जानें कैसे जैन मुनि तरुण सागर जलेबी खातेखाते बन गए थे संत बता गए दिगंबर मुनि की पहचान

2018-09-01T02:31:49+05:30

जैन मुनि तरुण सागर का आज शनिवार तड़के 51 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। तरुण सागर जी महाराज के बारे में कहा जाता है कि वह जलेबी खातेखाते संत बन गए थे। आइए जानें उनके जीवन यात्रा के बारे में खास बातें

कानपुर। जैन मुनि तरुण सागर महाराज ने जैन परंपराआें का अच्छे से निर्वाह किया। दुनिया भर में इनके करोड़ों अनुयार्इ है। इनको लेकर कहा जाता है कि ये कड़वे प्रवचन देते थे लेकिन बावजूद इसके ये लोगों के बीच लोकप्रिय हुए। मध्यप्रदेश के दमोह जिले के एक गांव में जन्में तरुण सागर ने 13 साल की उम्र में घर छोड़ दिया था आैर सन्यासी बन गए थे। 20 साल की उम्र में इन्होंने दिगंबर मुनि दीक्षा ली थी। तरुण सागर हमेशा बिना कपड़ों के पैदल यात्रा करते थे।
इस बात को सुनने के बाद संत बनने का फैसला लिया
इंडिया टीवी के एक कार्यक्रम में तरुण सागर जी महराज ने बताया था, बचपन में मुझे जलेबियां बहुत पसंद थीं। 'मैं एक दिन स्कूल से घर जा रहा था। अक्सर ही वह स्कूल से वापस लौटते समय एक होटल में जलेबी खाता था। एेसे में एक दिन जब वहां बैठकर मैं जलेबी खा रहा था। तभी वहीं थोड़ी दूर पर मेरे आचार्य पुष्पधनसागरजी महाराज का प्रवचन चल रहा था। वह कह रहे थे कि तुम भी भगवान बन सकते हो। इस बात को सुनने के बाद मैंने संत बनने का फैसला लिया।
कपड़े न पहनने के सवाल पर कुछ एेसे दिया जवाब
कपड़े न पहनने के सवाल पर तरुण सागर जी ने एक कविता कह कर बताया कि दिगंबर मुनि किसे कहते हैं। उन्होंने कहा कि जिसके पैरों में जूता नहीं, सिर पर छाता नहीं, बैंक में खाता नहीं, परिवार से नाता नहीं उसे कहते हैं दिगंबर मुनि। जिसके तन पर कपड़े नहीं, जिसके मन में लफड़े नहीं, जिसके वचन में झगड़े नहीं, जीवन में कोर्इ रगड़े नहीं, उसे कहते हैं दिगंबर मुनि। जिसका कोर्इ घर नहीं, किसी बात का डर नहीं, दुनिया का असर नहीं आैर जिससे बड़ा कोर्इ सुपर नहीं, उसे कहते हैं दिगबंर मुनि।

तरुण सागर ने 50वां जन्म दिवस श्मशान घाट में मनाया

तरुण सागर समाज को बेहतर दिशा दिखाने का हर संभव प्रयास करते थे। इसका एक बड़ा उदाहरण ये है कि उन्होंने अपना 50वां जन्म दिवस राजस्थान के श्मशान घाट में मनाया था। इस मौके पर उन्होंने 50 लोगों को अपना एक जन्मदिवस श्मशान में मनाने का संकल्प दिलाया और श्मशान में 50 पौधे भी लगाए थे। उनका कहना था कि एक न एक दिन सबको श्मशान आना होता है। श्मशान शहर के बाहर नहीं, बल्कि बीचोबीच होने चाहिए ताकि लोगों को जीवन की नश्वरता का अहसास होता रहे।
दुनिया में चार चीजें मुश्किल बता गए तरुण सागर महराज
जैनमुनि ने एक बार अपने प्रवचन में बताया था कि दुनिया में चार चीजें मुश्किल हैं। हाथी को धक्का देना, मच्छर की मालिश करना, चीटी की पप्पी लेना और शादी के बाद मुस्कुराना। अगर आदमी हर हाल में जीने की आदत डाल ले तो वह शादी क्या ताउम्र मुस्कुराते हुए जी सकता है।जीवन में दो बातें याद रखिए और दो बातों को भूल जाइए। याद रखने वाली बात अपने भगवान और मौत को याद रखिए और भूल जाने वाली बात किसी ने तुम्हारे साथ बुरा किया या तुमने कोई अच्छा काम किया।

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