विजयाभिनन्दन रूप में मनाएं हनुमान जयंती

2017-04-10T07:40:02+05:30

-चित्रा नक्षत्रयुता परम पुण्यदायिनी स्नान दान का पुण्य काल सुबह 11:38 बजे तक

-उदयव्यापिनी पूर्णिमा तिथि सूर्योदय से 11:38 बजे तक, वहीं चित्रा नक्षत्र पूरा दिन

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BAREILLY:

11 अप्रैल को पड़ रही हनुमान जयंती बेहद खास संयोग समेटे हुए है। कई वषरें बाद इस बार हनुमान जयंती चित्रा नक्षत्रयुता परम पूर्णदायिनी स्नान दान की चैत्री पूर्णिमा मंगलवार के दिन पड़ रही है। विशेष बात यह भी है कि इस संवत्सर के राजा भी मंगल हैं एवं 06 अपै्रल 2017 से शनि देव वृश्चिक राशि में कुछ महीनों के लिए परिवर्तन करेंगे। इस हनुमान जयंती को विजयाभिनन्दन उत्सव के रूप में मनाएं। ऐसे विशेष योग में हनुमान जी की पूजा, उपासना, व्रत करने का विशेष लाभ मिलेगा। मंगलवार और शनिवार का दिन इनके पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ है। उत्सव सिन्धु एवं व्रत रत्‍‌नाकर के अनुसार इस दिन रामभक्त हनुमानजी की जन्मतिथि का व्रत रखना चाहिए। इस अवसर पर हनुमान जी की मूर्ति पर सिन्दूर चढ़ा कर का विशेष श्रृंगार करके स्नान, ध्यान, भजन-पूजन और सामूहिक पूजा करना विशेष लाभदायक होता है।

चार मतों का अनाेखा संयोग

राम भक्त हनुमान की जन्मतिथि में इस बार एक दो नहीं बल्कि चार मतों का भी अद्भुत संयोग बन रहा है। उत्सव सिन्धु के अनुसार कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी, भौमवार को स्वाति नक्षत्र तथा मेष लग्न में अंजनी के गर्भ से हनुमान के रूप में स्वयं शिव जन्मे थे। व्रत रत्‍‌नाकर में भी बताया गया है कि कार्तिक कृष्ण की भूततिथि को मंगलवार के दिन महानिशा में अंजना देवी ने हनुमानजी को जन्म दिया था। वहीं हनुमदुपासना कल्पद्रुम ग्रन्थ में लिखा है कि चैत्र शुक्ल पूर्णिमा मंगलवार के दिन मंजू मेखला से युक्त, कोपीन से संयुक्त और यज्ञोपवीत से भूषित हनुमान जी उत्पन्न हुए। जबकि एक अन्य गणना के अनुसार हनुमानजी का जन्म 1,85,58,113 वर्ष पहले चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मंगलवार के दिन चित्रा नक्षत्र व मेष लग्न के योग में हुआ था।

ऐसे करें पूजन :-

पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके लाल आसन पर बैठें, लाल धोती और सिर के ऊपर वस्त्र कोई चादर, दुपट्टा आदि डाल लें, अपने सामने छोटी चौकी पर लाल वस्त्र बिछा दें, अब तांबे की प्लेट पर लाल पुष्पों का आसन देकर हनुमानजी की मूर्ति स्थापित करें, मूर्ति पर सिन्दूर से टीका कर लाल पुष्प अर्पित करें, मूर्ति पर सिन्दूर लगाने के बाद धूप-दीप, अक्षत, पुष्प एव नैवेद्य आदि से पूजन करें। सरसों या तिल के तेल का दीपक एवं धूप जला दें, फिर यथा शक्ति अनुसार मंत्रों का जाप आदि करें। हनुमान जी के 12 नामों का 151 बार स्मरण करें। यह 12 नाम हैं, हनुमान, अंजनीसुत, वायुपुत्र, महाबल, रामेष्ट, फाल्गुन सखा, पिंगलाक्ष, अमित विक्रम, उदधिक्रमण, सीताशोक विनाशन, लक्ष्मण प्राण दाता और दशग्रीवदर्पहा। घर-परिवार में सुख-शान्ति के लिए इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ 51 बार करना चाहिए।

कामना पूर्ति के लिए करें दीप-दान:-

हनुमान जी को दीप-दान बेहद प्रिय है। ऐसे में इन जगहों पर दीप जलाना चाहिए।

- विघ्न एवं संकटों का नाश करने के लिए गणेश जी के निकट हनुमान जी के लिए दीपदान करें

- व्याधि नाश और दृष्टि रक्षा के लिए चौराहों पर दीपदान करें।

- बन्धन से छूटने के लिए राजद्वार अथवा कारागार के समीप दीपदान करें।

- सम्पूर्ण कार्य की सिद्धि के लिए पीपल और वट वृक्ष के नीचे दीपदान करें।

- भय निवारण और विवाद की शान्ति के लिए, ग्रह संकट और ज्वर उतारने के लिए राजद्वार पर हनुमानजी के लिए दीपदान करें।

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हनुमान जयंती कई वर्षो बाद चित्रा नक्षत्रयुता परम पुण्य दायिनी स्नानदान की चैत्री पूर्णिमा मंगलवार को है। साथ ही संवतसर के राजा भी मंगल है। इस अति विशिष्ट योग में हनुमान जी की उपासना, पूजा पाठ करने से भक्तों को विशेष लाभ प्राप्त होगा।

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पं। राजीव शर्मा, बालाजी ज्योतिष संस्थान, बरेली

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