डीजीपी की बात मानते तो शायद थम जाती लूट

2018-12-16T06:00:31+05:30

एटीएम, कैश वैन की लूट को लेकर किया था आगाह

खटारा वाहन में बिना गार्ड के रुपए ढोते रहे कर्मचारी

द्दह्रक्त्रन्य॥क्कक्त्र:

गीडा स्थित रेडियंट कंपनी के कर्मचारियों से कुशीनगर में एक करोड़ 73 लाख, 56 हजार 469 रुपए की लूट ने पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया है। पुलिस अपनी जांच में जहां कंपनी कर्मचारियों पर शक करते हुए बड़ी लापरवाही की बात कर रही है। वहीं, इस मामले में पुलिस भी कम जिम्मेदार नहीं है। बैंक, एटीएम और कैशवैन से बढ़ती लूट की घटनाओं को देखते हुए अप्रैल में डीजीपी हेडक्वार्टर ने प्रदेश की पुलिस को आगाह किया था। एडीजी क्राइम की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया था कि इन घटनाओं से राष्ट्र को आर्थिक नुकसान पहुंचता है। साथ ही पब्लिक में भय व्याप्त होता है। इसलिए सुरक्षा संबंधी उपायों का उपयोग किया जाना चाहिए। लेकिन हर बार की तरह यह निर्देश भी फाइलों में दबकर रह गए.

डीजीपी के सर्कुलर में ये था निर्देश

- बैंकों में दिन की ड्यूटी में एक सशस्त्र गार्ड रहता है। लेकिन रात में सुरक्षा के लिए कोई नहीं होता। गार्ड भी अपनी बंदूक स्ट्रांग रूम में रखकर जाते हैं। इससे बंदूक चोरी होने का भी खतरा रहता है.

- बैंक की बिल्डिंग, ग्रिल सहित अन्य चीजों को मजबूत लगाया जाए। ताकि कोई इनको तोड़कर आसानी से अंदर न घुस सके। बैंक का अलार्म हमेशा चालू हालत में होना चाहिए।

- बैंक में लगे सीसीटीवी कैमरों को हमेशा बैकअप देकर चालू रखा जाए। रात की सुरक्षा के लिए सेंसर लगाएं। ताकि इमरजेंसी में अलार्म बज सके.

- बैंक ब्रांच में आने वाले ग्राहकों को बिना आईकार्ड, पासबुक, चेकबुक, चालान बुक के अंदर न जाने दिया जाए। पुलिस प्रापर चेकिंग करते रहे। छुट्टी के दिन होने पर रात में पुलिस गश्त करके जांच करें.

- बैंक की लूट, डकैती, चोरी से संबंधित अपराधियों के जेल से रिहा होने पर उनकी गतिविधियों की निगरानी हो। अपने क्षेत्र में एसएचओ- एसओ बैंकों में मैनेजर से मिलें। गार्ड के असलहों को चेक करते हुए नए कारतूस उपलब्ध कराएं.

- बैंक के गार्ड के पास व्हीसिल जरूर हो। कैश वैन लेकर चलने वाले ड्राइवर और कर्मचारी भी अलर्ट रहें.

- कैश वैन लेकर जाने वाले वाहनों की नियमित जांच पड़ताल की जाए। सुरक्षा मानक के चूक होने पर दुरुस्त कराया जाए.

- बैंक की सुरक्षा में लगने वाले कर्मचारियों को ऐसी जगह पर तैनात किया जाए जिससे पूरे बैंक की निगरानी हो सके।

यह हुई थी घटना

0 दिसंबर को गीडा, गोरखपुर से एक करोड़ 73 लाख, 56 हजार 469 रुपए कलेक्ट कर कैश वैन से रेडियंट के दो कर्मचारी कप्तानगंज में जमा कराने जा रहे थे। रास्ते में फायरिंग कर बदमाशों ने नकदी लूट ली। कंपनियों कर्मचारियों की साजिश सहित कई अन्य बिंदुओं पर पुलिस जांच में जुटी है। छह दिनों के बाद पुलिस के हाथ कोई ऐसा सुराग नहीं लगा, जिससे बदमाशों तक पहुंचा जा सके। डीजीपी हेडक्वार्टर से रोजाना मानीटरिंग होने की वजह पुलिस अधिकारी टेंशन में आ गए हैं। घटना की जांच में बैंक के साथ- साथ पुलिस की भी कमियां नजर आई हैं।

क्या कमी आई सामने

- बैंकों की नियमित चेकिंग की जाती है। पुलिस कर्मचारी पहुंचते हैं। लेकिन कैश वैन को लेकर लापरवाही बरती जा रही है.

- रुपए ढोने वाली वैन की हालत ठीक नहीं होती। ज्यादातर वाहनों में सुरक्षा के मानकों का कोई ध्यान नहीं दिया जाता है.

- एजेंसी के कर्मचारी विभिन्न जगहों से रुपए कलेक्ट करके मनमानी तरीके से आवागमन करते हैं। सुरक्षा का ध्यान नहीं रखते।

- कैश का काम करने वाली एजेंसियां अपने कर्मचारियों का प्रापर पुलिस वेरीफिकेशन नहीं कराती। जुगाड़ से नौकरी दी जाती है.

- अधिक कैश होने पर लोकल पुलिस को कोई सूचना नहीं देते। भगवान भरोसे वैन लेकर दिनभर आवागमन होता रहता है।

- रुपए लेकर आवागमन करने वाले वैन की पुलिस जांच- पड़ताल नहीं करती। सुरक्षा को लेकर कर्मचारी गंभीर नहीं रहते.

inextlive from Gorakhpur News Desk


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