ईवे बिल जेनरेट करने का बदल गया तरीका

2019-03-28T06:00:51+05:30

-टैक्स चोरी रोकने के लिए जीएसटी काउंसिल ने की सख्ती

-अब ई-वे बिल में ऑटोमैटिक जारी होगी दूरी की गणना

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PRAYAGRAJ: टैक्स चोरी रोकने और व्यापारियों द्वारा की जा रही हेरा-फेरी पर कंट्रोल के लिए जीएसटी काउंसिल ने अब ई-वे बिल जेनरेट करने के नियम और सिस्टम में कई बदलाव किए हैं। अब ई-वे बिल में दर्ज दूरी को लेकर हेरा-फेरी नहीं हो सकेगी। वजह, दूरी की गणना अब ऑटोमैटिकली होगी। इसकी शुरुआत हो चुकी है। इसलिए व्यापारियों को अलर्ट रहना जरूरी है।

ऑटोमैटिकली होगी दूरी की गणना

जीएसटी में रजिस्टर्ड व्यापारियों के लिए माल का टर्न ओवर करने से पहले अब ई-वे बिल सिस्टम में ऐसी व्यवस्था कर दी गई है जिससे रूट की दूरी की गणना ऑटोमैटिक होगी। माल सप्लायर और रिसीवर की दूरी पोस्टल पिन कोड के जरिए तय होगी।

गलत पिन कोड डाला तो पकड़े जाएंगे

-अब सप्लायर्स और सामान रिसीव करने वाले के पते के हिसाब से दूरी की गणना होगी।

-यूजर सिर्फ इस दूरी से 10 प्रतिशत दूरी को दर्शा पाएगा।

-अगर दो पिन की दूरी 300 किलोमीटर है तो सप्लायर अधिकतम दूरी (300+30) किलोमीटर ही दिखा सकेगा।

-अगर दोनों पिनकोड समान हैं तो यूजर अधिकतम 100 किलोमीटर की दूरी दर्ज कर सकेगा।

-अगर किसी ने ईवे बिल में गलत पिनकोड डाला फिर वह जांच के दायरे में आ जाएगा।

एक इनवॉयस पर कई ई-वे बिल नहीं

एक इनवॉयस पर कई ई-वे बिल जेनरेट करने का सिस्टम अब बदल गया है। एक इनवॉयस पर अब एक ही ई-वे बिल जनरेट किया जा सकता है। अगर एक बार एक इनवॉयस से ई-वे बिल जनरेट हो गया तो फिर कनसाइनर, कनसाइनी और ट्रांसपोर्टर दूसरा बिल जनरेट नहीं कर सकेंगे। कंसाइनमेंट ट्रांजिट में होने पर ई-वे बिल का एक्सटेंशन किया जा सकेगा। एक्सटेंशन के समय यूजर से पूछा जाएगा कि गुड्स ट्रांजिट में है या मूवमेंट में है। ट्रांजिट चुनने पर ट्रांजिट की जगह का पता भी देना होगा।

ई-वे बिल के साथ लगानी होगी आईडी

ई वे बिल एक इलेक्ट्रॉनिक बिल है जिसे जीएसटी में रजिस्टर्ड कारोबारियों को जनरेट करना होता है। जीएसटी में रजिस्टर्ड कोई भी कारोबारी 50 हजार रुपए से ज्यादा का सामान बिना ईवे बिल के नहीं भेज सकता है। ई वे बिल जनरेट करने के लिए इनवॉयस, बिल सप्लाई और चालान की जरूरत होगी। इसके अलावा रोड से ट्रांसपोर्ट करने के पर व्हीकल नंबर या ट्रांसपोर्टर की आईडी देनी होगी। रेल, एयर और शिप से ट्रांसपोर्ट करने पर ट्रांसपोर्टर आईडी, ट्रांसपोर्ट डॉक्यूमेंट नंबर और डॉक्यूमेंट की तारीख होनी चाहिए।

वर्जन-

जो बिजनेसमैन सही तरीके से बिजनेस कर रहे हैं, उनके लिए जीएसटी काउंसिल द्वारा किए जा रहे बदलाव उपयोगी हैं। ई-वे बिल में हुए बदलाव से करप्शन की संभावना कम होगी। कार्रवाई से बचने के लिए व्यापारियों को एक बार बदले हुए नियमों को समझ लेना चाहिए।

सुमित अग्रवाल

सीए

inextlive from Allahabad News Desk


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