किताब काॅपी ही नहीं ड्रेस व बैग के नाम पर पैरेंट्स को ऐसे लूटते है स्कूल व कमीशनखोर

2019-04-10T11:20:29+05:30

स्कूल व कमीशनखोरों के बीच कमीशन का खेल सिर्फ किताब व कॉपी तक ही नहीं सिमटा है इनका सिंडिकेट ड्रेस और स्कूल बैग तक पहुंच चुका है

- स्कूल की ओर से थमा दिया जाता है तय दुकान का विजिटिंग कार्ड

- मनमाने रेट पर सामान देकर ढीली की जाती है पैरेंट्स की जेब

GORAKHPUR@inext.co.in
GORAKHPUR: स्कूल व कमीशनखोरों के बीच कमीशन का खेल सिर्फ किताब व कॉपी तक ही नहीं सिमटा है। इनका सिंडिकेट ड्रेस और स्कूल बैग तक पहुंच चुका है। शहर के तमाम स्कूल पैरेंट्स को अपनी तय दुकानों से ही ड्रेस और स्कूल बैग आदि चीजें खरीदने को मजबूर कर रहे हैं। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट के कैंपेन बच्चे खड़े बाजार में के तहत हुए रियल्टी चेक में जोरों पर चल रहे कमीशन के इस खेल का खुलासा हुआ है। शहर की ज्यादातर दुकानों पर स्कूल की ओर से मिले विजिटिंग कार्ड लेकर पहुंच रहे पैरेंट्स को महंगे दामों वाली चीजें चिपका कर खुलेआम चूना लगाया जा रहा है।

स्कूल देते हैं दुकान का विजिटिंग कार्ड
दैनिक जागरण आई नेक्स्ट के कैंपेन बच्चे खड़े बाजार में के दूसरे दिन जब रिपोर्टर शहर में ड्रेस और स्कूल बैग के बड़े मार्केट बक्शीपुर पहुंचा तो ड्रेस की दुकान पर ड्रेस और स्कूल बैग खरीदने वाले पैरेंट्स की भरमार नजर आई। पहले तो दुकानदार ने कमीशन के बारे में पूछे जाने पर चुप्पी साध ली लेकिन फिर नाम न छापने की शर्त पर बताया कि स्कूल ड्रेस, बैग, पानी की बोतल और टिफिन जैसे आइटम्स पर करीब 30-50 प्रतिशत तक का कमीशन होता है। स्कूल प्रबंधक कमीशन तय करते हैं। उसके बाद पैरेंट्स को तय दुकान का विजिटिंग कार्ड देकर भेज दिया जाता है। जिस पर कमीशन के सौदागारों का ये तगड़ा खेल फलता-फूलता है। शहर की अन्य दुकानों पर कमीशन का ऐसे ही खेल की बात सामने आई।

सबसे ज्यादा होता है मार्जिन
रियल्टी चेक के दौरान ये भी पता चला कि जितने भी बड़े ब्रैंड के बैग हैं, उनमें सबसे ज्यादा मार्जिन होती है। यानी कि ब्रांड के नाम पर सीधे तौर पर पैरेंट्स को लूटा जाता है। इन दुकानों पर स्कूल ड्रेस समेत पानी की बोतलें और टिफिन के लिए जाना पैरेंट्स के लिए मजबूरी होता है। पैरेंट्स का कहना है कि स्कूल की तरफ से अगर इस तरह से पर्टिकुलर दुकान पर नहीं भेजा जाता तो दूसरी जगह से सस्ती दरों पर वही सामान खरीदा जा सकता था।

ये चल रहा रेट

स्कूल बैक पैक बैग - 620 - 850 रुपए

जींस स्कूल बैग - 300 - 400 रुपए

थ्रीडी किड्स स्कूल बैग - 350 - 450 रुपए

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला
स्कूली बैग और किताबों का वजन कम कराने की मुहिम लंबे समय से चल रही थी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) ने भी स्कूली बैग के वजन को खतरनाक बताया था। कहा था कि ज्यादा वजन का असर बच्चों की हड्डियों पर पड़ रहा है। अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने क्लास एक से दसवीं तक के स्टूडेंट्स के स्कूली बैग का वजन तय कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट सुरेश पांडेय बताते हैं कि क्लास एक और दो के स्टूडेंट्स को होमवर्क देने पर मनाही है। इस सिलसिले में मानव संसाधन विकास मंत्रालय से सर्कुलर भी जारी किया गया है। इसका सर्कुलर भी सीबीएसई और सीआईएससीई स्कूलों के प्रबंधक, प्रिंसिपल के पास पहुंच गया है। नई नियमावली का अनुपालन शैक्षिक सत्र 2019-20 से सुनिश्चित भी हो चुका है। जिसे पालन करना सभी स्कूल प्रबंधकों के लिए जरूरी है।

सभी बो‌र्ड्स पर लागू है नियम
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सचिव ए हमजा ने 20 नवंबर को जारी आदेश में कहा था कि अतिरिक्त किताब, स्टडी मैटेरियल खरीदने का दबाव किसी स्टूडेंट्स पर नहीं डाला जाएगा। बैग और उसकी किताबों का जो वजन तय है, उसी हिसाब से पढ़ाई कराई जाएगी। बदला नियम सभी स्टेट बोर्ड, सीबीएसई और सीआईएससीई के स्कूलों पर लागू होगा।


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