हेल्थ विभाग की रडार पर 141 निजी डॉक्टर्स अब होगी कार्रवाई

2019-05-03T06:00:07+05:30

-प्रैक्टिस के लालच में चेस्ट फिजिशियन व मेडिसिन डॉक्टर टीबी रोगियों से कर रहे खिलवाड़

-मरीजों का ब्यौरा छुपाने और भारत सरकार के नोटिफिकेशन उलंघन का आरोप

- ब्यौरा नहीं देने वाले डॉक्टर्स पर हो सकती है कार्रवाई

GORAKHPUR: प्राइवेट प्रैक्टिस के लालच में चेस्ट फिजिशियन व एमडी मेडिसिन डॉक्टर टीबी रोगियों से खिलवाड़ कर रहे हैं। प्राइवेट में इलाज करा रहे मरीजों का ब्यौरा छुपाने और भारत सरकार के नोटिफिकेशन उल्लंघन करने वाले करीब 141 निजी डॉक्टर्स पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। जिला क्षय रोग विभाग इन डॉक्टर्स पर कार्रवाई का मन बना चुका है। बार-बार कहने के बाद भी ये डॉक्टर टीबी रोगियों का डेटा नहीं दे रहे हैं। इनके खिलाफ आईपीसी की धारा 269/270 के तहत एफआईआर दर्ज करवाने का प्रावधान है। जिला क्षय रोग विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में कुल 193 डॉक्टर्स हैं जो टीबी रोगियों का इलाज करते हैं। इनमें से सिर्फ 52 प्राइवेट डॉक्टर ही रोगियों का ब्यौरा स्वास्थ्य विभाग को दे रहे बाकि डॉक्टर्स इसे छुपा रहे हैं।

निश्चय पोर्टल पर डाटा करे फीड

2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने की घोषणा की गई है। ऐसे में प्राइवेट सेक्टर व सरकारी सेक्टर के सभी टीबी रोगियों का डाटा सेंट्रल पोर्टल निश्चय पर फीड हो रहा है। प्रत्येक रोगियों को सरकार 500 रुपए प्रति माह पोषण भत्ता और फ्री इलाज मुहैया करा रही है। इसके लिए 2018 में भारत सरकार ने अनिवार्य टीबी नोटिफिकेशन जारी किया था।

मरीजों की जिंदगी से कर रहे खिलवाड़

शहर में प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले 193 चेस्ट फिजिशियन व एमडी मेडिसिन ने टीबी रोगियों को पोर्टल पर रजिस्टर्ड किया। परंतु 2018-19 की समीक्षा में 52 डॉक्टर्स ने ही प्राइवेट रोगियों का ब्यौरा भेजा। इनमें कई प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर्स ऐसे हैं जो पैसा कमाने के लालच में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे है। उनका ब्यौरा राष्ट्रीय पोर्टल पर फीड नहीं करवा रहे। क्योंकि पोर्टल पर फीड होने के बाद मरीज अगर प्राइवेट इलाज छोड़ भी देता है तो उसे सरकार फ्री इलाज देगी। साथ ही उनकी निगरानी की जा सकेगी।

डाटा छुपाने वालों पर होगी कार्रवाई

जिला क्षय रोग विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक गोरखपुर जिले में 141 ऐसे प्राइवेट डॉक्टर्स हैं जो अभी तक हेल्थ विभाग को मरीजों का ब्यौरा नहीं उपलब्ध करा पाए हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए जिला क्षय रोग विभाग ऐसे डॉक्टर्स के खिलाफ कार्रवाई का मन बना लिया है।

ये भी नहीं देते सूचना

गोरखपुर जिले में करीब 2460 मेडिकल स्टोर्स हैं जो रोगियों को टीबी की दवा उपलब्ध कराते हैं। उन्हें भी एच-1 साइड पर ड्रग विभाग को प्रॉपर सूचना देना अनिवार्य है लेकिन वर्तमान में 19 ही डाटा दे रहे हैं। अदर मेडिकल सेंटर अपना ब्यौरा नहीं दे रहे हैं। जिला क्षय रोग नियंत्रण अधिकारी ने बताया कि ड्रग विभाग की ओर से हर सात तारीख को इसकी सूचना देनी होती है कि कितनी टीबी दवाओं की बिक्री हुई है। जबकि ड्रग विभाग और दवा विक्रेता संघ के अध्यक्ष के साथ मीटिंग कर सभी बिन्दुओं पर चर्चा हुई थी बावजूद इसके सूचना नहीं दी जाती है।

वर्ष रजिस्टर्ड टीबी रोग

2018 2393

2019 अब तक 326

कुल टीबी रोगी की संख्या--5689

एक्सडीआर रोग---27

एमडीआर---326

कुल मरीज रजिस्टर्ड हुए निश्चय पर--2393

टीगी रोगियों के इलाज के लिए रजिस्टर्ड डॉक्टर--193

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वर्जन

प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर्स टीबी रोगियों का इलाज करते हैं उन्हें हर हाल में निश्चय पोर्टल पर रोगियों का नोटिफिकेशन करना अनिवार्य है। ऐसा न करने वाले डॉक्टर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

डॉ। रामेश्वर मिश्रा, जिला क्षय रोग नियंत्रण अधिकारी

inextlive from Gorakhpur News Desk


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