बावरे मन के सपने

2016-12-20T08:05:05+05:30

शब्‍दों को कसीदकर गीतों की माला में पिरोने वाले स्वानंद किरकिरे की जिंदगी में वैसे तो आल इज वेल ही है लेकिन उनका बावरा मन अब भी कई सपने देख रहा है। कई फिल्मों में अपने खूबसूरत गीतों से जान डालने वाले किरकिरे जहां पर्सनल लाइफ में एक सफल निर्देशक बनना चाहते हैं। वहीं अपने देश और समाज को लेकर भी उनके मन में हजारों ख्वाहिशें ऐसी हैं जिससे यह वाकई अतुल्य बन जाए। उनकी ख्वाहिश है कि देश रूपी रंगमंच में सभी लोग अपना किरदार बखूबी निभाएं और जिम्मेदार व्यक्तियों द्वारा समाज का सही निर्देशन किया जाए। अपने देश समाज और व्यक्तियों के लिए स्वानंद के दस सपने उनकी ही जुबानी।।।

हर इंसान में हो एक बावरा मन
इंसान के अंदर बावरे मन का होना भी जरूरी होता है। मेरे माता-पिता दोनों शास्त्रीय गायक हैं। जब मैंने बॉलीवुड में जाने की ख्वाहिश जताई, मेरे मां-बाप दोनों डर गए थे। वे चाहते थे कि मैं डॉक्टर या इंजीनियर बन जाऊं। मेरे माता-पिता ने कहा कि अगर नाटक का शौक है तो कहीं नौकरी कर लो, फिर करते रहना नाटक। पर अपना मन थोड़ा ज्यादा बावरा था तो मैं निकल पड़ा अपनी राह पर। आज सब खुश हैं। इसलिए अपने अंदर एक बावरे मन को जरूर रखें, अक्सर वही आपका भविष्य और बेहतरी तय करता है।
मल्टीटास्कर बनने की कोशिश करें
मैं सबकुछ करता रहता हूं। मैं सांग लिखता हूं। सिंगिग भी कर लेता हूं। फिल्मों में भी एक्टिंग करने लगा हूं। टीवी, थियेटर हर जगह खुद को एंगेज रखता हूं। लोग अक्सर कहते हैं कि आप किशोर कुमार की तरह हर फील्ड में एक्सपर्ट हैं। मैं कहता हूं कि किशोर दा तो कोई नहीं हो सकता, लेकिन मैं उनका फॉलोअर जरूर हूं। मेरा मानना है कि इंसान को मल्टीटास्किंग होना चाहिए। हर वो हुनर जो उसके अंदर है, उसे तराशना चाहिए। आपको आपकी पहचान किसी भी हुनर के जरिए मिल सकती है।
अपनों को दें अहमियत
अभी तक सिंगल हूं। बहुत सी चीजें अपने हाथ में नहीं होती हैं। मैं अपनी लाइफ को बिजी रखकर ही एन्जॉय करता हूं। लेकिन कई बार अहसास होता है कि कोई तो हो जिससे आप अपनी खुशी शेयर करें। आप किसी अवार्ड फंक्शन से जीतकर लौटें और उस खुशी को शेयर करने के लिए आपके घर में कोई न हो तो कमी तो महसूस होती है। इसलिए मेरी सलाह है कि आप अपने रिश्तों को सहेजकर रखें। जो अपने हैं, उन्हें अपनापन दें। ज्यादा से ज्यादा खुशियां बांटे। आप कितने भी सफल हो जाएं, कितना भी सम्मान मिले, जब तक आप उस खुशी को किसी अपने के साथ बांटते नहीं, वह खुशी अधूरी ही रहती है।
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'गुलजार' होने का सपना देखें
मैं गुलजार साहब का फैन हूं। यूं कहें कि अगर वो न होते तो शायद मेरा ध्यान भी इस ओर नहीं आता। उनके गाने मुझे हमेशा अटै्रक्ट करते रहें। उनके लिखने का तरीका वाकई दिल को छू जाता है। दिल तो बच्चा है जी, बीड़ी जलईलै। वाकई ऐसे गाने गुलजार साहब ही लिख सकते हैं। एक गीतकार के रूप में मैं उनकी तरह ही बनना चाहूंगा। वैसे इंसान को भी अगर असल जिंदगी में गुलजार होना है, तो जरूरी है कि उनकी तरह ही जिंदादिल रहे। अपने दिल को हमेशा बच्चा ही समझे। निश्चित ही जिंदगी में खुशियां ही खुशियां होंगी।
जिंदगी में भी डायरेक्टर बनें
मैं भले ही इस समय गीतकार के रूप में जाना जाता हूं, लेकिन सच तो यह है कि मैं एक सफल निर्देशक बनना चाहता हूं। मैं एक अच्छा डायरेक्टर बनने के लिए ही अपने घर से मुंबई के लिए निकला था। मैंने शुरुआत में डायरेक्टर सुधीर मिश्र के असिस्टेंट के रूप में काम शुरू किया था। चमेली, हजारों ख्वाहिशें ऐसी और कलकत्ता मेल जैसी फिल्मों में उनका असिस्टेंट रहा। आज भले ही सब कुछ सही चल रहा हो, लेकिन अब भी एक अच्छा डायरेक्टर ही बनना चाहता हूं। वैसे मेरा मानना है कि आम इंसान को भी जिंदगी में एक अच्छा डायरेक्टर बनने की कोशिश करना चाहिए। क्योंकि जिंदगी के रंगमंच में हम सभी किरदार हैं, लेकिन सफल वही है जो उन किरदारों और रंगमंच को अच्छा निर्देशन देने की क्षमता रखता है।
लाइफ के टर्निंग प्वाइंट का करें वेट
मेरी जिंदगी के टर्निंग प्वाइंट में मेरे द्वारा लिखे गए गाने बावरा मन देखने चला एक सपना का अहम रोल है। दरअसल, जब मैं सुधीर मिश्र जी के साथ आसिस्टेंट के रूप में काम कर रहा था, तब उन्हें मेरे इस गाने के बारे में पता चला जो पहले लिखा था। सुधीर जी को पसंद आ गया और उन्होंने उसे अपनी फिल्म हजारों ख्वाहिशें ऐसी के लिए ले लिया। मुझे गीतकार के रूप में ज्यादा पहचान मिली। इसके बाद मुझे कई फिल्मों में गाने लिखने का मौका मिला, नेशनल अवार्ड भी मिला। इसलिए लोगों को सही समय का वेट करना चाहिए। कर्म करते रहिए, किस्मत एक बार दस्तक जरूर देती है।
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खूबियों भरा हो अपना देश
जैसे अच्छे-अच्छे शŽदों से खूबसूरत लाइनें और उन लाइनों को लयबद्ध करके एक खूबसूरत गीत तैयार किया जाता है, उसी तरह हमारे देश को भी दुनिया की अलग-अलग खूबियों को एक सूत्र में पिरोकर अगर एक रूप दिया जाए तो यह वाकई अतुल्य भारत बन जाएगा। जैसे कि अपना संविधान। अपना संविधान वाकई सबसे खूबसूरत संविधान है। इसमें कई देशों के संविधान की खूबियों को लिया गया है। मैं चाहता हूं जैसे अपने देश का संविधान सबसे अच्छा है वैसे ही अपना देश भी सबसे अच्छा हो।

