आबादी के लिहाज से देश का सबसे बड़ा सूबा है उत्‍तर प्रदेश। कहते हैं देश की राजनीति का रुख यहां बहने वाली हवा से तय होता है। inextlive.com की स्‍पेशल सीरीज में जानिए उनकी कहानी जिन्‍हें मिली इस सूबे के 'मुख्‍यमंत्री' की कुर्सी। आज हम बात करेंगे सुचेता कृपलानी की जो उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं और भारत की प्रथम महिला मुख्यमंत्री थीं।

Story by : abhishek.tiwari@inext.co.in
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राजनीतिक उठापटक :

भारतीय राजनीति में पुरुषों की संख्या भले ही ज्यादा हो, लेकिन हमारे यहां की महिलाओं ने भी कई बड़े-बड़े काम करके राजनीति की दशा और दिशा दोनों बदल दी है। इसमें सबसे पहला नाम आता है देश की पहली महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी का। आजादी के 15 साल बाद ही पुरुषवादी समाज के बीच से निकलकर सूबे की मुखिया बनीं सुचेता कृपालनी का राजनीतिक सफर आसान नहीं था। उस समय जब देश में स्वतंत्रता आंदोलन की चिंगारी जल रही थी, उसे शोला बनाने वालों में सुचेता भी एक थीं। सुचेता कृपलानी ने भारत छोड़ो आंदोलन में योगदान दिया और नोआखली में महात्मा गांधी के साथ दंगा पीडित इलाकों में गांधी जी के साथ चलते हुए पीड़ित महिलाओं की मदद की।

महत्वपूर्ण फैसले :
आजादी के बाद हुए पहले चुनाव में सुचेता कृपलानी नई दिल्ली लोकसभा सीट से 1952 व 57 में लगातार 2 बार सांसद चुनी गईं। इसके बाद 1962 में कानपुर से उत्तरप्रदेश विधानसभा की सदस्य चुनीं गयीं। सन 1963 में उन्हें उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया। और करीब 3 साल 162 दिनों तक वह सीएम पद पर रहीं। उनके कार्यकाल के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा में जो मामला था, वो कर्मचारियों की हड़ताल थी। लगभग 62 दिनों तक चली इस हड़ताल को सुचेता ने बखूबी सामना किया। अंत में सुचेता ने फर्म के अधिकारियो की सहायता से कर्मचारियों की मांगो को पूरा करे बिना हड़ताल को तुड़वा दिया।
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काम :
सुचेता काफी सह्दय स्वभाव की थीं। जरूरतमंद की सेवा करने में वह कभी भी नहीं हिचकीं। बात अगर सीएम पद की करें तो प्रशासनिक मामलों में उन्होंने हमेशा बोल्ड डिसीजन लिए।


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Posted By: Abhishek Kumar Tiwari