मुश्किल हुआ खुशियों की सवारी का सफर

2019-04-28T06:00:38+05:30

सीएमओ ऑफिस को करना है खुशियों की सवारी का संचालन

कॉल सेंटर सर्विस के बिना केकेएस का संचालन नहीं आसान

देहरादून,

डिलीवरी के बाद जच्चा-बच्चा को घर तक पहुंचाने की योजना खुशियों की सवारी का संचालन मुश्किल में पड़ गया है। स्वास्थ्य महकमे ने खुशियों की सवारी का संचालन सीएमओ को सौंप दिया है। लेकिन, सीएमओ ऑफिस में कॉल सेंटर की सुविधा न होने से यह योजना खटाई में पड़ती नजर आ रही है। ऐसे में यह सुविधा दून के बडे़ हॉस्पिटल तक सिमट कर रह सकती है।

फिलहाल जीवीके चला रही केकेएस

2011 से शुरू हुई केकेएस सेवा को 108 एम्बुलेंस के साथ जीवीके ईएमआरआई चला रही है। सरकारी हॉस्पिटल में जिसे केकेएस की सेवा लेनी होती थी, वे हॉस्पिटल में बनाए गए केकेएस के ऑफिस से फॉर्म भरकर रिक्वेस्ट डालते हैं, जिसके बाद 108 से संपर्क कर गाडि़यों की अपडेट ली जाती है। जिस गाड़ी की जहां पर अवेलेबिलिटी हो उसे उपलब्ध करा दी जाती है। जो कि 50 किमी के दायरे में भी छोड़ने जाती रही है। जब से 108 एम्बुलेंस सेवा का संचालन जीवीके ईएमआरआई से हटकर कैंप को मिला है, तब से केकेएस सेवा खटाई में पड़ गई। कई दिनों से केकेएस की सेवा बंद पड़ी हुई है।

सीएमओ को बनाया नोडल अफसर

अब स्वास्थ्य महकमे ने केकेएस को अपने स्तर से संचालित करने का निर्णय लिया है। जिसके लिए सीएमओ को नोडल अफसर बनाया गया है। सीएमओ डा। एसके गुप्ता ने बताया कि सभी अधिकारियों के साथ मिलकर केकेएस को संचालित करने के लिए प्लान तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बिना कॉल सेंटर के केकेएस का संचालन आसान नहीं है। ऐसे में जिन प्रमुख हॉस्पिटल में डिलीवरी के केसज लिए जाते हैं, वहां एक गाड़ी रिजर्व कर दी जाएगी। बाकी सभी हॉस्पिटल में डिमांड के बाद केकेएस प्रोवाइड करा दी जाएगी। इसके लिए एक नम्बर सार्वजनिक कर दिया जाएगा। जिससे लोगों को परेशानी न हो।

95 लोकेशन पर हैं केकेएस सेवा

खुशियों की सवारी योजना के माध्यम से राज्य में सरकारी हॉस्पिटल्स में डिलीवरी के बांद जच्चा-बच्चा को सुरक्षित और निशुल्क घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाती है। इसके अतिरिक्त इस सेवा द्वारा राष्ट्रीय स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जरूरत के अनुसार स्टूडेंट्स को लाभ दिया जाता है। राज्य में इस सेवा का आरंभ 19 सितम्बर 2011 को किया गया था। उस वक्त योजना किराये के वाहनों के माध्यम से संचालित की गई थी, जिससे संचालन में कठिनाइयां हो रही थी। 30 मार्च 2013 को खुशियों की सवारी योजना में 90 गाडि़यां शामिल की गई। फिलहाल इस बेड़े में 95 गाडि़यां हैं। दून में 11 लोकेशन पर केकेएस की सुविधा मिल रही है। 108 आपातकालीन सेवा का संचालन कर रही संस्था जीवीके ईएमआरआई ही इस योजना को ऑपरेट करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। लेकिन, अब 108 एम्बुलेंस का संचालन कैंप को मिला है। लेकिन केकेएस का जिम्मा कैंप को नहीं मिला है।

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जिन सरकारी हॉस्पिटल में डिलीवरी की सुविधा होगी, वहां केकेएस सेवा को रिजर्व कर दिया जाएगा। कॉल सेंटर के बिना सेवा देने के विकल्प पर प्लान तैयार किया जा रहा है।

डॉ। एसके गुप्ता, सीएमओ

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दून में केकेएस की आवश्यकता

- दून हॉस्पिटल

-गांधी शताब्दी नेत्र हॉस्पिटल

-5 सीएचसी

-17 पीएचसी

inextlive from Dehradun News Desk


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