इन 5 चीजों से मिलकर बनता है पंचामृत सेवन करने से होते हैं 15 फायदे

2018-09-05T12:47:04+05:30

पांच तरह की विशेष चीजों को मिलाकर पंचामृत का निर्माण किया जाता है और वह चीजें हैं– दूध दही मधु शक्कर और घी।

क्या आपको पता है कि पूजा में पंचामृत क्यों अहम मानी जाती है? क्या है इसे ग्रहण करने के नियम व सावधानियां? दरअसल, पांच तरह की विशेष चीजों को मिलाकर पंचामृत का निर्माण किया जाता है और वह चीजें हैं – दूध, दही, मधु, शक्कर और घी। लोग अलग-अलग तरह से पंचामृत देवी देवताओं को जरूर अर्पित करते हैं और उसके निर्माण करने की परंपरा भी बहुत खास होती है। जान लें कि मुख्य रूप से श्री हरि की पूजा में पंचामृत का विशेष प्रयोग होता है। वहीं, बिना पंचामृत के श्री हरि या उनके किसी भी अवतारों की पूजा सफल नहीं हो सकती हैं। बता दें कि पंचामृत के विशेष प्रयोग से आपकी हर तरह की समस्याएं दूर हो सकती हैं।

ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीपति त्रिपाठी से जानते हैं कि पंचामृत के सेवन से क्या-क्या लाभ होते हैं:

1. दूध

• यह शरीर को पुष्ट करता है।

• शरीर के अन्दर मौजूद विष को दूर करता है।

• मन को शांत करके तनाव दूर करता है।

2. दही

• यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है।

• एकाग्रता को तो बेहतर करता है और सुख की वृद्धि भी करता है।

• त्वचा और चेहरे को कांतिवान बनाने में मदद करता है।

3. मधु (शहद)

• यह हमारी शरीर में मौजूद बढ़ी हुई चर्बी को हटाता है।

• आध्यात्म भाव को व साथ ही धर्म के प्रति झुकाव को मजबूत करता है।

• यही नहीं, परिवार के लोगों के साथ संबंध भी मजबूत करता है।

4. शक्कर


• ऊर्जा के स्तर को बनाये रखने में मदद करता है व आलस्य को कम करता है।

• वाणी को मधुर करता है और अनुशासित भी रखता है।

• आपकी नींद से जुड़ी समस्याएं को दूर करता है।

5. घी

• यह हमारे शरीर को बल और पुष्टि देता है।

• हड्डियों को मजबूत बनाये रखने में भी मदद करता है।

• यह नेत्र ज्योति को भी बनाये रखता हैं

पंचामृत का प्रयोग कैसे करें


• ध्यान रहे कि पंचामृत का निर्माण सूर्यास्त के पूर्व ही करना चाहिए।

• दूध के लिए गाय का दूध प्रयोग करना ज्यादा उत्तम माना जाता है।

• पंचामृत बन जाने के बाद उसमें तुलसी और गंगाजल भी अवश्य डालें।

• अगर शालिग्राम है तो उसे पंचामृत में स्नान कराना ना भूलें।

• अगर शालिग्राम नहीं है तो पंचामृत में एक चांदी का सिक्का डालें और भाव लें कि इसके माध्यम से श्री हरि को स्नान करा रहे हैं।

• अब भगवान श्री हरि को सच्चे मन से स्मरण करें और पंचामृत को ग्रहण करें।

पंचामृत ग्रहण करने के खास 3 नियम

• पंचामृत हमेशा दोनों हाथों से ही ग्रहण करें।

• पंचामृत को भूलकर भी भूमि पर न गिरने दें।

• पंचामृत को ग्रहण करने के बाद दोनों हाथों से शिखा को स्पर्श भी जरूर करें।

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