डिस्काउंट से बना प्रॉफिटेबल बिजनेस

2018-07-28T03:42:25+05:30

इंडिया में खरीदारी करते वक्त अगर किसी ने मोलभाव नहीं किया तो समझिए खरीदारी अधूरी। ग्रैबऑन लोगों की इसी आदत से इंस्पायर्ड है जो उन्हें बारगेन करने का मौका देता है। ये अनोखा बारगेन काउंटर है जो ऑनलाइन परचेजिंग पर आपको बेस्ट बाइंग ऑफर्स देता है। ये यूनीक इनोवेशन है जिसे शुरू किया अशोक रेड्डी ने। जानते हैं कैसे बना ग्रैबऑन इंडिया में कूपंस की दुनिया का बेस्ट डीलिंग ऑप्शन

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KANPUR : साल 2013 में अशोक रेड्डी का शुरू किया गया स्टार्टअप ग्रैबऑन ऑनलाइन शॉपिंग बफ्स के लिए एक ऐसा मनी सेविंग ऑप्शन है जो उन्हें एग्जिस्टिंग ऑफर्स के साथ और भी  ज्यादा पैसे सेव करने की अपाॅर्च्युनिटी देता है। ई-कॉमर्स की ग्रो करती दुनिया में यह एक यूनीक कॉन्सेप्ट था और इस कॉन्सेप्ट को एप्लिकेबल बनाया अशोक रेड्डी ने।  अशोक एक कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट होने के साथ-साथ बिजनेस मैनेजमेंट ग्रेजुएट भी हैं। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया था कि ई-कॉमर्स के बढ़ते हुए मैग्निट्यूट को देखते हुए उन्हें ख्याल आया कि क्यों न वो इस प्लैटफॉर्म को यूनीक सेविंग ऑफर्स के साथ और भी ल्यूकरेटिव बना दें।  उन्हें ई-कॉमर्स में अपाॅर्च्युनिटीज नजर आईं और अपने आइडिया में भी। उन्हें यकीन था कि उनका आइडिया इस ग्रोइंग इंडस्ट्री के साथ ग्रो करेगा। ग्रैब ऑन को स्टार्ट करने का उनका मकसद यही था कि इंडियन शॉपिंग बफ्स को ज्यादा से ज्यादा पैसे सेव करने का मौका मिल सके।
ऐसे आया यूनीक आइडिया
अशोक ने पहले ग्रैब ऑन की पेरेंट कंपनी में इंस्पायर लैब्स नाम से एक ऐसा प्लैटफॉर्म क्रिएट किया जहां लोग अपने स्टार्टअप आइडियाज डिसकस कर सकते थे, उन्हें शुरू कर सकते थे और अपने बिजनेस को सक्सेसफुल बना सकते थे। इसी दौरान उन्होंने देखा कि ई-कॉमर्स इंडस्ट्री में काफी पोटेंशियल है जो फ्लिपकार्ट, जबॉन्ग जैसी कई कंपनीज के साथ तेजी से बढ़ रहा था। यही वजह थी कि उन्होंने अपना रुख इस तरफ किया और इसमें संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दीं और फिर एक दिन उन्हें ग्रैबऑन का आइडिया आया। पर ये इतना ईजी नहीं था। अशोक का कहना है कि कई दिनों और हफ्तों तक उन्होंने कई तरह के आइडियाज के बारे में सोचा और उन पर काम किया। इस बीच कई आइडियाज रिजेक्ट हुए और उन्हें रिवाइज किया गया। पेरेंट कंपनी इंस्पायर लैब्स ने अशोक के कई आडियाज को पूरी तरह से एनालाइज करने के बाद ग्रैबऑन पर मुहर लगाई।
यूजफुल और क्विक रेवेन्यू जेनरेशन
ग्रैबऑन के सक्सेसफुल होने की एक वजह ये भी है कि यह एक यूजफुल इनोवेशन था जहां कंज्यूमर्स को अपने कंफर्ट के मुताबिक डिसकाउंट कूपंस की इंफॉर्मेशन मिल जाती है। ग्रैब ऑन के 4100 से भी ज्यादा कंपनीज के साथ टाईअप्स हैं जो उसे रेवेन्यू जेनरेट करने में हेल्प करते हैं। जिन कंपनीज के लिए ग्रैबऑन कूपंस देता है, वो सभी इस डील का कुछ हिस्सा ग्रैबऑन को देती हैं। इस तरह से यह अपनी इनकम जेनरेट करता है।
चैलेंजेस को टैक्टफुली फेस करें
अशोक का मानना है कि कूपन और डील्स इंडस्ट्री में पकड़ बनाना इतना ईजी नहीं था। और उनके सामने भी हर दिन अलग-अलग तरह के चैलेंजेस आए। लेकिन उनके मुताबिक चैलेंजेस कितने बड़े हैं, ये देखने की बजाय हमें उन्हें सॉल्व करने पर फोकस करना चाहिए। अपने प्रोजेक्ट को सक्सेसफुल बनाने के लिए उन्होंने अलग-अलग फील्ड और एक्सपीरियंस लोगों का हाथ थामा और मिलकर सभी टेक्निकल चैलेंज को फेस किया और आगे बढ़ते गए।
एंप्लॉइज को देते हैं इंपॉर्टेंस
कोई भी बिजनेस एक अच्छी टीम के सपोर्ट से ग्रो करता है और इस बात को अशोक अच्छे से फॉलो करते हैं। वो अपने एंप्लॉइज के लिए ऐसा एनवॉयरमेंट क्रिएट करना चाहते हैं ताकि एंप्लॉइज को नई चीजें सीखने और ग्रो करने की अपाॅर्च्युनिटीज मिले। इनफैक्ट, ग्रैबऑन का ऑफिस भी इंडिया के बेस्ट 15 ऊबर-कूल ऑफिसेस में से एक है।

