगा सर्वे

हैदराबाद की एनआरएसए कंपनी करेगी सर्वे

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हैदराबाद की कंपनी एनआएसए को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 10 वर्ग किमी का सर्वे करने का कार्य सौंपा गया है। प्राधिकरण परिक्षेत्र में इस क्षेत्रफल में कंपनी हवाई और जमीनी दोनों सर्वे करके रिपोर्ट देगी। रिपोर्ट के मुताबिक अवैध कॉलोनियों के विनियमितीकरण के लिए गाइडलाइन तैयार की जाएगी।

साहब सिंह, उपाध्यक्ष, मेरठ विकास प्राधिकरण

inextlive from Meerut News Desk


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