120 साल के उतारचढ़ाव का गवाह है ये नीम का पेड़

2019-04-26T06:00:51+05:30

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PRAYAGRAJ: ऐसा नहीं है कि इतिहास के गवाह सिर्फ दस्तावेज ही होते हैं। कुछ ऐसे दरख्त भी हैं, जिन्होंने इतिहास के पन्नों को खुद में समेट रखा है। एजी ऑफिस में स्थित ऐतिहासिक नीम का पेड़ एक ऐसा ही दरख्त है। यह पेड़ 120 साल के गुजरते वक्त का गवाह है। एजी आफिस की पुरानी बिल्डिंग में स्थित ऐतिहासिक नीम के पेड़ ने इस बिल्डिंग के इलाहाबाद हाईकोर्ट से एजी ऑफिस बनने तक के सफर को करीब से देखा है।

1862 में आगरा से शिफ्ट हुआ था एजी ऑफिस

एजी ऑफिस के कर्मचारी नेता सुनील कुमार पांडेय बताते हैं कि एजी ऑफिस 1862 में आगरा से इलाहाबाद शिफ्ट हुआ था। ये नीम का पेड़ उसके पहले का है। उस समय सभी पत्रावली आगरा से नाव के जरिए इलाहाबाद भेजी गई थी। तब दो स्टेट हुआ करते थे। अवध और आगरा। दोनों स्टेट एक होने के बाद ही प्रदेश का नाम यूपी यानी यूनाइटेड प्रोविंशियल रखा गया। जो आगे चलकर उत्तर प्रदेश हो गया।

कई बदलाव का गवाह

यह नीम का पेड़ एजी ऑफिस में हुए कई बदलाव का गवाह रहा है। देश के पहले एसोसिएशन सिविल एकाउंट ब्रदरहुड की स्थापना एजी ऑफिस में इसी पेड़ की छांव में 1951-52 में बीच में हुई थी। 1962 में एसोसिएशन के पहले अध्यक्ष लक्ष्मीकांत तिवारी और महामंत्री जीसी बनर्जी रहे। दोनों ही पदाधिकारियों ने इसी पेड़ के नीचे अपनी पहली स्पीच दी थी। इसके बाद एसोसिएशन को आगे बढ़ाने वाले पूर्व अध्यक्ष केएस दूबे और कृपाशंकर श्रीवास्तव की 1962-63 में ज्वाइनिंग का गवाह भी यही नीम का पेड़ रहा।

बंटवारे का भी गवाह

1984 में एजी ऑफिस में अकाउंट और ऑडिट का बंटवारा हो गया। उसके पहले तक एजी ऑफिस में तीन एजी के पद थे। बंटवारे के बाद ही सत्यनिष्ठा भवन का गठन हुआ और एजी के पदों की संख्या भी बढ़कर चार हो गई। इसका भी गवाह यह पेड़ रहा है। 2001 में यूपी और उत्तराखंड के बंटवारे का गवाह भी यह ऐतिहासिक पेड़ रहा है। उस समय कर्मचारियों के उत्तराखंड जाने के फरमान की गवाही भी पेड़ देता है। तब 450 कर्मचारियों को उत्तराखंड भेजा गया था। एजी आफिस के वरिष्ठ कर्मचारी नेता सुनील कुमार पांडेय बताते है कि एजी आफिस के पहले यहां पर इलाहाबाद हाईकोर्ट हुआ करता था। उस समय एजी ऑफिस की पुरानी बिल्डिंग, पीएचक्यू, शिक्षा निदेशालय और बोर्ड ऑफ रेवेन्यू को मिलकर हाईकोर्ट का संचालन किया जाता था। सभी बिल्डिंग के बीच आपस में कनेक्टिविटी के लिए इंटरनल सुरंग थी। आज भी इन सुरंग के सबूत पीएचक्यू व निदेशालय और बोर्ड ऑफ रेवेन्यू में मौजूद हैं।

inextlive from Allahabad News Desk


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