बच्चों का हेल्थ बिगाड़ न दे ठेले का खाना

2019-04-12T06:00:18+05:30

छ्वन्रूस्॥श्वष्ठक्कक्त्र: स्टील सिटी के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के बाहर लगने वाले ठेले कहीं आपके बच्चे की सेहत न खराब कर दे। अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में यह ठेले वाले मिलावटी सामान बेंचते हैं, जिससे खाकर आपका बच्चा बीमार हो सकता है। बताते चलें कि शहर के स्कूलों में कैंटीन न होने से दोपहर इंटर वेल के समय स्कूल के बाहर लगने वाला बर्गर, चाउमीन, डोसा, इडली, आलूचाप आदि खाते हैं। यह मिलावटी और बिना किसी जांच के तैयार हो रहा खाद्य बच्चे की सेहत पर वितरीत प्रभाव डाल रहा है। दोपहर के समय ज्यादातर छात्र-छात्राएं चाट, गोलगप्पा, आइसक्रीम, समोसा, कटे फल, भेलपुरी आदि खाते हैं। फुटपाथ में लगने वाले यह ठेले एफएसएसआई के मानक पर भी खरे नहीं उतरते हैं। माता-पिता की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने बच्चों को इन ठेलों का खाना न खाने दे। स्कूल के बाहर मिलने वाले चूरन, इमली और कटे फलों पर पूरे दिन मक्खी रहने के चलते बच्चे बीमार हो सकते है।

इन स्कूलों के बाहर लगते हैं ठेले

लोयला स्कूल बिष्टुपुर, एमएपीएस विद्यालय साकची, राजेंद्र विद्यालय साकची, जेएसतारापोर विद्यालय धतकीडीह, एग्रिको, डीबीएमएस कदमा, डीएवी पब्लिक स्कूल साकची, विद्या भारती चिन्मया टेल्को, ग्रेजुएट कॉलेज साकची, करीम सिटी कॉलेज साकची, कांन्वेट स्कूल बिष्टुपुर, आरवीएस विद्यालय डिमना, ब्लूबेल्स स्कूल मानगो, एबीएम कॉलेज, वमूेंस कॉले बिष्टुपुर में ठेले लगते हैं।

बच्चों को नियमित रूम से दे टिफिन

बच्चों की किसी भी समस्या के लिए सबसे पहले बच्चे के पेरेंट्स उत्तरदायी होते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक बच्चों को न्यूट्रीशियन के हिसाब से सब्जियां या खाना दैं। ध्यान रखें कि आपके लंच नहीं देने से बच्चे बाहर की चीजें खाएंगे। इसलिए अगर कभी लंच समय से तैयार नहीं होता है, तो आप बनाकर स्कूल में देकर आ सकते है, इसके साथ ही बच्चों को बिस्कुट ब्रेड व अन्य रेडीमेड खाना भी दिया जा सकता है।

पेरेंट्स के बोल

मैं बेटे को नियमित पराठा या रोटी जैम में लगाकर देती हूं, ताकि इंटरवेल के समय उसे बाहर की कोई चीज न लेनी पड़े। स्कूल के गार्ड को निर्देश है कि बाहर की कोई चीज अंदर न आने दिया जाए। बच्चों को बाहर के खाने से बचाकर ज्यादातर घर की बने चीजें देनी चाहिये जिससे बच्चे को जरूरी पोषण तत्व मिल सके।

गुंजन सिंह, साकची

बाजार में बिकने वाली चीजों को बच्चे कम से कम खाएं। इनमें किसी प्रकार का पोषक तत्व मौजूद नहीं रहते हैं। इसलिए बच्चे इन सभी चीजों पर कतई ध्यान नहीं दें। यह जान लें कि घर का बना खाना सबसे पौष्टिक और अच्छा होता है।

पंकज सिंह, मानगो

स्कूल के पास ठेला लगाने वाले दुकानदारों के सामान के नमूने भरे जाने चाहिये जिससे यह मालूम हो सके कि यह चीजें बच्चों के खाने के योग्य है कि नहीं। स्कूल के पास दुकान लगाने वाले सभी दुकानदारों को पंजीकृत किया जाना चाहिये, जिससे किसी तरह की घटना होने पर दुकानदारों को पकड़ा जा सके।

रोली साहू, जुगसलाई

स्कूलों में कैंटीन की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि इंटरवेल में बच्चों को नास्ता और खाने की व्यवस्था रहे। इस कैंटीन की समय-समय पर गुणवत्ता की जांच होनी चाहिये। जिससे यह मालूम हो सके कि कैंटीन में जो चीजें तैयार की जा रही है वह गुणवत्ता युक्त है। कैंटीन में बाहर की सिर्फ उपयोगी वस्तुओं की बिक्री की जानी चाहिए। जो कि बच्चों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।

सुमित कुमार, टेल्को

सड़क किनारे ठेले पर खाद्य सामग्री बेचने वाले दुकानदारों को नगर निगम के माध्यम से पंजीकृत किया जा रहा है। इसके बाद सभी को एफएसएसआई का सार्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त स्कूल के पास ठेला लगानेवालों की खाद्य सामग्री की जांच करवाई जाएगी।

गुलाब लाकड़ा, फूड इंस्पेक्टर, जमशेदपुर

inextlive from Jamshedpur News Desk


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