तिल द्वादशी 2019 तिल के दान का है विशेष महत्व जानें यमराज से जुड़ी कथा

2019-02-13T12:38:49+05:30

नारद पुराण के अनुसार भगवान विष्णु की प्रिय होने कारण श्वेत तिल को इस बात का अभिमान था। इस बात से नाराज होकर यमराज ने उसे शाप दे दिया। शापित होने के कारण तिल का रंग श्वेत से काला पड़ गया।

माघ कृष्ण द्वादशी को तिल द्वादशी भी कहा जाता है, जो इस वर्ष 17 फरवरी दिन रविवार को है। इस दिन प्रदोष व्रत (शुक्ल) का भी विशेष सहयोग रहेगा। इस दिन आयुषमान योग में सर्वाथ सिद्ध योग, सिद्ध योग, त्रिपुष्कर योग के साथ विशेष रूप से रवि पुष्प योग का भी शुभ रहेगा। इन दिन तिल के दान का विशेष महत्व होता है।

यमराज और तिल की कथा

नारद पुराण के अनुसार, भगवान विष्णु की प्रिय होने कारण श्वेत तिल को इस बात का अभिमान था। इस बात से नाराज होकर यमराज ने उसे शाप दे दिया। शापित होने के कारण तिल का रंग श्वेत से काला पड़ गया।

इससे दुखी तिल ने भगवान विष्णु की आराधना की, जिससे भगवान श्रीहरि प्रसन्न हुए और तिल को यमराज के शाप से मुक्त किया। इसे तिल फिर गौर वर्ण की हो गई।

भगवान श्रीहरि ने तिल को आर्शीवाद दिया कि खासतौर पर माघ मास में उनको जो भी व्यक्ति पूजा में तिल अर्पित करेगा, उसे वैकुण्ठ की प्राप्ति होगी। इसीलिए माघ कृष्ण द्वादशी को तिल दान करने का विशेष महत्व है।

भगवान विष्णु के आशीर्वाद से ​काला तिल यमराज की भी पसंद बन गई। इसलिए यमराज की पूजा में काला तिल अर्पित किया जाता है।

— ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट

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