अपने काम से खुश हैं हर्षवर्धन कपूर बायोपिक में आएंगे नजर

2018-09-20T02:36:12+05:30

अनिल कपूर के बेटे हर्षवर्धन कपूर की अब तक दो फिल्में रिलीज हुई हैं और दोनों ही बॉक्सऑफिस पर नहीं चलीं। एक रीसेंट इंटरव्यू में इस एक्टर ने अपनी फिल्म च्वॉइसेज और फेल्योर्स के बारे में खुलकर बात की। जानिए क्या है उनका कहना

features@inext.co.in  KANPUR: भले ही हर्षवर्धन की अब तक की रिलीज हुई दोनों फिल्में बॉक्स-ऑफिस पर न चली हों लेकिन इससे उनके कॉन्फिडेंस पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। उनका कहना है कि वो जानते हैं कि ऐसी फिल्म बनाना बेहद मुश्किल है जिसमें यूनिवर्सल अपील हो। वैसे तो उनकी पहली फिल्म मिर्जियां और दूसरी भावेश जोशी ऑडियंस को कुछ खास पसंद न आई हो पर अपनी अच्छी फरफॉर्मेंस से हर्षवर्धन क्रिटिक्स को इंप्रेस करने में जरूर सक्सेसफुल हो गए।  ऐसी फिल्में करनी हैं हर्ष को इस बारे में हर्षवर्धन ने कहा, 'मेरी फिल्में मेरी पर्सनालिटी और मेरी च्वॉइसेज का रिप्रेजेंटेशन हैं। मैं जब उन फिल्मों की तरफ देखता हूं जो मैंने 26 साल की उम्र में की हैं और फिर मैं उन फिल्मों की तरफ देखता हूं जो कमाई कर रही हैं तो मैं हैरान होकर खुद से पूछता हूं कि क्या मैं उन फिल्मों का हिस्सा बनना चाहता हूं? मैं जिस तरह का काम कर रहा हूं, उससे बहुत खुश हूं। आफ्टरऑल ये बहुत ही पर्सनल मैटर है। मैं यहां वो काम करने के लिए हूं जो मैं चाहता हूं।'  सबको एक साथ खुश नहीं रखा जा सकता हर्षवर्धन आगे कहते हैं कि जो भी फेल्योर उन्होंने एक्सपीरियंस किया है उससे उन्होंने लोगों की सेंसिबिलिटीज के बारे में सीखा है। वो कहते हैं, 'हम सीखते हैं कि लोग हमें किस तरह से देखना चाहते हैं। लोकिन ये बहुत मुश्किल होता है क्योंकि दुनिया में अलग- अलग तरह के लोग हैं। तो आप किसी एक चीज से सभी को कैसे खुश कर सकते हैं। फिर आपको खुद को भी खुश करना होता है। ये बहतु ट्रिकी है।  इंडिया में हैं डिफरेंट पैलेट हर्षवर्धन आगे कहते हैं कि इंडिया में कई सारे इंडिया हैं। नॉर्थ और साउथ के लोगों की खाने और फिल्मों की च्वॉइस डिफरेंट होती हैं। मैं सबको कैसे खुश रख सकता हूं। मुझे लगता है कि पहले मुझे खुद को खुश रखना चाहिए और जो काम मैं कर रहा हूं, उस पर विश्वास करना चाहिए। अगर हमारा किया हुआ काम अच्छा है और सच्चे दिल से किया गया है तो डेफिनेटली हम रात में चैन की नींद सो पाते हैं। जब हम कुछ नया करते हैं और वो चल जाता है तो वो केस स्टडी बन जाता है। दूर से दिखने वाली चीजें अच्छी जरूर लगती हैं लेकिन उनके बारे में हम तब तक नहीं जानते जब तक उन्हें ट्राय नहीं करते। कम से कम मैं वो काम तो कर रहा हूं जो मुझे अच्छा लगता है।'  हर्षवर्धन जल्द ही अभिनव बिंद्रा की बायोपिक में नजर आएंगे और वह इसे लेकर बेहद एक्साइटेड भी हैं। वो कहते हैं, 'मेरा सबसे बड़ा चैलेंज ये है कि मैं इस स्टोरी को पूरी सच्चाई के साथ स्क्रीन पर पोट्र्रे कर सकूं।' 

