जूठन से सड़कें हो रही रोशन

2018-06-17T06:00:05+05:30

- इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के वेस्ट टू एनर्जी प्लांट में आर्गेनिक वेस्ट से बन रही बिजली

- यहां से जोनल ऑफिस आदमपुर को मिल रही बिजली, शहर की स्ट्रीट लाइटें भी हो रही हैं जगमग

VARANASI

क्या आप जानते हैं कि जो बचा हुआ खाना आप फेंक देते हैं, या फिर सड़ी- गली सब्जियां सड़क किनारे पड़ी रहती हैं। उससे बिजली का प्रोडक्शन हो रहा है। जी हां, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के वेस्ट टू एनर्जी प्लांट से बनाई जा रही बिजली से शहर की स्ट्रीट लाइटें जगमगा रही हैं। यहां से नगर निगम के आदमपुर स्थित जोनल ऑफिस को भी बिजली मिल रही है। इससे आर्गेनिक वेस्ट का सही यूज हो ही रहा है, बिजली विभाग पर लोड भी कम पड़ रहा है। यही नहीं, बिजली उत्पादन के बाद निकला अवशेष खाद के रूप में शहर के पार्को में मिट्टी और पौधों को पोषण दे रहा है।

मंडियों से लाते हैं आर्गेनिक वेस्ट

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने जलकल संस्थान भेलूपुर, पहडि़या व कज्जाकपुरा स्थित संक्रामक रोग अस्पताल परिसर में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाए हैं। इसमें आर्गेनिक वेस्ट यानी बचा खाना, सड़ी हुई सब्जियां, पत्तियां आदि इकट्ठा कर उससे बिजली का प्रोडक्शन किया जाता है। इसके लिए होटल, लॉज, गेस्ट हाउस, पहडि़या, चंदुआ सट्टी स्थित सब्जी मंडियों से आर्गेनिक वेस्ट कलेक्ट कर उसे प्लांट में लाया जाता हैं। इसके बाद बिजली बनाने का प्रॉसेस शुरू किया जाता है।

तीन जगहों पर हो रहा उत्पादन

प्लांट में लगी मशीनों में आर्गेनिक कूड़े को डाला जाता है। फिर इससे मीथेन गैस तैयार होती है। जो बिजली बनाने की प्रमुख कारक है। आईओसी के ओआरएसपीएल डिवीजन के प्रोजेक्ट इंचार्ज आशीष सिंह के मुताबिक शहर में दस जगहों पर वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाने की योजना है। इनमें से तीन जगहों पर उत्पादन शुरू हो चुका है। मानक के अनुरूप अगर पांच टन कूड़ा मिलता है तो 480 यूनिट बिजली बनती है। लेकिन इस समय एक या दो टन ही कूड़ा मिल रहा है। निगम की ओर से अधिकृत एजेंसियों से भी कूड़ा लिया जाता है। प्रयास किया जाता है कि आर्गेनिक कूड़े का ज्यादा से ज्यादा उठान हो।

आप भी कर सकते हैं सहयोग

नगर निगम ने जगह- जगह डस्टबिन रखवाए हैं। हरे रंग का डस्टबिन सॉलिड कूड़े के लिए और नीले रंग का डस्टबिन आर्गेनिक वेस्ट के लिए रखा गया है। कई बार लोग दोनों कूड़ों को हरे डस्टबिन में ही डाल देते हैं। अगर निर्धारित डस्टबिन में ही आर्गेनिक वेस्ट डाला जाय तो काफी मात्रा में कूड़ा बिजली उत्पादन के लिए मिल जाएगा। इस तरह पावर प्रोडक्शन में आप भी सहभागी बन सकते हैं।

खाद से पौधों की बढ़ी लाइफ

बिजली बनाने के बाद आर्गेनिक वेस्ट का आधा हिस्सा बच जाता है, जो सूखा होता है। इसे नगर निगम अपने पार्को में मिट्टी की उर्वरा शक्ति और पौधों की लाइफ बढ़ाने में प्रयोग करता है। काफी मात्रा में निकली खाद शहर के गुलाबबाग, शास्त्री पार्क, शहीद उद्यान समेत अन्य पार्को में यूज हो रही है।

कुछ खास बातें

- पूरी तरह से पॉल्यूशन फ्री हैं प्लांट

- स्ट्रीट लाइट व जोनल कार्यालय आदमपुर में सप्लाई

- एक साथ आर्गेनिक वेस्ट निस्तारण और पावर प्रोडक्शन

एक नजर

480

यूनिट बिजली का प्रोडक्शन डेली एक प्लांट में

200

यूनिट प्लांट में होता है यूज

3

जगहों पर हो रहा पावर प्रोडक्शन

80 से 350

लाइटें जल सकती हैं

10

जगहों पर प्लांट लगाने का है प्लान

वेस्ट टू एनर्जी प्लांट से स्ट्रीट लाइटें और जोनल ऑफिस जगमगा रहे हैं। इससे नगर निगम का बिजली खर्च भी कम हो रहा है। शेष प्लांट्स के बन जाने के बाद बिजली की काफी बचत होगी। साथ ही आर्गेनिक वेस्ट का सही यूज हो सकेगा।

रमेश चन्द्र सिंह, संयुक्त नगर आयुक्त

तीन प्लांट्स से उत्पादित बिजली नगर निगम को दी जा रही है। हालांकि कई बार पर्याप्त आर्गेनिक वेस्ट न मिलने से जरूरत के मुताबिक बिजली का प्रोडक्शन नहीं हो पाता है.

आशीष सिंह, प्रोजेक्ट इंचार्ज

inextlive from Varanasi News Desk


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