UPPSC पेपर लीक कोलकाता पुलिस ने दी थी खबर फिर भी रहे बेखबर अभ्यर्थियों को यहां रटाये गये थे सवालों के जवाब

2019-06-04T09:52:35+05:30

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित एलटी ग्रेड परीक्षा का पेपर आउट होने के मामले की पर्तें उधड़ने लगी हैं।

- यूपीपीएससी की एलटी ग्रेड परीक्षा का पेपर आउट होने का मामला
- कोलकाता सीआईडी को प्रिंटर्स के करीबी ने बताया था पेपर आउट का राज

- यूपी पुलिस को सूचना मिलने के बाद शुरू हुई थी दोषियों पर कार्रवाई
ashok.mishra@inext.co.in
LUCKNOW : उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित एलटी ग्रेड परीक्षा का पेपर आउट होने के मामले की पर्तें उधड़ने लगी हैं। इस मामले में परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार की गिरफ्तारी के बाद यूपी पीसीएस एसोसिएशन ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है तो एसटीएफ भी अपने कदम पीछे हटाने को तैयार नहीं है। सूत्रों की मानें तो एसटीएफ ने पुख्ता सुबूतों के आधार पर ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जिनमें परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार भी शामिल हैं। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इस पूरे प्रकरण की कोलकाता पुलिस को पहले से जानकारी थी और उसने ही यूपी पुलिस को पेपर आउट होने की सूचना देकर तत्काल कार्रवाई करने को कहा था। इसके बाद एसटीएफ ने हरकत में आते हुए यूपी पीएससी के सचिव को पत्र लिखकर इसके बारे में बताया और रिजल्ट जारी न करने का अनुरोध किया। इसके बावजूद यूपीपीएससी के अफसरों द्वारा आनन-फानन में रिजल्ट जारी कर दिया गया।
प्रिंटर के करीबी ने दी थी खबर
दरअसल पेपर आउट होने के प्रकरण का खुलासा करने वाला कोई और नहीं, बल्कि कोलकाता की कांफिडेंशियल प्रिंटिंग प्रेस के मालिक कौशिक का बेहद करीबी अशोक देव चौधरी था। उसने कोलकाता सीआईडी को पेपर आउट कराकर अभ्यर्थियों को भेजे जाने की गोपनीय सूचना दी थी। बेहद संवेदनशील मामला होने की वजह से कोलकाता सीआईडी के अफसरों ने तत्काल इसकी सूचना यूपी पुलिस के अफसरों को दी जिसके बाद यह मामला एसटीएफ के सुपुर्द कर दिया गया। एसटीएफ ने अशोक देव चौधरी से संपर्क साधा तो उसने बताया कि 29 जुलाई, 2018 को आयोजित होने वाली एलटी ग्रेड परीक्षा का पेपर लिफाफे में आवेदकों को दिया गया था। परीक्षा से एक दिन पहले 28 जुलाई को वाराणसी के किसी कोचिंग अथवा स्कूल की बिल्डिंग में 50 से ज्यादा अभ्यर्थियों को बुलाकर पेपर में पूछे गये सवालों के जवाब रटाए गये। ये सभी अलीगढ़, मथुरा, जौनपुर, गाजीपुर व अन्य जिलों से आए थे। बाद में उन्होंने लखनऊ, सीतापुर, बाराबंकी और कानपुर स्थित अपने सेंटर्स पर जाकर पेपर सॉल्व किया। इसके बाद एसटीएफ ने उस आवेदक को भी तलाश लिया जिसको लिफाफे में पेपर भेजा गया था। पूछताछ में उन सभी अभ्यर्थियों के नाम सामने आ गये जिनको पेपर रटाया गया था।
नहीं मानी सलाह, वाट्सएप से मिले सुबूत
पेपर आउट कराने वाले प्रिंटर की कारस्तानी और एक दिन पहले इसे सॉल्व करके एग्जाम देने पहुंचे अभ्यर्थियों का पता लगने के बाद एसटीएफ ने यूपी पीएससी के अफसरों को पत्र लिखकर रिजल्ट रोकने को कहा पर उनकी सलाह नहीं मानी गयी। उधर, एसटीएफ यूपीपीएससी के उन अफसरों पर भी नजरें जमाए थी जो संदेह के दायरे में थे। एसटीएफ के सूत्रों की मानें तो परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार प्रिंटिंग प्रेस के मालिक कौशिक के संपर्क में थीं और वाट्सएप पर उससे अशोक राय चौधरी द्वारा की गयी शिकायत के बारे में भी पूछा था। उनके बीच हुए पैसों के लेन-देन के बारे में भी एसटीएफ के अधिकारी पुख्ता सुबूत होने का दावा कर रहे हैं। एसटीएफ द्वारा अंजू कटियार और कौशिक कुमार के बीच हुई बातचीत का पूरा रिकार्ड पता लगाने के लिए उनके मोबाइल को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा चुका है।

अंजू कटियार सस्पेंड

एलटी ग्रेड परीक्षा में धांधली के आरोप में गिरफ्तार उप्र लोकसेवा आयोग की परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार को राज्य सरकार ने सस्पेंड कर दिया। यह कदम एसटीएफ द्वारा उनकी गिरफ्तारी के 48 घंटे की अवधि बीतने की वजह से उठाया गया है। ध्यान रहे कि अंजू कटियार की गिरफ्तारी के बाद से ही पीसीएस एसोसिएशन उनके बचाव में लामबंद हो रही है। बीते दिनों पीसीएस एसोसिएशन ने बैठक कर एसटीएफ की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठाए थे।
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फैक्ट मीटर
- 28 जुलाई, 2018 को वाराणसी में अभ्यर्थियों को रटाया गया था पेपर
- 29 जुलाई, 2018 को अभ्यर्थियों ने पहले से रटे पेपर से दिया एग्जाम
- 20 दिसंबर, 2018 को एसटीएफ ने अभ्यर्थियों से की थी पूछताछ
- 04 जनवरी, 2019 को एसटीएफ ने पेपर आउट होने की दी सूचना
- 10 जनवरी, 2019 को एसटीएफ ने 29 संदिग्ध अभ्यर्थियों की सूची दी
- 25 फरवरी, 2019 को एसटीएफ ने रिजल्ट न जारी करने का किया अनुरोध
- 16 मार्च, 2019 को यूपीपीएससी ने एग्जाम का पहला रिजल्ट जारी किया



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