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KANPUR: भले ही हर्षवर्धन की अब तक की रिलीज हुई दोनों फिल्में बॉक्स-ऑफिस पर न चली हों लेकिन इससे उनके कॉन्फिडेंस पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। उनका कहना है कि वो जानते हैं कि ऐसी फिल्म बनाना बेहद मुश्किल है जिसमें यूनिवर्सल अपील हो। वैसे तो उनकी पहली फिल्म मिर्जियां और दूसरी भावेश जोशी ऑडियंस को कुछ खास पसंद न आई हो पर अपनी अच्छी फरफॉर्मेंस से हर्षवर्धन क्रिटिक्स को इंप्रेस करने में जरूर सक्सेसफुल हो गए। 

ऐसी फिल्में करनी हैं हर्ष को

इस बारे में हर्षवर्धन ने कहा, 'मेरी फिल्में मेरी पर्सनालिटी और मेरी च्वॉइसेज का रिप्रेजेंटेशन हैं। मैं जब उन फिल्मों की तरफ देखता हूं जो मैंने 26 साल की उम्र में की हैं और फिर मैं उन फिल्मों की तरफ देखता हूं जो कमाई कर रही हैं तो मैं हैरान होकर खुद से पूछता हूं कि क्या मैं उन फिल्मों का हिस्सा बनना चाहता हूं? मैं जिस तरह का काम कर रहा हूं, उससे बहुत खुश हूं। आफ्टरऑल ये बहुत ही पर्सनल मैटर है। मैं यहां वो काम करने के लिए हूं जो मैं चाहता हूं।' 

सबको एक साथ खुश नहीं रखा जा सकता

हर्षवर्धन आगे कहते हैं कि जो भी फेल्योर उन्होंने एक्सपीरियंस किया है उससे उन्होंने लोगों की सेंसिबिलिटीज के बारे में सीखा है। वो कहते हैं, 'हम सीखते हैं कि लोग हमें किस तरह से देखना चाहते हैं। लोकिन ये बहुत मुश्किल होता है क्योंकि दुनिया में अलग- अलग तरह के लोग हैं। तो आप किसी एक चीज से सभी को कैसे खुश कर सकते हैं। फिर आपको खुद को भी खुश करना होता है। ये बहतु ट्रिकी है। 

इंडिया में हैं डिफरेंट पैलेट

हर्षवर्धन आगे कहते हैं कि इंडिया में कई सारे इंडिया हैं। नॉर्थ और साउथ के लोगों की खाने और फिल्मों की च्वॉइस डिफरेंट होती हैं। मैं सबको कैसे खुश रख सकता हूं। मुझे लगता है कि पहले मुझे खुद को खुश रखना चाहिए और जो काम मैं कर रहा हूं, उस पर विश्वास करना चाहिए। अगर हमारा किया हुआ काम अच्छा है और सच्चे दिल से किया गया है तो डेफिनेटली हम रात में चैन की नींद सो पाते हैं। जब हम कुछ नया करते हैं और वो चल जाता है तो वो केस स्टडी बन जाता है। दूर से दिखने वाली चीजें अच्छी जरूर लगती हैं लेकिन उनके बारे में हम तब तक नहीं जानते जब तक उन्हें ट्राय नहीं करते। कम से कम मैं वो काम तो कर रहा हूं जो मुझे अच्छा लगता है।' 

हर्षवर्धन जल्द ही अभिनव बिंद्रा की बायोपिक में नजर आएंगे और वह इसे लेकर बेहद एक्साइटेड भी हैं। वो कहते हैं, 'मेरा सबसे बड़ा चैलेंज ये है कि मैं इस स्टोरी को पूरी सच्चाई के साथ स्क्रीन पर पोट्र्रे कर सकूं।' 

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