जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट

2019-04-09T06:00:57+05:30

PATNA : जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से सोमवार को राज्य के दो सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच और एनएमसीएच में स्वास्थ्य सेवा चरमरा गई। इन अस्पतालों में एक ओर पेशेंट दर्द से दिन भर कराहते रहे तो दूसरी ओर जूनियर डॉक्टरों के इमरजेंसी और ओपीडी में कार्य बहिष्कार के कारण उनके परिजन भी लाचार बने रहे। हड़ताल का सबसे ज्यादा असर पीएमसीएच पर पड़ा। वहीं, एनएमसीएच में भी हड़ताल की वजह से मरीज और उनके परिजन परेशान रहे। जूनियर डॉक्टरों ने ओपीडी के काउंटर को बंद करा दिया। जूनियर डॉक्टर राज्य के मेडिकल कॉलेजों में पीजी में एम्स के छात्रों के एडमिशन सहित विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर रहे। उन्होंने कहा कि यह राज्य के छात्रों के हित में नहीं है। इसलिए इसका विरोध हो रहा है। सभी ने एक स्वर से कहा पीजी मेडिकल काउंसलिंग में एम्स को इंट्री नहीं मिलनी चाहिए। उन्हें स्टेट कोटा से इंट्री देना बंद किया जाए।

ओपीडी और इमरजेंसी सेवा रही बाधित

हड़ताल से पीएमसीएच और एनएमसीएच की ओपीडी और इमरजेंसी बाधित रही। मरीज इलाज के अभाव में दर्द से कराहते रहे लेकिन उनका इलाज करने कोई डॉक्टर नहीं पहुंचा। डॉक्टरों की तलाश में मरीज के परिजन दिन भर परेशान रहे। इसके अलावा पीएमसीएच का शिशु वार्ड की सेवा भी हड़ताल से चरमरा गई।

पीएमसीएच में 50 ऑपरेशन टले

पीएमसीएच में हड़ताल की वजह से पूर्व निर्धारित 100 ऑपरेशन में से आधे को टालना पड़ा। इससे मरीज और उनके परिजन मायूस दिखे। पीएमसीएच की ओपीडी ही नहीं कई दिनों से भर्ती मरीजों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हड़ताल के मद्देनजर अस्पताल को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

पीएमसीएच पहुंचे डॉक्टर्स

डॉक्टरों की कमी और चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था को देखते हुए पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ आरआर प्रसाद ने सिविल सर्जन से 50 डॉक्टरों की मांग की। इसमें दोपहर बाद तक 23 डॉक्टरों ने पीएमसीएच ज्वाइन कर स्थिति को कुछ हद तक संभाला। डॉ आरआर प्रसाद ने कहा कि स्ट्राइक के बाद यहां के नॉन क्लीनिकल डॉक्टरों को इमरजेंसी की स्थिति देखने को कहा गया। इसके अतिरिक्त हर विभाग से दो एसओडी और दो पीओडी डॉक्टरों को लगाया गया। उन्होंने बताया कि स्ट्राइक के कारण पहले से तय ऑपरेशन नहीं टले। कुल 50 ऑपरेशन संपन्न हुए।

मांगे पूरी होने तक स्ट्राइक

पीएमसीएच में जेडीए के अध्यक्ष डॉ शंकर भारती ने कहा कि राज्य भर में पीजी काउंसलिंग में 50 प्रतिशत कोटा राज्य का और 50 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा होता है। समस्या यह है कि स्टेट कोटा में एम्स के कैंडिडेट को जगह दी जा रही है। यह यहां राज्य सरकार के मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले मेडिकल स्टूडेंट्स के साथ अन्याय है। इसलिए जब तक पीजी मेडिकल काउंसलिंग 2019 के प्रास्पेक्टस के क्लाउज नंबर 6.1 में सुधार किया जाए। जब तक यह सुधार नहीं किया जाता है, बेमियादी स्ट्राइक जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार को इस संबंध में तीन दिनों का अल्टीमेटम दिया गया था। लेकिन सरकार ने इसे अनदेखा का दिया।

सरकार से नहीं हुई वार्ता

जूनियर डॉक्टरों को जब जानकारी मिली कि एनएमसीएच में स्वास्थ्य विभाग के एक कार्यक्रम में प्रधान सचिव संजय कुमार आए हैं तो एनएमसीएच और पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टरों ने उनसे संपर्क करने का प्रयास किया। लेकिन सरकार की ओर से उन्हें समय देने या बातचीत के लिए पहल करने से साफ इनकार कर दिया गया।

inextlive from Patna News Desk


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