डीएवी पीजी कॉलेज का जिम कई साल से गुम

2019-04-22T12:18:26+05:30

- डीएवी पीजी कॉलेज का जिम फांक रहा धूल, स्टूडेंट्स को नहीं आ रहा रास

- न के बराबर स्टूडेंट्स कर रहे जिम का इस्तेमाल, स्टूडेंट्स और फैकल्टी के लिए है फ्री फैसिलिटी

- लाखों रुपए की वर्कआउट मशीनों का नहीं हो पा रहा यूज, इसलिए मेंटेनेस भी नहीं

देहरादून, स्टूडेंट्स की स्ट्रेंथ के लिहाज से राजधानी के सबसे बड़े डीएवी पीजी कॉलेज का जिम कई सालों से बदहाल है। स्टूडेंट्स के साथ-साथ कॉलेज फैकल्टी की फिजिकल फिटनेस को दुरुस्त रखने के लिए कॉलेज में जिम स्थापित किया गया था। लेकिन, रखरखाव न होने के कारण यहां रखे कीमती मशीनें और इक्विपमेंट्स जंग खा रहे हैं। हालांकि, जिम का संचालन हो रहा है, लेकिन यह ना के बराबर है। स्टूडेंट्स को जिम का पता ही नहीं है, न ही इसे मेंटेन कर स्टूडेंट्स को अवेयर किया जा रहा है।

स्टूडेंट्स, फैकल्टी के लिए फ्री फैसिलिटी

स्टूडेंट्स को फिजिकल के साथ-साथ मेंटली फिट रखने के लिए वर्कआउट जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए डीएवी कॉलेज एड्मिनिस्ट्रेशन द्वारा कॉलेज कैंपस में जिम स्थापित किया गया था। प्राइवेट जिम में हजारों रुपए खर्च करके युवा वर्कआउट करते हैं, लेकिन डीएवी कॉलेज की फ्री जिम में स्टूडेंट्स आने को तैयार नहीं। यहां न केवल स्टूडेंट्स बल्कि फैकल्टी के लिए भी फ्री जिम की फैसिलिटी है। लाखों रुपए की मशीने यहां इंस्टॉल की गईं, लेकिन रख्ररखाव और उपयोग न होने के कारण वे जंग खा रही हैं।

यूज नहीं तो मेंटेनेंस भी नहीं

डीएवी कॉलेज के स्पो‌र्ट्स सेक्रेटरी डा। विनीत विश्नोई ने बताया कि जिम का संचालन जारी है। डेली 5 से 7 बजे तक दो घंटे के लिए जिम खोला जाता है। कुछ स्टूडेंट्स भी यहां वर्कआउट के लिए आते हैं। लेकिन, स्टूडेंट्स में अवेयरनेस नहीं है, इसलिए उनकी संख्या काफी कम है। बताया कि जिम में लाखों रुपए खर्च कर वर्कआउट इक्विपमेंट लगाए गए हैं, लेकिन इनका यूज प्रॉपर नहीं हो पा रहा है, इसलिए मेंटेनेंस भी नहीं हो पा रहा। हालांकि, अब जिम को दुरुस्त करने की कवायद शुरू की गई है। मशीनों को मेंटेन किया जा रहा है और जिम्नेजियम हॉल की रंगाई पुताई कराई जा रही है।

अब मेंटेनेंस के लिए 3 लाख का बजट

जिम में लाखों की मशीनें जंग खा रही हैं, जिन्हें दुरुस्त करने के लिए अब मामूली बजट खर्च करने की तैयारी है। बताया गया है कि जिम की दशा सुधारने के लिए 3 लाख रुपए का बजट तय है, जिसमें नई मशीनें खरीदी गई हैं, पुरानी मशीनों की मरम्मत होनी है और जिम्नेजियम में रंग-रोगन के साथ मरम्मत का काम होना है। लेकिन, स्टूडेंट्स को जिम के लिए कैसे अवेयर किया जाएगा, उनकी संख्या कैसे बढ़ाई जाएगी ये बड़ा सवाल है।

जिम का बुरा हाल, बैडमिंटन कोर्ट की तैयारी

डीएवी में स्पोर्ट्स एक्टिविटीज को बढ़ाने के लिए ओएनजीसी की मदद से इनडोर बैडमिंटन हॉल बनाया जा रहा है। जिसमें 20 लाख की लागत से 2 इनडोर कोर्ट बन रहे हैं। ये स्टेट लेवल के कोर्ट होंगे, जिनमें कॉम्पिटीशन ऑर्गेनाइज कराए जाएंगे। इसके साथ ही क्रिकेट और दूसरे स्पो‌र्ट्स के लिए भी फैसिलिटी जुटाई जा रही हैं।

ये इक्विपमेंट खा रहे जंग

ट्रेडमिल

एक्सरसाइज साइकिल

पैरलल बार

स्विंग बार

वेट रोड्स

मल्टीपल जिम मशीन

डीएवी में स्टूडेंट्स- 12, 500

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डीएवी में कई साल पुराना जिम है। मशीनें भी पर्याप्त संख्या में हैं, लेकिन स्टूडेंट्स अवेयर नहीं है, इसका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा। स्टूडेंट्स को अवेयर किया जाएगा ताकि जिम का पूरा लाभ उन्हें मिले।

डॉ। विनीत विश्नोई, स्पो‌र्ट्स सेक्रेटरी, डीएवी कॉलेज

inextlive from Dehradun News Desk


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