सक्सेस मंत्रा

अशोक कहते हैं कि सक्सेसफुल  होने का एक ही मंत्रा है कि एक इंडिविजुअल को अपने काम को लेकर पैशनेट होना चाहिए, चैलेंजेस को फेस करके सॉल्यूशंस ढूंढने चाहिए और सिचुएशन को अच्छे से समझकर उसके मुताबिक ही एक्ट करना चाहिए।
स्टार्टअप आइडिया
खरीदने का झंझट नहीं, रेंट पर 'ग्रैब' करें
नाम एक से हैं पर ग्रैबऑन रेंट, ग्रैबऑन से बिल्कुल डिफरेंट है। जैसा कि नाम सजेस्ट करता है यह एक ऐसा पोर्टल है जहां आप कुछ भी रेंट पर ले और दे सकते हैं...
ग्रैबऑन रेंट के सीईओ शुभम जैन का कहना है कि एक बार उन्होंने अपने दोस्तों के साथ घर पर ही बार्बेक्यू पार्टी प्लान की। सोचा गया कि रेंट पर कहीं बार्बेक्यू ले लिया जाए। लेकिन जब ये रेंट पर नहीं मिला तो उन सभी ने डिसाइड किया कि कॉन्ट्रिब्यूट करके वो उसे खरीद लेंगे पर ये महंगी डील थी। फिर उन्हें आइडिया आया कि क्यों न कोई ऐसा प्लैटफॉर्म क्रिएट किया जाए जहां बड़े-बड़े अप्लाइंसेज और प्रोडक्ट्स जिन्हें खरीदना जरूरी न हो, उन्हें आसानी से कम पैसों में रेंट पर लेकर काम चला लिया जाए।

शुरू किया सोसाइटी से

सचिन ने अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर 2015 में इसकी शुरुआत हैदराबाद में एक सोसाइटी से की जहां 1100 से ज्यादा अपार्टमेंट्स थे। उन्होंने पैंपलेट्स के जरिए अपनी वेबसाइट का प्रमोशन किया और कम ही वक्त में उन्हें अच्छे खासे ऑर्डर्स भी मिलने लगे।

