सबरीमाला मंदिर तनाव बरकरारप्रशासन अलर्ट जानें क्यों थी अब तक महिलाओं के प्रवेश पर रोक

2018-10-17T09:47:00+05:30

केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में आज सभी उम्र की महिलाओं का प्रवेश होना है। वहीं कुछ धार्मिक संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने यहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर रखे हैं ।

कानपुर।  केरल के पंपा में स्थित सबरीमाला मंदिर के पट आज से खुल जाएंगे। सबरीमाला मंदिर हिंदू देवता अयप्पा को समर्पित है। मंदिर प्रबंधन द्वारा देवता को शाश्वत ब्रह्मचर्य माना जाता है। यहां कल से ही बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ी है। खास बात तो यह है कि महिला श्रद्धालुओं में भी गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आज यहां काफी समय बाद  10 से 50 साल की महिलाएं मंदिर में प्रवेश कर सकेंगी और भगवान अयप्पा के दर्शन करेंगी।
चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा कर्मी तैनात
हालांकि कुछ लोग अभी भी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। कुछ धार्मिक संगठनों ने ऐलान किया है कि वे महिलाओं को मंदिर परिसर में प्रवेश नहीं करने देंगे। यह मंदिर के नियमों के खिलाफ है। सबरीमाला मंदिर परिसर के बाहर विरोध-प्रदर्शन हो रहा है। ऐसे में यहां बरकरार तनाव को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इतंजाम किए हैं। यहां चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा कर्मी तैनात है। वहीं केरल सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट को विश्वास दिलाया है कि उसके आदेश का हर हाल में पालन किया जाएगा।  

प्रतिबंध लगाना एक लैंगिक भेदभाव

बतादें कि 28 सितंबर को पूर्व मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में पांच न्यायाधीशीय संविधान खंडपीठ ने अपने 4-1 के बहुमत से फैसला सुनाया गया था। फैसले में कहा गया था कि महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाना एक लैंगिक भेदभाव है और यह हिंदू महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन करता है। वहीं मंदिर प्रशासन की हमेशा से ये दलील रही है कि कि सबरीमामला भगवान अयप्पा का मंदिर है और वो उम्र भर अविवाहित थे। ऐसे में सैकड़ों वर्षों से महिलाओं के प्रवेश पर बैन था।

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