ICC World Cup 2019 कहानी 1983 विश्व कप की इन 10 गेंदों के चलते भारत पहली बार बना था चैंपियन

2019-05-18T11:39:52+05:30

आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप 2019 की शुरुआत 30 मई से हो रही। ये वर्ल्ड कप का 12वां एडीशन है। आइए जानें 1983 में खेले गए तीसरे वर्ल्ड कप की कहानी जिसमें कपिल देव की कप्तानी में भारत पहली बार बना था चैंपियन

कानपुर। क्रिकेट के सबसे बड़े टूर्नामेंट वर्ल्ड कप का तीसरा एडीशन साल 1983 में खेला गया था। पहले की तरह इस विश्व कप को भी 'प्रुडेंशियल कप' का नाम दिया गया। जिसमें आठ टीमों ने हिस्सा लिया। जिसमें इंग्लैंड, पाकिस्तान, न्यूजीलैंड, श्रीलंका, वेस्टइंडीज, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जिंबाब्वे की टीमें शामिल थीं।

कहां हुआ था आयोजन

वर्ल्ड के शुरुआती दो सीजन की तरह तीसरे विश्व कप का आयोजन भी इंग्लैंड ने किया था। टूर्नामेंट के सारे मैच इंग्लैंड के मैदानों में आयोजित किए गए। फाइनल मुकाबला लार्ड्स में खेला गया।
60-60 ओवर का था मैच
जिस वक्त पहला वर्ल्ड कप खेला गया। तब वनडे क्रिकेट 60-60 ओवर का हुआ करता था। 1983 वर्ल्ड कप में भी सभी टीमों के बीच 60-60 ओवर के मैच खेले गए।

दो ग्रुप में बांटा गया टीमों को

इस वर्ल्ड कप में सभी टीमों को दो ग्रुप में बांटा गया। पहले ग्रुप में इंग्लैंड, पाकिस्तान, न्यूजीलैंड और श्रीलंका की टीमें थीं। वहीं ग्रुप बी में वेस्टइंडीज, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जिंबाब्वे को रखा गया।

कैसे तय हुईं फाइनल टीमें

ये टूर्नामेंट डबल राउंड रोबिन और नाॅकआउट के आधार पर खेला गया। दो ग्रुप में चार-चार टीमें थीं और ग्रुप की एक टीम को बाकी तीन टीमों के साथ दो-दो बार मैच खेलने पड़े। ग्रुप में टाॅप 2 टीमों के बीच सेमीफाइनल खेला गया। जिसमें जीतने वाली टीमें फाइनल में भिड़ीं।
कपिल की कप्तानी में भारत ने सबको चौंकाया
1983 वर्ल्ड कप सबसे चर्चित विश्व कप में एक माना जाता है। इसकी वजह थी भारत का प्रदर्शन। उस वक्त टीम इंडिया को कोई भी वर्ल्ड कप का दावेदार नहीं मान रहा था। यहां तक कि भारतीय टीम के कुछ सदस्यों को भी अपनी जीत की उम्मीद नहीं थी। मगर एक बार टूर्नामेंट शुरु हुआ तो ग्रुप मैचों में भारत ने वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया जैसी दिग्गज टीमों को पटखनी दी। भारत ने ग्रुप में 6 मैचों में 4 में जीत दर्जकर सेमीफाइनल में जगह बनाई जहां इंग्लैंड को 6 विकेट से हराकर पहली बार फाइनल का टिकट कटाया।

#OnThisDay in 1983, India won the @cricketworldcup!
🇮🇳🏆 pic.twitter.com/sksXdNeghT

— Cricket World Cup (@cricketworldcup) June 25, 2018


फाइनल में भारत ने बनाए 183 रन
1983 विश्व कप फाइनल में भारतीय टीम वेस्टइंडीज की एक ऐसी टीम के सामने थी जो उस समय की सबसे मजबूत टीम मानी जाती थी। इंग्लैंड के प्रतिष्ठित मैदान लॉर्ड्स पर हुए इस खिताबी मुकाबले में वेस्टइंडीज ने टॉस जीतकर पहले फील्डिंग करने का फैसला किया था। पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम से एक बड़े स्कोर की उम्मीद थी लेकिन 54.4 ओवर में पूरी टीम 183 के स्कोर पर ही सिमट गई। वेस्टइंडीज के दिग्गज गेंदबाज एंडी रॉबर्ट्स ने 3 विकेट, माइकल होल्डिंग, मार्शल और गोम्स ने 2-2 और जोल गार्नर ने एक विकेट लेकर पूरे भारतीय बल्लेबाजी क्रम को ढेर कर दिया था। ओपनर क्रिस श्रीकांत ने सर्वाधिक 38 रन बनाए थे।

वेस्टइंडीज को ऑलआउट करने के लिए जरूरत थी सिर्फ 10 गेंदों की

खिताबी मुकाबले में वेस्टइंडीज जैसी टीम के सामने लो स्कोर बनाकर टीम इंडिया मैच तो नहीं जीतने वाली थी। ऐसे में भारत को जरूरत थी उन 10 गेंदों की जिस पर 10 कैरेबियाई बल्लेबाजों को आउट किया जा सके। भारतीय गेंदबाजों ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पूरे दिग्गज कैरेबियाई बल्लेबाजी क्रम को 52 ओवर में 140 के स्कोर पर ही समेट दिया।
43 रन से जीता भारत
भारत की तरफ से फाइनल मुकाबले में सबसे ज्यादा 3-3 विकेट मदन लाल और मोहिंदर अमरनाथ ने लिए। इसके अलावा बी संधू ने दो विकेट चटकाए। वहीं कपिल देव और रोजर बिन्नी को एक-एक विकेट मिला। इसी के साथ भारत ने 43 रन से मैच जीत लिया और पहली बार विश्व चैंपियन बने।
जीतने वाली टीम को मिले इतने रुपये
भारत को वर्ल्ड कप जीतने पर करीब 17 लाख रुपये दिए गए। वहीं रनर अप वेस्टइंडीज को 7 लाख रुपये मिले थे। इसके अलावा सेमीफाइनल में हारने वाली टीमों पाकिस्तान और इंग्लैंड को 3.5 लाख रुपये मिले।
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किसने बनाए सबसे ज्यादा रन
1983 वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज इंग्लैंड के डेविड गोवर थे। गोवर के बल्ले से पूरे टूर्नामेंट में 384 रन निकले।
कौन बना हाईएस्ट विकेट टेकर
भारत के रोजर बिन्नी तीसरे वर्ल्ड कप में हाईएस्ट विकेट टेकर बने। बिन्नी ने इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 18 विकेट चटकाए।

 


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