अब लेखा से भी गायब हो गया रिकॉर्ड

2019-04-17T06:00:46+05:30

-यूनिवर्सिटी में पिछले दिनों गायब हो गया था परीक्षा विभाग का रजिस्टर

-किसी बड़े फर्जीवाड़े की आशंका, सीआईडी की टीम कर रही है जांच

GORAKHPUR: गोरखपुर यूनिवर्सिटी में फर्जीवाड़े की जांच में जिम्मेदार अब तक खाली हाथ हैं। परीक्षा विभाग से गायब अटेंडेंस रजिस्टर की तलाश अभी पूरी नहीं हुई थी कि जिम्मेदारों को लेखा विभाग से भी निराशा हाथ लगी है। रजिस्टर न मिलने के बाद जिम्मेदारों ने लेखा विभाग के रिकॉर्ड खंगलवाने शुरू किए थे, मगर यहां भी साल 2000 से 2007 के रिकॉर्ड नहीं मिल पा रहे हैं। इस वजह से 1996 में किए गए फर्जीवाड़े की जांच अटकी है। बार-बार सीआईडी से यूनिवर्सिटी के पास लेटर पहुंच रहा है, लेकिन अब तक उन्हें रिकॉर्ड नहीं मिल पाए हैं।

कहीं कोई गड़बड़झाला तो नहीं

गोरखपुर यूनिवर्सिटी में एग्जामिनेशन के रिकॉर्ड में फर्जीवाड़े के बाद यूनिवर्सिटी में गायब हो रही फाइलें और रिकॉर्ड बड़े फर्जीवाड़े की ओर इशारा कर रहे हैं। यहां पहले जांच में जब परीक्षा सामान्य विभाग से दस्तावेज मांगे गए, तो वहां से 2000 से 2007 के बीच जिस रजिस्टर पर अटेंडेंस लगाई गई थी, वहीं गायब हो गया। जिम्मेदारों ने ऑप्शन के तौर पर लेखा विभाग में दस्तावेज तलाशने शुरू किए, तो यहां भी इस पीरियड के रिकॉर्ड नहीं मिल पा रहे हैं। यूनिवर्सिटी में लगातार गायब हो रहे रिकॉर्ड किसी बड़े फर्जीवाड़े की ओर इशारा कर रहे हैं।

1996 का है मामला

गोरखपुर यूनिवर्सिटी में साल 1996 में बीएड की एक डिग्री वेरिफिकेशन के लिए आई। प्राइमरी लेवल पर जिम्मेदारों को इस पर शक हुआ, तो उन्होंने इसकी जांच कराई। जांच में डिग्री गलत पाई गई। फिर इसके लिए वीसी के निर्देश पर एक मार्च 2015 में एक कमेटी बनाई गई, जिसने जांच के बाद यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड में टेंपरिंग की पुष्टि की। इस संबंध में जब जिम्मेदारों को साक्ष्य उपलब्ध कराए, तो इसमें टेंपरिंग नजर न आई, जबकि यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में टेंपरिंग की पुष्टि की गई है। इससे अब जांच कर रहे अधिकारियों ने यूनिवर्सिटी से 2000 से लेकर 2007 तक के बीच अभिलेख कक्ष प्रभारी का नाम और कब से कब तक किसकी नियुक्ति है, इसका रिकॉर्ड मांगा है।

2015 में हुई थी जांच

गोरखपुर यूनिवर्सिटी में 2015 में बीएड के एक प्रकरण की जांच आई थी। वीसी के निर्देश पर जांच शुरू भी हो गई। इसके लिए एक कमेटी बनाई गई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट मई 2015 में जिम्मेदारों को सौंप दी, जिसमें विभागीय रजिस्टर में टेंपरिंग की पुष्टि हुई। इसकी फोटोकॉपी जिम्मेदारों ने शासन को सौंपी। कोर्ट ने मामले से संतुष्ट न होते हुए इसकी जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी। सीबीसीआईडी ने इस मामले की जांच शुरू करते हुए अब यूनिवर्सिटी में लेटर भेजकर रिकॉर्ड मांगने शुरू कर दिए हैं।

गायब कर दिया रजिस्टर

मामले की जांच के लिए यूनिवर्सिटी से दस्तावेज मांगे जाने के बाद ही यूनिवर्सिटी में हड़कंप है। सीबीसीआईडी ने यूनिवर्सिटी से 2000 से 2007 के बीच परीक्षा सामान्य विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों और विभाग को लीड करने वाले कर्मचारी की लिस्ट मांगी है। जिम्मेदारों को लेटर मिलने के बाद जब कागजात की खोजबीन शुरू हुई, तो इसमें दस्तावेज ही नहीं मिल पा रहे हैं। इसमें सबसे चौंका देने वाली बात यह है कि जिस रजिस्टर पर उस विभाग के सभी कर्मचारी काम के दौरान अपनी हाजरी दर्ज करते थे, वह रजिस्टर ही गायब हो गया है। जिम्मेदार इससे टेंशन में हैं और उसको ढुंढवाने में जुट गए हैं।

सीबीसीआईडी की पुराने मामले में जांच चल रही है। 2000 से 2007 के बीच का हाजिरी रजिस्टर नहीं मिल रहा है, लेखा विभाग से भी रिकॉर्ड न मिलने पर जिम्मेदारों को दो दिन का वक्त दिया गया है।

- सुरेश चंद्र शर्मा, रजिस्ट्रार, गोरखपुर यूनिवर्सिटी

inextlive from Gorakhpur News Desk


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