कला को सिफारिश की जरूरत न पड़े

हमारे देश में अक्सर छोटे शहरों और साधारण बैकग्राउंड से आने वाले अच्छे कलाकारों को भी अपनी पहचान बनाने में बहुत लंबा संघर्ष करना पड़ता है। मैं खुद एनएसडी से पढ़ा हूं। काफी समय तक खुद की पहचान बनाने के लिए संघर्ष करता रहा। सच तो यही है कि एनएसडी से निकलने वाले कलाकार काबिल तो होते हैं, लेकिन उन्हें पहचान बनाने में बहुत मेहनत करनी पड़ती है। या यूं कहें कि कुछ लोग जिंदगी भर स्ट्रगल करने के लिए ही होते हैं। जबकि अगर आप किसी फिल्म स्टार के बेटे हैं तो ऐसा नहीं करना पड़ता। फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं, ज्यादातर जगह यह होता है। डॉक्टर के बेटे को डॉक्टर बनने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। मैं चाहता हूं कि जो काबिल है, कलाकार है, मेहनतकश है, उसे किसी सिफारिश की जरूरत न पड़े।
सलामत रहे सपनों का देश
वैसे तो सभी पीएम अपने-अपने हिसाब से देश को विकास के पथ पर ले जाने के लिए काम करते हैं। नेहरू जी ने भी देश के लिए एक सपना देखा था। नेहरू जी ने शिक्षा के क्षेत्र में जो काम किए वो वाकई सराहनीय है। एनएसडी और जेएनयू जैसे संस्थान दिए। एनएसडी ने ही देश को नवाजुद्दीन, राजपाल यादव जैसे वो जमीनी इंसान भी दिए जिनके लिए अपने गांव से मुंबई की इस चमचमाती जिंदगी में पहचान बनाना नामुमकिन सा था। आज जब ऐसे संस्थानों के होने या बंद करने पर डिबेट होती है तो मन दुखी होता है। हमें तो ऐसे संस्थानों को और भी बढ़ाना चाहिए ताकि राजपाल और नवाजुद्दीन जैसे बहुत से कलाकार पैदा हो सकें।
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अपनी जिम्मेदारी समझें लोग

लोग अपनी जिम्मेदारी की बात नहीं करते, बस दूसरों पर आरोप लगाते रहते हैं। जिस दिन लोगों के दिलों से यह बुराई खत्म हो जाएगी समाज में वाकई बदलाव नजर आएगा। अब देख लीजिए, आपको लाखों लोग ऐसे मिल जाएंगे जो देश को साफ करने की बात करते हैं। नेताओं और अधिकारियों पर आरोप लगाते हैं, लेकिन वो खुद ही अपने घरों का कूड़ा सड़कों पर फैला देते हैं।
प्रोफाइल
- स्वानन्द किरकिरे गीतकार, पाश्र्वगायक, लेखक होने के साथ-साथ एक्टर भी हैं।
- उन्होंने राष्ट्रीय नाट्य अकादमी एनएसडी से पढ़ाई की।
- दो बार सर्वश्रेष्ठ लेखक के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
- पहली बार 2007 में लगे रहो मुन्ना भाई के गीत बंदे में था दम... वन्दे मातरम के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला
- दूसरी बार 2009 में फिल्म गीत बहती हवा सा था वो... थ्री ईडियट्स केलिए।
- इनके अलावा इन्हें फिल्म परिणीता 2005 के गाने पियू बोले के लिए नामांकन भी मिल चुका है।
फेमस सांग
- बावरा मन देखने चला एक सपना
- ओ री चिरइया...
- आल इज वेल...
- बहती हवा सा था वो...
Report by : Vishesh Shukla
vishesh.shukla@inext.co.in

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