फुहारों के बीच हुआ झंडे जी का आरोहण

2019-03-26T06:00:14+05:30

- दून के एतिहासिक झंडे मेले का हुआ आगाज, लाखों श्रद्धालु बने एतिहासिक पल के गवाह

- श्री दरबार साहिब के सज्जादानशीन महंत देवेंद्र दास महाराज ने श्रद्धालुओं को दिया आशीर्वाद

DEHRADUN: दून के एतिहासिक झंडे मेले का मंडे को आगाज हो गया। दून में लाखों श्रद्धालु इस पावन पल के गवाह बने। सुबह से पूजा- अर्चना के बाद शाम चार बजकर 45 मिनट पर झंडे जी का आरोहण किया गया। इस दौरान पूरा वातावरण श्री गुरु राम राय महाराज के जयघोषों से गुंजायमान रहा। श्री दरबार साहिब के सज्जादानशीन महंत देवेंद्र दास महाराज ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया और सुख शांति की कामना की।

हर वर्ष होली के पांच दिन बाद सिखों के सातवें गुरु श्री गुरु राम राय महाराज के बेटे हर राय सिंह के जन्मदिन के मौके पर दून में झंडे मेले का आयोजन किया जाता है। मेले के लिए भारत के विभिन्न राज्यों के साथ ही विदेशों से बड़ी तादात में श्रद्धालु दून पहुंचते हैं। मंडे को सुबह 8:30 बजे झंडे जी के आरोहण की प्रक्रिया शुरू हुई। सबसे पहले झंडे जी को दूध, दही, घी, शक्कर, मक्खन और पंचामृत से स्नान कराया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं में झंडे जी के स्नान को लेकर होड़ लगी रही। हर कोई झंडे जी को एक बार छूने के लिए बेताब दिखाई दिया। श्री दरबार साहिब के महंत देवेंद्र दास महाराज ने झंडे जी की पूजा- अर्चना के बाद गिलाफ पहनाने की प्रक्रिया शुरू की। जिसके बाद सबसे पहले झंडे जी को 41 सादे, 21 सनील और एक दर्शनी गिलाफ पहनाया गया। इस दौरान पूरा वातावरण झंडे जी के जयघोषों से गुंजायमान रहा। शाम चार बजकर 45 मिनट पर झंडे जी का आरोहण किया गया और इसी के साथ झंडे मेले का आगाज हो गया। झंडा मेला श्रद्धा, आस्था, विश्वास, प्रेम और सद्भावना का प्रतीक है। यह पर्व लोगों में नई ऊर्जा का संचार करता है। झंडे मेले में शामिल होने के लिए देश- विदेश से श्रद्धालु देहरादून पहुंचते हैं।

सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम

झंडे मेले के लिए पुलिस और मेला प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजामात किए गए थे। मेले थाने से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी। इसके साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अलग- अलग स्थानों पर एलईडी स्क्रींस भी लगाई थी।

95 फीट है लंबाई

झंडे साहिब की लंबाई 95 फीट है। साल के पेड़ से झंडे जी को बनाया जाता है। जिसका बॉटम 24 इंच चौड़ा और ऊपरी हिस्सा 5 इंच चौड़ा है। आवश्यकता के आधार पर तीन या चार साल में पेड़ को बदला जाता है.

मन्नतें होती हैं पूरी

मान्यता है कि अगर कोई सच्चे मन से गुरु महाराज से कुछ भी मांगता है तो बाबा उसकी मनोकामना जरूर पूरी करते हैं। मनोकामना पूरी होने के बाद श्रद्धालु झंडे जी के दर्शन करते हैं और गिलाफ चढ़ाते हैं। गिलाफ महिलाओं द्वारा सिला जाता है। श्री दरबार साहिब के महंत देवेंद्र दास महाराज ने बताया कि झंडे साहिब पर चढ़ने वाले वर्ष 2042 के सनील और 2117 तक के दर्शनी गिलाफ की बुकिंग हो चुकी है। इस साल दर्शनी गिलाफ सिमली तहसील गठशंकर होशियारपुर पंजाब निवासी केशर सिंह के पुत्र ने चढ़ाया। उनका नंबर 105 साल बाद आया.

आसमान में मंडराते है बाज

झंडे साहिब पर दर्शनी गिलाफ चढ़ाते ही आसमान में बाज मंडराने लगा। जिसे श्रद्धालु श्री गुरू राम राय महाराज की उपस्थिति के रूप में देखते हैं। मंडे को भी झंडे जी के आरोहण के बाद आसमान पर बाज झंडे जी की परिक्रमा करते हुए दिखाई दिए।

inextlive from Dehradun News Desk


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