सियासी जंग का नाटकीय अंत

2018-09-10T12:06:56+05:30

- रविवार रात से लापता अध्यक्ष पद का कैंडिडेट्स ने किया सपा का समर्थन

- सपा कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस कर दी समर्थन की जानकारी

- अपरहण की सूचना को जिलाध्यक्ष ने बताया राजनीति का हिस्सा

- चुनाव अधिकारी और चौकी प्रभारी को दी थी अपहरण की अप्लीकेशन

GORAKHPUR: गोरखपुर यूनिवर्सिटी में होने वाले छात्रसंघ चुनाव में राजनीति के कई रंग देखने को मिल रहे हैं। सुबह से दोपहर तक जिस कैंडिडेट्स के अपहरण की सूचना दी जा रही थी और जिस पर आरोप लगा रहा था लापता युवक ने शाम को उसी पार्टी के सपोर्ट का एलान कर दिया। बाकायदा जिलाध्यक्ष और प्रेसिडेंट कैंडिडेट्स के साथ ज्वाइंट प्रेस कांफ्रेंस कर उसने इस बात की जानकारी दी। वहीं, अपहरण की बात भी उसने एक सिरे से खारिज कर दी। इस तरह यूनिवर्सिटी में रविवार सुबह से चल रहे सियासी ड्रामे का शाम को जाकर नाटकीय अंत हो गया।

देर शाम से गायब होने की तहरीर

गोरखपुर यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव के लिए दावेदारी करने वाले इंद्रेश यादव के अपहरण की तहरीर यूनिवर्सिटी चौकी प्रभारी और चुनाव अधिकारी को दी गई। इसमें यह जिक्र किया गया कि समाजवादी छात्र सभा के मेंबर्स ने इंद्रेश का अपहरण कर लिया है और उसपर पर्चा वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। वहीं, शनिवार देर शाम 8 बजे से उसका मोबाइल भी स्विच ऑफ होने की बात कही गई। छात्र के समर्थकों का जमावड़ा यूनिवर्सिटी के बाहर पंत पार्क के सामने लगा रहा और वह कैंडिडेट्स को बुलाने की मांग करते रहे.

समर्थक का रो- रोकर बुरा हाल

यूनिवर्सिटी में पुलिस अधिकारियों को इंद्रेश के अपहरण की सूचना देने वाली एक समर्थक सुबह से ही परेशान दिखी। पहले उसने चौकी इंचार्ज और चुनाव अधिकारी को सूचना दी। इसके बाद उन्होंने लिखित तहरीर भी दी। सूचना के बाद एसओ कैंट मौके पर पहुंचे और वहां मौजूद छात्रों से जानकारी ली। काफी समय तक इंद्रेश का पता न चल पाने की वजह से उसने एसएसपी को फोन लगा दिया और एसओ की बात उनसे कराई। कुछ देर तक जब कोई हलचल नहीं हुई, तो उसने दोबारा एसएसपी को फोन घुमा दिया.

चुनाव अधिकारी के एलान के बाद वापस

एसएसपी को फोन पहुंचने के कुछ देर के बाद ही सीओ कैंट भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने छात्रों से जानकारी ली। इसके बाद चुनाव अधिकारी से बातचीत की और समर्थकों को अश्वस्त किया कि कोई भी जबरन पर्चा वापस नहीं करा सकेगा। दो बजे तक चुनाव कार्यालय के सामने काफी गहमा- गहमी रही। दो बजे तक पर्चा वापस होना था, लेकिन इस बीच कोई भी कैंडिडेट्स पर्चा वापस करने नहीं पहुंचा। करीब सवा दो बजे चुनाव अधिकारी प्रो। ओपी पांडेय ने बाहर आकर किसी भी कैंडिडेट के पर्चा न वापस लेने की बात का एलान किया, जिसके बाद छात्रों की भीड़ वहां से छटी.

अखिलेश से मिलने लखनऊ गया था इंद्रेश

समाजवादी पार्टी कार्यालय में जिला अध्यक्ष प्राह्लाद यादव प्रेस से रूबरू हुए। इस दौरान उन्होंने बताया कि गोरखपुर यूनिवर्सिटी के इलेक्शन में अध्यक्ष पद के इंडिपेंडेंट कैंडिडेट इंद्रेश यादव ने समाजवादी छात्रसभा की कैंडिडेट अनु प्रसाद को अपना समर्थन दे दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से लखनऊ में मुलाकात के बाद इंद्रेश ने फैसला किया। जिलाध्यक्ष ने बताया कि अन्नु के लिए इंद्रेश ने खुद को पीछे कर लिया। जिलाध्यक्ष ने बताया कि यूनिवर्सिटी में एबीवीपी बुरी तरह से हार रही है और वह यह बात अच्छी तरह जानते हैं। इसलिए उन्हें कोई दूसरा रास्ता नहीं सूझा तो हंगामा कराना शुरू कर दिया। समाजवादी छात्रसभा के कैंडिडेट का वोट भी कट रहा था, जिसकी वजह से इंद्रेश की मुलाकात पूर्व सीएम अखिलेश यादव से कराई गई, जिसके बाद इंद्रेश ने समाजवादी छात्रसभा के प्रत्याशी के समर्थन का फैसला किया है.

वर्जन

राजनीति में अगर आगे बढ़ना है तो ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं। मोबाइल लखनऊ जाते समय डिस्चार्ज हो गया था और चार्जर भी नहीं मिल रहा था, इसलिए किसी के संपर्क में नहीं था। जानकारी होने पर बात सीओ कैंट से बात हुई और उन्होंने बताया कि मैं अपनी स्वेच्छा से यहां आया हूं और मुझे जबरन नहीं लाया गया है। मैंने अन्नू प्रसाद को समर्थन दे दिया है.

- इंद्रेश यादव, छात्रनेता

inextlive from Gorakhpur News Desk


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