होता है सिक्योरिटी डिपॉजिट

कोई भी कस्टमर ग्रैबऑन रेंट डॉट कॉम पर जाकर वहां अवेलेबल प्रोडक्ट रेंज में से कोई भी प्रोडक्ट सिलेक्ट कर सकता है और ऑनलाइन पेमेंट करके उसकी सर्विस ले सकता है। यहां कस्टमर को सिक्योरिटी अमाउंट भी डिपॉजिट करना होता है।
क्वॉलिटी पर फोकस
शुभम कहते हैं कि उनके लिए प्रायोरिटी ये है कि वो लोगों को कम वक्त के लिए ही सही पर क्वॉलिटी प्रोडक्ट्स प्रोवाइड करें और सबसे जरूरी है कि टाइम पर उन्हें प्रोडक्ट की डिलीवरी दें। अब शुभम हैदराबाद, बेंगलुरु, मुंबई और गुरुग्राम के बाद  पुणे, एनसीआर रीजन और चेन्नई में भी अपनी सर्विसेज शुरू करने का प्लान बना रहे हैं।
QnA

स्टार्टअप के लिए रेजिस्टर करना हो तो हमें कौन-कौन से डॉक्यूमेंट्स सब्मिट करने होंगे?
- मधुरिमा कटियार
स्टार्टअप के लिए रेजिस्टर करना अब काफी ईजी है जहां आपको स्टार्टअप इंडिया की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर या मोबाइल एप्लिकेशन के थ्रू रेजिस्टर कर सकते हैं। और रेजिस्टर करने के दौरान आप नीचे दिए डॉक्यूमेंट्स में से किसी एक डॉक्यूमेंट को भी अटैच कर सकते हैं।
- इनक्यूबेशन फंड, एंजेल फंड, प्राइवेट इक्विटी फंड, एक्सिलेटर वगैरह से मिली हुई कम से कम 20 परसेंट इक्विटी फंडिंग का लेटर। ये फंडिंग बॉडीज सेक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया में रेजिस्टर्ड होनी चाहिए जो इनोवेटिव बिजनेस को प्रमोट करने में हेल्प करती हैं।
- या फिर गवर्नमेंट ऑफ इंडिया या स्टेट गवर्नमेंट से मिली हुई फंडिंग का लेटर अटैच किया जा सकता है।
- इंडिया पेटेंट ऑफिस के जर्नल में फाइल और पब्लिश हुए पेटेंट की डीटेल्स का लेटर।
- सेबी में जो भी रेजिस्टर्ड फंडिंग कंपनीज हैं जो सिर्फ स्टार्टअप की फंडिंग के लिए ही बनी हैं, उनकी कंप्लीट इंफॉर्मेशन स्टार्टअप इंडिया पोर्टल पर अवेलेबल हैं।
Quick Guide
टाई अप से बढ़ेगा रेवेन्यू
जब आप कोई भी स्टार्टअप प्लान करते हैं तो उस दौरान आपको ये प्लानिंग करनी होती है कि आपके प्रोडक्ट या सर्विस सेल से आपको कहां-कहां से रेवेन्यू मिलेगा। बेसिक रिसोर्सेज और टार्गेट कंज्यूमर्स के अलावा टाईअप्स के बारे में भी सोचा जाना चाहिए। जब किसी कंपनी के साथ टाईअप किया जाता है तो वहां आने वाले कस्टमर्स का डायरेक्ट या इनडायरेक्ट फायदा मिलता है और साथ ही आपके इनकम रिसोर्सेज भी बढ़ते हैं। स्टार्टअप्स में खासकर टाईअप्स का काफी बेनिफिट होता है जो न सिर्फ इनकम बल्कि आपके बिजनेस को प्रमोट करने में भी हेल्प करते हैं। स्पेशली अगर आप सर्विसेज बेस्ड स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं तो आपकी सर्विस से रिलेटेड सर्विसेज को अपने साथ जोडऩे की कोशिश जरूर करें।
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