हैलट को तो अपने ही लूट रहे हैं

2014-04-12T07:00:01+05:30

- जूनियर डॉक्टरों की मिलीभगत से इमरजेंसी में चल रहा प्राइवेट पैथालाजी का धंधा

- इमरजेंसी में काम करते प्राइवेट पैथालाजी के एजेंट, ईसीजी से लेकर एचआईवी और एबीजी जांच के वसूलते हैं मनमाने रुपए

- शिफ्ट वाइज करते हैं काम, जूनियर डॉक्टरों के मोबाइल रिचार्ज से लेकर, नाश्ते पानी का भी उठाते हैं खर्चा

- जांचों से रोज कमाते हैं एक लाख रुपए, सभी जांच हैलट में उपलब्ध

KANPUR : एक तरफ जहां हैलट हॉस्पिटल की इमरजेंसी में इंटर पास लड़कों से पेशेंट्स का इलाज करवाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ मेडिकल जांच की आड़ में पेशेंट्स की जेबों पर डाका डालने का काम भी धड़ल्ले से चल रहा है। आई नेक्स्ट रिपोर्टर ने पेशेंट्स और उनके फैमिली मेंबर्स की कम्पलेन पर जब इस गोरखधंधे की तह तक जाने की कोशिश की तो बेहद हैरान करने वाली सच्चाई सामने आई। दरअसल इमरजेंसी में ड्यूटी करने वाले जूनियर डॉक्टर्स की शह पर ही पेशेंट्स को लूटने का पूरा खेल चल रहा है। इस खेल के बारे में जानने के लिए पढि़ए ये रिपोर्ट

जूनियर डॉक्टर्स की शह पर होता है गोरखधंधा

हैलट इमरजेंसी में जूनियर डॉक्टर्स की शह पर प्राइवेट पैथालॉजी वालों का भी बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। शॉकिंग फेक्ट ये है कि जो जांचें हैलट में उपलब्ध हैं उनमें से कई जांचें प्राइवेट पैथालॉजी वाले इमरजेंसी में आकर करते हैं। इसके लिए पेशेंट्स के तीमारदारों से मनमाने रुपए भी लिए जाते हैं, जिससे हैलट हॉस्पिटल को ही लाखों रुपए का चूना लगता है। हैरान करने वाली बात ये है कि मेडिकल कॉलेज के सभी अधिकारियों को इस बात की जानकारी है लेकिन वह आंख बंद करके बैठे रहते हैं.

नर्सिग स्टॉफ भी शामिल

प्राइवेट पैथालॉजी वाले अपने कुछ खास लड़कों को इमरजेंसी में भेजते हैं। इनकी डॉक्टर्स के साथ ही नर्सिग स्टॉफ के साथ भी ट्यूनिंग इतनी अच्छी होती है कि जूनियर डॉक्टर्स इनसे अपने घर का भी काम कराते हैं। इसके अलावा जो कारीगर जेआर अपने साथ रखते हैं कई बार वह भी एचआईवी किट अपने पास रखते हैं और खुद ही जांच कर देते हैं.

आसपास के पैथालॉजी वाले शामिल

इमरजेंसी में प्राइवेट जांचें हैलट के आसपास बने पैथालॉजी वाले ही कराते हैं। इसके लिए उनकी सीनियर और जूनियर सभी डॉक्टरों से सेटिंग होती हैं। यह लोग इमरजेंसी के अलावा वार्डो में भी ब्लड, यूरिन की जांचों के लिए सैंपल कलेक्ट करते हैं और वहीं पर फीस लेकर रसीद काट देते हैं.

डेली एक लाख से ज्यादा कमाई

हैलट इमरजेंसी में बाहर से और ओपीडी से रोज औसतन क्70 से क्90 पेशेंट एडमिट होते हैं.इनमें से सर्जरी में ब्0 से भ्0, मेडिसिन में 80 से क्00 और आर्थो में फ्0 से फ्भ् पेशेंट भर्ती होते हैं। सर्जरी और आर्थो में भर्ती होने वाले हर पेशेंट की एचआईवी, एचबीएस, एचसीबी टेस्ट होते हैं। इसके अलावा ब्लड शुगर, के टेस्ट भी होते हैं। इसके लिए हर पेशेंट से ख्00 से फ्00 रुपए लिए जाते हैं। इसके अलावा मेडिसिन में ईसीजी, एबीजी, एचबीएस और आरए फैक्टर जांचों लिए ख्00 से 700 रुपए तक लिए जाते हैं। इस हिसाब से अगर गणना की जाए तो रोज प्राइवेट पैथालॉजी वाले इमरजेंसी और आईसीयू में पेंशेंट की जांचों से एक लाख से ज्यादा रूपए कमा लेते हैं।

जेआर के मोबाइल रिचार्ज भी कराते हैं

प्राइवेट पैथालॉजी से इमरजेंसी से जांच करने आने वाले लड़के जेआर की हर जरुरत का ख्याल रखते हैं। ये लड़के जेआर के मोबाइल रिचार्ज कराने से लेकर नाइट डयूटी में उनके खाने पीने का भी इंतजाम करते हैं। इसके लिए पैथालॉजी के मालिकों की तरफ से काफी खर्चा भी किया जाता है।

इन जांचों से लगता है चूना

क्- एचआईवी कार्ड टेस्ट, एचबीएस और एचसीबी टेस्ट- ख्00 रुपए जबकि इसकी किट की कीमत 8भ् रुपए ही है

ख्- एबीजी टेस्ट- फ्भ्0 रुपए

फ्- एचबीएच- क् सी - ख्ख्0 रुपए

ब्- आरए फैक्टर - 700 रुपए

भ्- ईसीजी- क्00 रुपए

मशीन लेकर चलते, शिफ्ट वाइज होता सैंपल कलेक्शन

इमरजेंसी में प्राइवेट पैथालॉजी वाले कुछ जांचों के लिए तो मशीन साथ लेकर चलते हैं। इसके अलावा सैंपल कलेक्शन के लिए भी इनके पास सारी व्यवस्था रहती हैं। बैग में पैथालॉजी का सामान लेकर चलने वाले यह लोग इमरजेंसी के मेडिसिन, सर्जरी व आर्थो के अलावा आईसीयू में भी जांच सुविधा उपलब्ध कराते हैं। इसके लिए इनकी शिफ्ट भी निर्धारित रहती हैं।

ईसीजी और एक्सरे की जंाच सुविधा तो इमरजेंसी में ही उपलब्ध है। इसके अलावा इमरजेंसी पेशेंट के लिए पैथालॉजी भी ख्ब् घंटे खुली रहती है। ऐसे में प्राइवेट पैथालॉजी वाले इमरजेंसी में कैसे जांच कर सकते हैं। फिर भी शिकायत मिलती है तों जांच के बाद कार्रवाई करेंगे।

- डॉ। सुरेश चंद्रा, एसआईसी

इमरजेंसी में कोई प्राइवेट जांच नहीं होती है। इसके अलावा एचआईवी जैसी जांचों के लिए किट समय- समय पर इमरजेंसी में उपलब्ध कराए जाते हैं।

- डॉ.एसबी मिश्रा, सीएमएस

एलएलआर हॉस्पिटल

inextlive from Kanpur News Desk


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