डॉक्टरों के निजी प्रैक्टिस पर कसें लगाम 10 तक चाहिए जवाब

2019-05-19T06:00:37+05:30

RANCHI द्ब: रिम्स के डॉक्टरों के निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाएं और 10 जून तक मामले से संबंधित रिपोर्ट सरकार अदालत में पेश करे। यह मौखिक आदेश शनिवार को झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत ने दिया है। मौके पर झारखंड के हेल्थ सेक्रेटरी नितिन मदन कुलकर्णी, रिम्स के इंचार्ज निदेशक आरके श्रीवास्तव, रिम्स अधीक्षक विवेक कश्यप सहित अन्य डॉक्टर्स अदालत में मौजूद थे। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि रिम्स के डॉक्टर्स निजी प्रैक्टिस करते हैं। मात्र दो घंटे सेवा देने के बाद अपने निजी अस्पताल या क्लिनिक चले जाते हैं। रिम्स के इसी हालात की वजह से राजधानी में निजी नर्सिग होम्स की संख्या बढ़ गई है। ऐसे में धनी व्यक्ति तो निजी व महंगे अस्पतालों में इलाज करा लेता है, लेकिन गरीब तो रिम्स पर ही निर्भर हैं। अदालत ने कहा कि जान बचाना भगवान के हाथ में है, लेकिन बेहतर इलाज तो डॉक्टर कर ही सकते हैं। अदालत ने स्वास्थ्य सचिव से कहा कि निजी प्रैक्टिस के मामले में डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।

क्या है मामला

दरअसल, लातेहार की एक गैंगरेप विक्टिम महिला का बिना इलाज किए ही डिस्चार्ज किए जाने के मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई हो रही थी। इस पर अदालत ने स्वास्थ्य सचिव को मामले की जांच कराने का निर्देश दिया कि किन परिस्थितियों में पीडि़ता को बिना ठीक हुए ही रिम्स से डिस्चार्ज कर दिया गया। अदालत ने पीडि़ता के बेहतर इलाज की व्यवस्था करने का निर्देश देते हुए कहा कि अगर उसे रिम्स से बाहर इलाज की जरूरत पड़े तो सरकार इस पर तुरंत निर्णय ले। मालूम हो कि पीडि़ता लातेहार की रहने वाली है। फिलहाल उसका इलाज रिम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग में चल रहा है। वहीं, शनिवार को सुनवाई के दौरान पीडि़ता की ओर से अदालत को बताया गया कि रिम्स के डॉक्टरों ने उसे यह कहते हुए डिस्चार्ज कर दिया कि वो ठीक हो गई है। जबकि डिस्चार्ज के समय उसकी पीठ में घाव (बेडसोर) था। लातेहार पहुंचने पर उसकी स्थिति खराब होने लगी। इसके बाद परिजनों ने लातेहार सदर अस्पताल में भर्ती कराया। जहां से फिर से उन्हें रिम्स रेफर कर दिया गया। अभी महिला की हालत बहुत नाजुक है। जानकारी के अनुसार पीडि़ता कोमा में है। इसके बाद अदालत ने स्वास्थ्य सचिव व रिम्स निदेशक को तलब करते हुए मामले की सुनवाई दिन के पौने एक बजे निर्धारित की थी। बता दें कि इस संबंध में पीडि़ता के पति की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। जिसमें पीडि़ता के बेहतर इलाज की गुहार लगाई गई है।

डॉक्टरों के निजी प्रैक्टिस की जांच को दल गठित

सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य सचिव ने अदालत को बताया कि रिम्स में पीडि़ता के इलाज की समुचित व्यवस्था की गई है जिसे और बेहतर किया जाएगा। अगर बाहर इलाज की आवश्यकता महसूस हुई तो इस पर सरकार तत्काल निर्णय लेगी। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता अजीत कुमार ने अदालत को बताया कि निजी प्रैक्टिस की रोकथाम के लिए जांच दल बनाया गया है और शिकायत पर कार्रवाई भी की जाती है।

स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की टीम करेगी इलाज

सुनवाई के बाद महाधिवक्ता अजीत कुमार ने अपने कार्यालय में स्वास्थ्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी, रिम्स के इंचार्ज निदेशक आरके श्रीवास्तव, रिम्स अधीक्षक विवेक कश्यप, डॉ। सीवी सहाय, डॉ। संजय कुमार के साथ बैठक की। इसमें पीडि़ता के इलाज के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों का एक दल बनाने पर निर्णय लिया गया, ताकि पीडि़ता के स्वास्थ्य की जांच सही तरीके से की जा सके। बैठक के बाद महाधिवक्ता ने निर्देश जारी कर स्वास्थ्य सचिव से आग्रह किया कि इसकी जांच कराई जाए कि किन परिस्थितियों में रिम्स से पीडि़ता को रिलीज किया गया। छुट्टी देते समय क्या वास्तव में उनका स्वास्थ्य ठीक था।

inextlive from Ranchi News Desk


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