ओवल मैदान पर इसलिए हारा भारत 47 सालों से है यहां जीत का इंतजार

2018-09-12T09:25:19+05:30

भारत और इंग्लैंड के बीच ओवल मैदान पर खेले गए पांचवें और आखिरी टेस्ट में भारत को 118 रन से शिकस्त मिली। इसी के साथ भारत को इस सीरीज में 14 से हार भी झेलनी पड़ी। वैसे ओवल पर तमाम कोशिशों के बावजूद टीम इंडिया हार कैसे गई इसकी बड़ी वजह यह भी हो सकती है।

कानपुर। भारत बनाम इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टेस्ट सीरीज का पांचवां और आखिरी टेस्ट ओवल मैदान पर खेला गया। भारत को इस मैच में 118 रन से करारी शिकस्त मिली। आखिरी पारी में जीत के लिए मिले 464 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया ने शुरुआती विकेट तो जल्दी गंवा दिए थे। मगर केएल राहुल (149) और ऋषभ पंत (114) के बीच छठे विकेट के लिए 200 रन की साझेदारी हुई तो भारतीय फैंस को जीत की उम्मीद हुई लेकिन ओवल के मनहूस रिकॉर्ड ने भारत को फिर से हार के मुंह में ढकेल दिया।
82 सालों में जीता है सिर्फ एक टेस्ट
ओवल मैदान का इतिहास देखें तो यहां भारत ने यहां कुल 12 मैच खेले हैं जिसमें सिर्फ एक में जीत मिली जबकि 4 हार गए और 7 मैच ड्रा रहे। इस रिकॉर्ड को देखते हुए विराट के लिए ओवल टेस्ट जीत पाना थोड़ा मुश्किल है।

47 सालों से है यहां जीत का इंतजार

क्रिकइन्फो के डेटा के मुताबिक, ओवल मैदान पर भारत ने सबसे पहला मैच 1936 में खेला था। यह भारत का दूसरा इंग्लैंड दौरा था और टीम इंडिया की कमान महाराज ऑफ विजयनगर के हाथों में थी। पहला ही मैच भारत 9 विकेट से हार गया था। इसके बाद तो मानों हार की झड़ी लग गई। 82 साल हो गए टीम इंडिया यहां कुल 12 बार खेलने आई जिसमें सिर्फ एक में जीत मिली। भारत ने ओवल पर इकलौता मैच 1971 में जीता था तब टीम इंडिया की कमान अजीत वाडेकर के हाथों में थी। भारत ने वो मैच 4 विकेट से जीता था। इस जीत के हीरो भगवत चंद्रशेखर थे जिन्होंने मैच में 10 विकेट लेकर भारत को जीत दिलाई थी।
कोहली बने मैन ऑफ द मैच
विराट की कप्तानी में पहली बार इंग्लैंड गई भारतीय टीम को इस टेस्ट सीरीज में हार मिली। ये टेस्ट एलिएस्टर कुक का आखिरी टेस्ट मैच था जिसमें उन्होंने शतक लगाया। कुक को उनकी शानदार पारी के लिए 'मैन ऑफ द मैच' चुना गया। टेस्ट सीरीज में शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन करने वाले सैम कुर्रन को 'मैन ऑफ द सीरीज' चुना गया। कुर्रन ने पूरी सीरीज के दौरान 272 रन बनाए व 11 विकेट लिए। विराट कोहली को भी 'मैन ऑफ द सीरीज' चुना गया। उन्होंने पांच टेस्ट मैचों की सीरीज के दौरान सबसे ज्यादा 593 रन बनाए।
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