इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में अपराध मुक्त माहौल बनाने के प्रयासों से हाई कोर्ट संतुष्ट नहीं

2019-05-18T06:00:44+05:30

विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन से जरूरी कदम उठाने को कहा

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पीसीबी हॉस्टल में पूर्व छात्र रोहित शुक्ला की हत्या के बाद इलाहाबाद यूनिवर्सिटी प्रिमाइस में सिक्योरिटी अरेंजमेंट्स को स्ट्रांग करने के तमाम जतन यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन और डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन ने पुलिस के साथ मिलकर किये हैं लेकिन यह नाकाफी है। इलाहाबाद हाई कोर्ट इससे संतुष्ट नहीं है। कोर्ट ने फ्राइडे को हियरिंग के दौरान यूनिवर्सिटी कैंपस को अपराधमुक्त कर शैक्षिक वातावरण कायम रखने के अब तक के प्रयासों को पर्याप्त नही माना और विश्वविद्यालय व जिला प्रशासन को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए है। कोर्ट ने 5 जुलाई को उठाये गये कदमो की रिपोर्ट मांगी है।

जनहित याचिका पर चल रही सुनवाई

यह आदेश चीफ जस्टिस गोविन्द माथुर तथा जस्टिस एसएस शमशेरी की खंडपीठ ने विश्वविद्यालय हॉस्टल में छात्र की हत्या को लेकर कायम जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। अपर महाधिवक्ता नीरज त्रिपाठी व एजीए मुर्तजा अली ने कोर्ट को बताया कि 13 हास्टलों के 407 कमरे ख़ाली करा लिए गए है। उन्हें सील कर विश्वविद्यालय ने अपने कब्जे में ले लिया है। छात्र की हत्या के 6 आरोपियों में से 4 की गिरफ्तारी हो चुकी है। शेष की गिरफ्तारी के प्रयास किये जा रहे है। कोर्ट ने कहा है कि विश्वविद्यालय में छात्रों अध्यापको व स्टॉफ की सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन सहयोग दे। साथ ही शहर की कानून व्यवस्था व अपराधों पर नियंत्रण की जानकारी दे। कोर्ट ने कुलसचिव एनके शुक्ल की हाजिरी माफ कर दी है और लिंगदोह कमेटी की रिपोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है।

inextlive from Allahabad News Desk


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