हाईवे किनारे की जमीन सस्ती करने की होगी कवायद

2018-11-17T06:01:12+05:30

- एनएचएआई के साथ बैठक में सामने आया सच

- बाजार दर से ज्यादा महंगी हैं हाई वे की जमीनें

LUCKNOW : राष्ट्रीय राजमार्गो के किनारे की कृषि योग्य भूमि की बढ़ी दरें राज्य सरकार के लिए चिंता का सबब बन गयी है लिहाजा इसमें बदलाव की कवायद शुरू कर दी गयी है। प्रमुख सचिव स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन हिमांशु कुमार ने इस बाबत सभी जिलों के डीएम को आदेश जारी किया है जिसमें कहा गया है कि वे इसका पुनरीक्षण करें। साथ ही जल्द घोषित होने वाले सर्किल रेट में इन भूमियों की दरें इस तरह निर्धारित की जाए जो इनके वास्तविक मूल्य को दर्शाती हों.

एनएचएआई ने उठाया मुद्दा

दरअसल यह मुद्दा एनएचएआई के साथ ही बैठक में उठाया गया था। एनएचएआई के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में स्थित राष्ट्रीय राजमार्गो से संलग्न कृषि भूमियों की दरों में विगत कई वर्षो से की गयी वृद्धि से यह अव्यवहारिक हो गयी है। यह बाजार दर से भी ज्यादा हो चुकी है। इसकी वजह से एनएचएआई को राष्ट्रीय राजमार्गो को चौड़ा करने के लिए भूमि प्राप्त करने को अत्याधिक व्यय करना पड़ रहा है। इससे परियोजनाओं की लागत भी खासी वृद्धि हो रही है। साथ ही स्टांप शुल्क भी ज्यादा देना पड़ रहा है। इसे ध्यान में रखकर प्रमुख सचिव ने सभी जिलों के डीएम को भेजे आदेश में कहा कि अचल संपत्तियों की दरों में पुनरीक्षण का तात्पर्य केवल उनमें वृद्धि करना नहीं है बल्कि जहां वे प्रचलित दर से अधिक हैं, कम करना भी है। लिहाजा वे सर्किट रेट घोषित करने से पहले इसमें संशोधन कराएं। उन्होंने इस आदेश को सख्ती से लागू करने के निर्देश भी दिए हैं।

inextlive from Lucknow News Desk


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