वॉशआउट की पृष्ठभूमि फिर तैयार!

2019-04-18T06:00:45+05:30

हाई कोर्ट के सख्त आदेश पर 2012 में पड़ी रेड, 2017 में पहली बार था ऑपरेशन वॉशआउट

रोहित हत्याकांड पर हाई कोर्ट के रुख से बढ़ी संभावना, पुलिस कार्रवाई से मिले संकेत

vikash.gupta@inext.co.in

PRAYAGRAJ: इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के पीसीबी हॉस्टल में रोहित शुक्ला हत्याकांड के बाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए स्वत: संज्ञान लिया है। मामले पर कोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए एक बार फिर गर्मी की छुट्टियों में हास्टल वॉशआउट के आसार बन गये हैं। अभी यूनिवर्सिटी में वार्षिक और सेमेस्टर परीक्षाएं चल रही हैं। इससे तत्काल वॉशआउट की संभावना कम है। लेकिन, चूंकि जवाब के साथ रजिस्ट्रार, एसएसपी, डीएम और स्टेट गवर्नमेंट को कोर्ट में खड़ा होना है तो संभव है कि वैध छात्रों को किसी एक हॉस्टल में शिफ्ट करके इस कार्रवाई को अंजाम दे दिया जाय।

2012: एसपी ने फोर्स देने से कर दिया था इंकार

साल 2012 के अंत में तत्कालीन चीफ प्रॉक्टर प्रो। मातांबर तिवारी के कार्यकाल में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हॉस्टल में रेड का आदेश दिया था। तब एसपी सिटी शैलेश यादव थे। कार्रवाई की शुरुआत जीएन झा हॉस्टल से होनी थी। हॉस्टल में रेड के पहले ही दिन जीएन झा हॉस्टल के एक अन्त:वासी ने उस समय के प्रमुख सचिव गृह उत्तर प्रदेश शासन से दबाव डलवाकर कार्रवाई रुकवा दिया था। तब एसपी शैलेश यादव ने सुबह कार्रवाई के लिए फोर्स देने से इंकार कर दिया। शाम होते-होते विवि प्रशासन के क्लीयर स्टैंड के बाद अगले दिन पूरा पुलिस महकमा और प्रशासन के अधिकारी इविवि के बाहर खड़े दिखे थे।

2017: 10 जुलाई तक हॉस्टल देने का वादा नहीं कर सके थे पूरा

साल 2017 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद हॉस्टल वॉशआउट का निर्णय लिया गया। दो समर हॉस्टल बनाए गए ताकि जरूरतमंद छात्रों की तैयारी बाधित न हो। इसके बाद एक-एक करके हॉस्टल वॉशआउट किया गया। तब कोर्ट में हलफनामा दाखिल करके विवि प्रशासन ने कहा था कि वह 10 जुलाई तक सभी को हॉस्टल एलॉट कर देगा। लेकिन, समय बीत गया और इस पर अमल नहीं हुआ।

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वार्डेन और सुपरिटेंडेंट के हाथ से निकल गया हॉस्टल

इविवि के डीएसडब्ल्यू प्रो। हर्ष कुमार पीसीबी हॉस्टल के वार्डन भी हैं। उनके डीएसडब्ल्यू और वार्डन के पद पर रहते पीसीबी हॉस्टल में पहले अच्युतानंद शुक्ला और अब रोहित शुक्ला हत्याकांड को अंजाम दे दिया गया। इससे इविवि के हॉस्टल्स पर वार्डेन और सुपरिटेंडेंट का नियंत्रण खत्म होने के संकेत भी मिलते हैं। बुधवार को यूनिवर्सिटी रोड पर हॉस्टल के बाहर चर्चा कर रहे कुछ अन्त:वासियों का कहना था कि कई अन्त:वासी अपने ही वार्डन और सुपरिटेंडेंट का चेहरा तक नहीं पहचानते क्योंकि वे यदा-कदा ही हॉस्टल आते हैं।

inextlive from Allahabad News Desk


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