ऐसे होती है बैकिंग डाटा की चोरी फिर खाली हो जाता है आपका अकाउंट जानिए और बचिए

2018-10-22T02:44:32+05:30

कानपुर। एटीएम, ऑनलाइन बैकिंग और वॉलेट से होने वाले साइबर फ्रॉड या हैकिंग के मामले दिन पर दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। ऐसे में अगर आाप इन महत्‍वपूर्ण टिप्‍स को फॉलो करेंगे तो आपके पैसे हमेशा ही सुरक्षित रहेंगे।

एटीएम से पैसा निकालना : कई बार ठग एटीएम में छिपे हुए कैमरे लगा देते हैं, जिसके जरिए पिन नंबर आदि चुरा लेते हैं। इसके अलावा, कई बार वे एटीएम को जाम भी कर देते हैं। इससे कस्टमर पिन और दूसरी डिटेल्स तो डाल देता है, लेकिन पैसे नहीं निकल पाता। इसके बाद जब कस्‍टमर चला जाता हैं, तो धोखेबाज बाद में आकर आपके अकाउंट से पैसे निकालकर ले जाते हैं।

फर्जी माइक्रो एटीएम इंस्टॉल करके भी कार्ड डिटेल हासिल की जा सकती है और बाद में उसका इस्तेमाल करके फ्रॉड किया जा सकता है।

पीओएस मशीनें : अनअथॉराइज्ड पीओएस डिवाइसेज क्रेडिट और डेबिट कार्ड को स्वाइप करते समय उनकी डिटेल्स की कॉपी कर सकते हैं। इन डिवाइसेज पर आपके कार्ड के समान जाली कार्ड बनाया जा सकता है।

डिजिटल वॉलेट : ऑनलाइन वॉलेट्स साइबर अपराधियों के लिए आसान टारगेट होते हैं। वॉलेट ट्रांजैक्शन अक्सर कम अमाउंट की होती है और इस वजह से बहुत से वॉलेट्स एडवांस्ड सिक्योरिटी सिस्टम का इस्तेमाल नहीं करते और ऐसे में साइबर अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

कई वॉलेट वाले एप्स अपने यूजर्स को उनके वॉलेट एकाउंट्स में साइन-इन रखते हैं और इससे हैकर्स के लिए धोखाधड़ी करने में आसानी होती है।

फिशिंग से रहें एलर्ट :
फिशिंग ऐसी ईमेल है जो आपको फंसाने के लिए भेजी जाती है। यह बैंक या किसी शॉपिंग वेबसाइट या बड़े कारोबारी संस्थान से भेजी हुई प्रतीत होती है। इनके माध्यम से आपकी व्यक्तिगत जानकारी मांगने की कोशिश की जाती है। इस लिंक पर क्लिक करते ही नकली वेबसाइट खुल जाती है। जैसे ही आप अपना यूजर आइडी और पासवर्ड दर्ज करते हैं, आपका मोबाइल नंबर, लॉग-इन आइडी, पासवर्ड, डेबिट/क्रेडिट कार्ड संबंधी जानकारी, सीवीवी, जन्म दिन आदि की डीटेल चोरी की जा सकती है।

अगर मोबाइल से करते हैं बैंकिंग - अगर आप मोबाइल से बैंकिंग करते हैं तो पासवर्ड मैनेजर एप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो अलग-अलग पासवर्ड सहेजने के लिए खास तरह के मास्‍टर पासवर्ड का इस्‍तेमाल करते हैं, जो काफी सिक्‍योर होता है।

- डिजिटल वॉलेट और नेटबैंकिंग के लिए एक ही तरह के और आसान पासवर्ड का इस्तेमाल न करें। ट्रांजैक्शन पूरा होने के बाद डिजिटल वॉलेट से हमेशा लॉगआउट कर जाएं।

- विज्ञापनों के दौरान पॉप-अप होने वाले थर्ड पार्टी एप्स को फोन पर इंस्टॉल न करें। डिवाइस चोरी होने की स्थिति में दूर बैठे डाटा डिलीट करने के लिए अपने मोबाइल पर फोन ट्रैकिंग एक्टिवेट करें। इसके लिए आप गूगल Find your phone सर्विस या फिर अच्‍छे एंटी वायरस ऐप का यूज कर सकते हैं।

छोटी बातें, बड़े फायदे - एटीएम का पिन नियमित रूप से बदलते रहें। साथ ही, अपना पिन किसी से भी शेयर न करें। यदि कोई व्‍यक्ति बैंक कर्मचारी बनकर आपके डेबिट या क्रेडिट कार्ड का नंबर, सीवीवी, पिन, ओटीपी या अंतिम तिथि आदि के बारे में जानकारी मांगे, तो उससे ऐसी कोई जानकारी हरगिज शेयर न करें। इसके अलावा अपने बैंक या RBI को फौरन सूचना दें।

- कभी भी अपना कार्ड और पिन नंबर साथ में न रखें और न ही कार्ड पर अपना पिन लिखें। कार्ड पर मोबाइल अलर्ट एक्टिव करके रखें। अगर कार्ड खो जाए, तो तुरंत बैंक को सूचित करें।

- मशीन में स्‍वाइप करने के लिए कार्ड कभी भी किसी और के हाथों में न दें। खुद ही स्वाइप करें। मोबाइल में कार्ड की फोटो खींचकर न रखें।

- यदि बैंकिंग के लिए अपने फोन में कोई मोबाइल एप इस्‍तेमाल कर रहे हैं, तो उसे अच्‍छे एंटीवायरस से सुरक्षित कर लें। कभी भी स्‍पैम सॉफ्टवेयर एप इंस्‍टॉल न करें। कार्य पूरा हो जाने के बाद लॉगआउट कर दें।

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