भारत में आखिरी अंग्रेज अफसर लाॅर्ड माउंटबेटन जिसने गुलाम भारत को आजादी का परवाना सौंपा

2019-02-20T08:15:02+05:30

लॉर्ड लुईस माउंटबेटन को भारत में आखिरी अंग्रेज अफसर के रूप में गिना जाता है। माउंटबेटन को 1947 में 20 फरवरी को ब्रिटिश भारत का आखिरी अंग्रेज वायसराय नियुक्त किया गया था। जानें आज इस विशेष दिन पर इनसे जुड़ी खास बातें

कानपुर। लॉर्ड माउंटबेटन का मूल नाम लुईस फ्रांसिस अल्बर्ट विक्टर निकोलस था। इनका जन्म 25 जून, 1900 फ्रॉगमोर हाउस में हुआ था। लुईस माउंटबेटन बहुत ही मिलनसार स्वभाव के थे। उन्होंने 1913 में रॉयल नेवी ज्वाॅइन किया था। एक अाधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक 1932 में उन्हें कैप्टन के रूप में प्रमोशन दिया गया था।
एडविना एशले से शादी की थी
लार्ड माउंटबेन की पर्सनल लाइफ पर नजर डालें तो उन्होंने 1922 में उन्होंने एडविना एशले से शादी की थी। उनको सेकेंड वर्ल्ड वार छिड़ने पर ध्वंसक कैली और पांचवे ध्वंसक बेड़े की कमान में 1941 में एक विमानवाहक पोत का कमाण्डर नियुक्त किया गया था। इसके अलावा अप्रैल 1942 में उन्हें ज्वाइंट मिशन का चीफ बनाया गया था।
 
आखिरी वायसराय नियुक्‍त हुए

वहीं भारत में 20 फरवरी 1947 में लॉर्ड लुईस माउंटबेटन को भारत का आखिरी वायसराय नियुक्‍त किया गया था। भारत और पाकिस्तान ने 14 से 15 अगस्त 1947 की रात आजादी हासिल की थी। भारत तथा पाकिस्तान के बटवारे के बाद उन्होंने ब्रिटिश हाथों से भारतीय हाथों में राजनीतिक सूझ-बूझ के साथ सत्ता साैंपने का काम किया था।

बम लगाकर हत्या कर दी थी

लार्ड माउंटबेन ने भारत के गवर्नर-जनरल के रूप में कई राजकुमारों को भारत या पाकिस्तान में मिलाने के लिए काफी कोशिश की थी। बर्मा की लड़ाई के नायक और जापान को नतमस्तक कराने वाले लार्ड माउंटबेटन की 27 अगस्त, 1979 में प्रोविजिनल आइरिश रिपब्लिकन आर्मी के आतंकवादियों ने नाव में बम लगाकर हत्या कर दी थी।


इनसे पहले कोई महिला गवर्नर नहीं बनी थी, कांग्रेस की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष भी थीं सरोजिनी नायडू


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